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गोरखपुर विश्वविद्यालय: कुलपति के दफ्तर में जबरन घुस गए शिक्षक, हंगामा

Sun, 04 Jul 2021 09:05 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 04 Jul 2021 09:05 AM IST
सार

अमर्यादित आचरण का आरोप, कुल सचिव ने प्राचार्यों को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए कहा।

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Teachers created ruckus by forcibly entering office of Vice Chancellor of Gorakhpur University
DDU Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध डिग्री कॉलेजों के तीन शिक्षकों ने शुक्रवार को कुलपति के दफ्तर में जबरन घुसकर जमकर हंगामा किया। कुल सचिव विश्वेश्वर प्रसाद ने संबंधित महाविद्यालय के प्राचार्यों को हंगामा करने वाले शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है।
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कुल सचिव ने अपने पत्र में लिखा है कि शिक्षकों ने जो आचरण किया है वह दंडनीय है। इस मामले में कार्रवाई करके तीन दिन के अंदर विश्वविद्यालय प्रशासन को अवगत कराया जाए। विश्वविद्यालय स्तर से भी कार्रवाई की जाएगी। मामले की सूचना शासन को भेजी गई है। 
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विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक दो जुलाई को दोपहर दो बजे के करीब कुलपति प्रो. राजेश सिंह अपने कार्यालय से प्राचीन इतिहास विभाग की ऑनलाइन कार्यशाला से जुड़े थे। इसी बीच बीआरडी पीजी कॉलेज देवरिया के डॉ. केडी तिवारी, डीवीएन पीजी कॉलेज गोरखपुर के डॉ. धिरेंद्र सिंह और नेशनल पीजी कॉलेज बड़हलगंज के डॉ. एसएन शर्मा आ गए। 
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डॉ. केडी तिवारी गोरखपुर विश्वविद्यालय संबद्ध कॉलेज शिक्षक संघ (गुआक्टा) क़े अध्यक्ष व डॉ. धिरेंद्र महामंत्री हैं। डॉ. एसएन शर्मा पूर्व अध्यक्ष हैं। आरोप है कि तीनों शिक्षकों ने कुलपति के कार्यालय में जबरन घुसने का प्रयास किया। चीफ प्रॉक्टर अधिष्ठाता छात्र कल्याण और समन्वयक टेक्निकल सेल ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। 

आरोप है कि उन्होंने गाली गलौच की और कुलपति कार्यालय के के मुख्य दरवाजे पर धक्का मारकर अंदर घुस गए। इससे कार्यशाला में व्यवधान पैदा हुआ। शिक्षकों ने कुलपति की गरिमा का ख्याल नहीं रखा और गलत तरीके से बात की। 

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कृत्य को निंदनीय बताया है। कहा है कि यह अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। विश्वविद्यालय अध्यादेश की एक नियमावली के मुताबिक दंडनीय है। बताते हैं कि पहले भी गुआक्टा के पदाधिकारियों की प्रशासनिक अफसरों से कहासुनी हो चुकी है। 

गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुल सचिव विश्वेश्वर प्रसाद ने बताया कि शिक्षक जिन कॉलेजों में पढ़ाते हैं, उनके प्राचार्यों को पत्र लिखा गया है। तीन दिन में जवाब तलब किया गया है। इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

गुआक्टा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एसएन शर्मा ने बताया कि स्नातक के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को शोध कराने का अधिकार है। इस पर 3 मार्च को एकेडमिक काउंसिल और 20 मार्च 2022 को एक्जीक्यूटीव काउंसिल की मुहर लग चुकी है। इसके बावजूद राज्यपाल ने अनुमोदन के लिए फाइल आगो नहीं बढ़ाई जा रही है। इससे शिक्षकों का नुकसान हो रहा है। सेल्फ फाइनेंस के शिक्षक रिसर्च करा रहे हैं, लेकिन नियमित शिक्षक भटक रहे हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। शिक्षकों पर अभद्रता के आरोप निराधार हैं। डिग्री शिक्षक अमर्यादित आचरण नहीं कर सकते हैं।  
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