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गोरखपुर: कोरोना के आगे बेदम हुआ स्वाइन फ्लू, पिछले दो सालों से नहीं दर्ज हुए एक भी केस

Thu, 02 Sep 2021 07:35 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 02 Sep 2021 07:35 PM IST
सार

गोरखपुर जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि लोगों ने काफी हद तक मास्क लगाया और सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया। इसका असर भी पड़ा है। महामारी के बीच अगर किसी को लक्षण भी रहे होंगे तो लोग कोरोना समझकर इलाज करवा लिए होंगे।

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Swine flu not single case registered since last two years in Gorakhpur
स्वाइन फ्लू। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media

विस्तार

कोरोना महामारी के बीच स्वाइन फ्लू वायरस बेदम हो गया है। पिछले दो साल से इस वायरस से कोई भी संक्रमित नहीं मिले हैं न ही किसी मरीज की मौत हुई है। जबकि पहले हर साल मरीज मिलते थे। डॉक्टरों का कहना है कि स्वाइन फ्लू पिछले दो साल से लगभग खत्म हो गया है। हालांकि एक कारण डॉक्टर और भी मानते हैं कि महामारी के बीच स्वाइन फ्लू की टेस्टिंग भी नाम मात्र की हुई है।

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जानकारी के मुताबिक कोरोना संक्रमण के बीच स्वाइन फ्लू के एक भी मरीज नहीं मिले हैं। विभाग का मानना है कि महामारी ने स्वाइन फ्लू का एकदम खत्म ही कर दिया है। यही वजह है कि मरीज नहीं मिल रहे हैं। वही, दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना हे कि महामारी के बीच लोग स्वाइन फ्लू को कोरोना समझकर जांच नहीं कराए। क्योंकि कोरोना और स्वाइन फ्लू के लक्षण लगभग एक जैसे ही हैं।
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ऐसे में लोगों ने कोरोना जांच को प्राथमिकता देते हुए दवाओं का सेवन किया और लोग ठीक भी हो गए। गोरखपुर जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि लोगों ने काफी हद तक मास्क लगाया और सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया। इसका असर भी पड़ा है। महामारी के बीच अगर किसी को लक्षण भी रहे होंगे तो लोग कोरोना समझकर इलाज करवा लिए होंगे। जांच के बारे में उन्होंने सोचा भी नहीं होगा। क्योंकि दोनों के लक्षण एक ही जैसे हैं। सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने बताया कि पिछले दो सालों में एक भी स्वाइन फ्लू के मरीज नहीं मिले हैं। यह राहत की बात है।
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बीआरडी में होती है जांच
स्वाइन फ्लू की जांच केवल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में होती है। निजी पैथालॉजी में स्वाइन फ्लू की जांच काफी महंगा है। एक जांच के लिए पांच हजार से लेकर सात हजार तक खर्च करने पड़ते हैं। इसके बाद भी निजी पैथालॉजी की जांच को विभाग नहीं मानता है। केवल सरकारी अस्पतालों की जांच विभाग मानता है।

 

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