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शिक्षक दिवस विशेष: युवा इस शख्स के पास सीखते हैं देश सेवा का सबक, जानिए क्या है इनका गुरु मंत्र

Sun, 05 Sep 2021 04:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 05 Sep 2021 04:01 PM IST
सार

चौरीचौरा के रिटायर्ड कैप्टन ने 1992 में शुरू किया था सेना भर्ती प्रशिक्षण केंद्र। 1993 में पहले युवक का सेना में चयन होने के बाद क्षेत्र के युवाओं में बढ़ा आकर्षण। साढ़े तीन हजार युवक-युवतियां सेना, पुलिस व पैरा मिलिट्री क्षेत्र में चयनित हो चुके हैं।

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teachers day special story of Retired Captain Adya Prasad Dubey Free Army Recruitment Training Center
रिटायर्ड कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे के ट्रेनिंग सेंटर में सेना के लिए तैयार होते हैं जवान। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मातृभूमि के प्रति जज्बा और एक अच्छा शिक्षक होना कोई सेना के रिटायर्ड कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे से सीखे। कैप्टन ने  सेना में रहते हुए देश की सीमा पर दुश्मनों को सबक सिखाया और अब गांव में रहकर युवाओं को सेना में कैसे भर्ती हो इसका सबक सिखा रहे हैं। बीते 28 वर्ष में ट्रेनिंग देकर उन्होंने सेना के विभिन्न आयामों के लिए तीन हजार से अधिक युवाओं को तैयार किया है। अपने गांव के कुछ अराजक युवाओं को ट्रेनिंग देने से शुरू हुए इस सफर में अब कई राज्यों के युवा जुड़ चुके हैं, ट्रेनिंग का यह सिलसिला जारी है। आद्या प्रसाद बताते हैं कि 1992 में वह सेना से कैप्टन पद से रिटायर होकर अपने गांव चौरीचौरा के मिठाबेल लौटे थे। गांव पहुंचे ही थे कि पता चला कि एक युवक ने महज पांच सौ रुपये लूटने के इरादे से एक मजदूर की गोली मार कर हत्या कर दी है। गांव में घूमे तो अधिकतर युवक भटके हुए और अराजक कार्यों में लिप्त मिले। उन्होंने ऐसे युवाओं को अनुशासन सिखाने की ठान ली। गांव के पांच लड़कों को सेना में भर्ती देने की ट्रेनिंग शुरू की। पहले वर्ष एक लड़के का चयन सेना में हुआ।
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इसका असर यह हुआ कि क्षेत्र के बेरोजगार युवा आकर्षित हुए और उनसे जुड़ते चले गए। युवाओं की संख्या बढ़ी तो उन्होंने सहसरांव में भी एक ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया। बीते 28 वर्ष में उनके ट्रेनिंग सेंटर से निकले तीन हजार से अधिक युवा सेना, जल सेना, एनडीए, वायुसेना के साथ विभिन्न प्रदेशों की पुलिस में देश की सेवा कर रहे हैं। आद्या प्रसाद दुबे कहते हैं कि निशुल्क ट्रेनिंग सेंटर में वह युवाओं से शुल्क के रूप में बस अनुशासन, लगन और मेहनत की मांग करते हैं।
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पड़ोसी राज्यों से प्रशिक्षण लेने आ रहे युवा

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रिटायर्ड कैप्टन आद्या प्रसाद दुबे। - फोटो : अमर उजाला।
आद्या प्रसाद दुबे के निशुल्क ट्रेनिंग सेंटर की सफलता का असर अब गोरखपुर के आसपास जिलों के साथ ही पड़ोसी राज्य बिहार, झारखंड के युवाओं को आकर्षित कर रही है। दूसरे जिलों और राज्यों से आए यह युवा गांव के आसपास किराए का मकान लेकर रह रहे हैं। वह प्रशिक्षण के दौरान पसीना बहाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते। वर्तमान में भी उनके ट्रेनिंग सेंटर में तीन सौ से अधिक युवक-युवतियां ट्रेनिंग ले रहे हैं।
 
गुरु को सरहद से याद करते हैं जवान
कैप्टन आद्या प्रसाद गर्व से बताते हैं कि उनके ट्रेनिंग सेंटर से निकल कर देश की सैन्य शक्ति का हिस्सा बने युवा जब भी मौका पाते हैं, उन्हें फोन कर आशीर्वाद लेते हैं। वह युवाओं को एक ही सीख देते हैं कि देश से बढ़ कर एक हिंदुस्तानी के लिए कुछ नहीं होना चाहिए।
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