फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   The Ashwin Krishna Paksha will span 14 days, while the observance of Shraddh will continue for 16 days.

Gorakhpur News: पितृ पक्ष 27 सितंबर से, पूर्णिमा का श्राद्ध एक दिन पहले 26 को

Mon, 21 Sep 2026 02:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Mon, 21 Sep 2026 02:29 AM IST
विज्ञापन
The Ashwin Krishna Paksha will span 14 days, while the observance of Shraddh will continue for 16 days.
- 14 दिनों का होगा आश्विन कृष्ण पक्ष, 16 दिनों तक चलेगा श्राद्ध का क्रम
विज्ञापन

- प्रतिदिन तिथि के अनुसार होगा पूर्वजों का तर्पण
- 10 अक्तूबर को अमावस्या पर होगा सर्वपितृ श्राद्ध और पितृ विसर्जन



गोरखपुर। पितृ पक्ष का आरंभ इस बार 27 सितंबर से होगा। पूर्णिमा तिथि में दिवंगत पूर्वजों का श्राद्ध एक दिन पहले 26 सितंबर को किया जाएगा। इस तरह तर्पण और श्राद्ध का क्रम 26 सितंबर से ही शुरू हो जाएगा। आश्विन कृष्ण पक्ष 27 सितंबर से 10 अक्तूबर अमावस्या तक रहेगा। इस दौरान तिथि के अनुसार पूर्वजों का श्राद्ध किया जाएगा।

गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के वेद विभागाध्यक्ष डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा के दिन कुतप बेला में पूर्णिमा होने के कारण इस तिथि में दिवंगत पितरों का श्राद्ध 26 सितंबर को ही किया जाएगा। इसके बाद तिथि क्रम के अनुसार श्राद्ध कर्म चलता रहेगा। दो अक्तूबर को षष्ठी और सप्तमी का श्राद्ध एक ही दिन किया जाएगा।
विज्ञापन


गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र ने बताया कि पितृ पक्ष के दौरान अलग-अलग तिथियों पर श्राद्ध का विधान है। 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध और पितृ विसर्जन होगा। इसके बाद 11 अक्तूबर की सुबह नाना के श्राद्ध का विधान है। श्राद्ध का क्रम 26 सितंबर से शुरू होकर 11 अक्तूबर की सुबह तक चलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
- पितृ पक्ष में प्रतिदिन होगा तर्पण
पंडित विकास मालवीय ने बताया कि पितृ पक्ष में तिथि के अनुसार श्राद्ध के साथ प्रतिदिन तर्पण किया जाता है। देवताओं और ऋषियों को जल अर्पित करने के बाद पितरों को जल देकर तृप्त करने की परंपरा है। आश्विन अमावस्या को पितरों के लिए विशेष फलदायी माना गया है। पितृ पक्ष की नवमी माता के श्राद्ध के लिए विशेष मानी जाती है। श्राद्ध का अधिकार मुख्य रूप से पुत्र को होता है। पुत्र के अभाव में पौत्र और उसके अभाव में पुत्री का पुत्र यानी दौहित्र श्राद्ध कर सकता है। पुत्र और पौत्र न होने पर परिवार का अन्य उत्तराधिकारी भी श्राद्ध कर्म कर सकता है। पुत्र न होने की स्थिति में विधवा भी पति का श्राद्ध कर सकती है।
---
- तिथि के अनुसार इस दिन कर सकते हैं पूर्वजों का श्राद्ध
26 सितंबर, पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध
27 सितंबर, प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध
28 सितंबर, द्वितीया तिथि का श्राद्ध
29 सितंबर, तृतीया तिथि का श्राद्ध
30 सितंबर, चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
एक अक्तूबर, पंचमी तिथि का श्राद्ध
दो अक्तूबर, षष्ठी व सप्तमी तिथि का श्राद्ध
तीन अक्तूबर, अष्टमी तिथि का श्राद्ध
चार अक्तूबर, नवमी तिथि का श्राद्ध
पांच अक्तूबर, दशमी तिथि का श्राद्ध
छह अक्तूबर, एकादशी तिथि का श्राद्ध
सात अक्तूबर, द्वादशी तिथि का श्राद्ध
आठ अक्तूबर, त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
नाै अक्तूबर, चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध
10 अक्तूबर, सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध- पितृ विसर्जन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed