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Gorakhpur News: नए टैक्स का पहले सराफा अब व्यापार मंडल ने जताया विरोध

Wed, 21 Jun 2023 02:12 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jun 2023 02:12 AM IST
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The first bullion of the new tax, now the Board of Trade has
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने नगर आयुक्त से की मुलाकात
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गोरखपुर उद्योग व्यापार मंडल ने लगाया आरोप, 54 दुकानदारों से ले चुके हैं कर
नगर आयुक्त ने विश्वास दिलाया, अभी सिर्फ सर्वे हो रहा, किसी ने कर लिया होगा तो करेंगे निलंबित
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। सराफा मंडल के बाद अब गोरखपुर उद्योग व्यापार मंडल ने भी दुकानों से लाइसेंस शुल्क लेने का विरोध जताया है। व्यापार मंडल ने आरोप लगाय कि पिछले कुछ दिनों से नगर निगम के कर्मचारी दुकानों पर जाकर दबाव बनाकर इसे वसूल रहे हैं। इससे व्यापारियों के मन में डर बैठ गया है। जबकि, पिछले दिनों सराफा मंडल के अध्यक्ष व संरक्षक ने भी इस कर को लेकर मेयर से विरोध जताया था।
जिलाध्यक्ष नितिन कुमार जायसवाल ने इसे लेकर मंगलवार को नगर आयुक्त से मुलाकात की। उन्हें मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। कहा कि जब जीएसटी लगा था तब कहा गया था एक राष्ट्र, एक टैक्स और ये भी कहा गया था कि अब नागरिकों और व्यापारियों से विभिन्न तरह के टैक्स को ना लेकर केवल एक टैक्स लेने पर सरकार काम कर रही है। बहुत सारे अनावश्यक टैक्स को हटा दिया गया था।
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लेकिन, नगर निगम एक बार फिर से नया टैक्स ले रहा है। आरोप लगाया कि 54 दुकानों से मनमाने तरीके से नगर निगम कर्मियों ने टैक्स वसूला है। कहा कि नगर निगम पहले से ही मकानों और दुकानों से हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, नामांतरण और अन्य कार्यों का टैक्स लेता है। निगम अपनी दुकानें और भवन बनवाकर उसका भी किराया लेती ही है। इसके अलावा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए भी शुल्क लिया जा रहा है। अब लाइसेंस शुल्क लगाकर दुकानदारों का उत्पीड़न किया जा रहा है। इस दौरान विवेक अग्रवाल, संजय गर्ग और अमित सिंह पटेल मौजूद रहे।
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नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि व्यापारियों की दुकानों का सर्वे करवाया जा रहा है। अगर किसी ने कर लिया है, तो ये गलत है। आकर शिकायत करें, जांच करवाएंगे, आरोप सही होने पर निलंबन की कार्रवाई होगी।


सराफा मंडल ने मेयर के सामने रखा अपना पक्ष
सराफा मंडल के अध्यक्ष गणेश वर्मा और संरक्षक पंकज गोयल ने बताया कि इस तरह के कर से दुकानदारों का नुकसान होगा। पिछली बार संगठन के विरोध से ही इस कर को वापस लिया गया था। इसे लेकर मेयर के सामने भी अपनी बात रखी गई है। हिंदी बाजार में बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी हैं। दिनभर दुकान खोलने के बाद उनके यहां एक ग्राहक भी नहीं पहुंचते। ऐसे में साल में 25 हजार रुपये का टैक्स देना कितना सही होगा?
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