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Gorakhpur News: कस्तूरबा विद्यालय में पढ़ाई ठप...शिक्षक भी छुट्टी पर
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- विद्यालय से ज्यादातर छात्राएं घर लौटीं, तनावपूर्ण माहौल में शिक्षक भी
- ग्रामीणों का कहना- ऐसा माहौल विद्यालय के लिए ठीक नहीं, छात्राओं की भी बात सुनी जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
उनवल (गोरखपुर)। खजनी तहसील के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय उसवा बाबू में हालात पिछले कुछ दिनों से लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। स्थिति यह है कि सोमवार से छात्राओं के साथ सहायक शिक्षिकाएं भी अवकाश पर चली गईं जिसके कारण पूरा विद्यालय केवल वार्डन के सहारे संचालित हो गया है। कागजों में भले ही छात्राओं की संख्या अधिक दर्ज हो लेकिन मौके पर लगभग 50 छात्राएं ही रह गईं हैं।
शिक्षिकाओं का अचानक अवकाश पर चले जाना चर्चा में है क्योंकि विद्यालय संचालन की प्राथमिक जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरा घटनाक्रम किसी बड़े विवाद या अंदरूनी खींचतान का हिस्सा है, जिसका सीधा असर गरीब और वंचित परिवारों से आने वाली छात्राओं पर पड़ रहा है। वार्डन अर्चना पांडेय के लंबे कार्यकाल और कुछ समय पहले छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर भी असंतोष की आवाजें दोबारा उठने लगी हैं। पिछले वर्ष कुछ छात्राओं ने प्रताड़ना की शिकायत भी की थी लेकिन कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। अब छात्राओं के विद्यालय छोड़ने और शिक्षिकाओं के अनुपस्थित हो जाने से नए सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा प्रभावित न हो तथा विद्यालय में जल्द सामान्य व्यवस्था बहाल की जा सके।
छात्राएं अब भी डरी हुईं
छात्रा शिवानी ने बताया कि वार्डन ने पिछले वर्ष उनकी पिटाई की थी। वह उन्हें हमेशा डांट लगाती रहती थीं। जब तक वह रहेंगी तब तक स्कूल नहीं जाएगी। अनुष्का ने बताया कि वार्डन बिना बात के ही मारती थीं। हम लोग गलती नहीं करते थे फिर भी प्रताड़ित करती थीं। इस संदर्भ में बीईओ खजनी सावन दुबे ने बताया कि वर्तमान में लगभग 50 छात्राएं उपस्थित हैं। कुछ शिक्षिकाएं अवकाश पर हैं। सोमवार को एक और शिक्षिका छुट्टी पर गई थीं। बृहस्पतिवार तक सभी शिक्षिकाओं के लौट आने की संभावना है।
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वर्जन
फिलहाल छात्राओं की संख्या 50 है। कोर्ट के आदेश पर ज्वॉइनिंग हुई है। दो शिक्षिकाएं पहले से अवकाश पर थीं जबकि दो अन्य ज्वाॅइनिंग के दौरान छुट्टी पर चली गईं। वर्तमान में पूरे विद्यालय में मेरे अलावा कोई भी शिक्षिका मौजूद नहीं है। जो छात्राएं घर गई थीं, वे धीरे-धीरे वापस आ रही हैं।
- अर्चना पांडेय, वार्डन
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- ग्रामीणों का कहना- ऐसा माहौल विद्यालय के लिए ठीक नहीं, छात्राओं की भी बात सुनी जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
उनवल (गोरखपुर)। खजनी तहसील के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय उसवा बाबू में हालात पिछले कुछ दिनों से लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। स्थिति यह है कि सोमवार से छात्राओं के साथ सहायक शिक्षिकाएं भी अवकाश पर चली गईं जिसके कारण पूरा विद्यालय केवल वार्डन के सहारे संचालित हो गया है। कागजों में भले ही छात्राओं की संख्या अधिक दर्ज हो लेकिन मौके पर लगभग 50 छात्राएं ही रह गईं हैं।
शिक्षिकाओं का अचानक अवकाश पर चले जाना चर्चा में है क्योंकि विद्यालय संचालन की प्राथमिक जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरा घटनाक्रम किसी बड़े विवाद या अंदरूनी खींचतान का हिस्सा है, जिसका सीधा असर गरीब और वंचित परिवारों से आने वाली छात्राओं पर पड़ रहा है। वार्डन अर्चना पांडेय के लंबे कार्यकाल और कुछ समय पहले छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर भी असंतोष की आवाजें दोबारा उठने लगी हैं। पिछले वर्ष कुछ छात्राओं ने प्रताड़ना की शिकायत भी की थी लेकिन कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। अब छात्राओं के विद्यालय छोड़ने और शिक्षिकाओं के अनुपस्थित हो जाने से नए सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा प्रभावित न हो तथा विद्यालय में जल्द सामान्य व्यवस्था बहाल की जा सके।
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छात्राएं अब भी डरी हुईं
छात्रा शिवानी ने बताया कि वार्डन ने पिछले वर्ष उनकी पिटाई की थी। वह उन्हें हमेशा डांट लगाती रहती थीं। जब तक वह रहेंगी तब तक स्कूल नहीं जाएगी। अनुष्का ने बताया कि वार्डन बिना बात के ही मारती थीं। हम लोग गलती नहीं करते थे फिर भी प्रताड़ित करती थीं। इस संदर्भ में बीईओ खजनी सावन दुबे ने बताया कि वर्तमान में लगभग 50 छात्राएं उपस्थित हैं। कुछ शिक्षिकाएं अवकाश पर हैं। सोमवार को एक और शिक्षिका छुट्टी पर गई थीं। बृहस्पतिवार तक सभी शिक्षिकाओं के लौट आने की संभावना है।
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फिलहाल छात्राओं की संख्या 50 है। कोर्ट के आदेश पर ज्वॉइनिंग हुई है। दो शिक्षिकाएं पहले से अवकाश पर थीं जबकि दो अन्य ज्वाॅइनिंग के दौरान छुट्टी पर चली गईं। वर्तमान में पूरे विद्यालय में मेरे अलावा कोई भी शिक्षिका मौजूद नहीं है। जो छात्राएं घर गई थीं, वे धीरे-धीरे वापस आ रही हैं।
- अर्चना पांडेय, वार्डन