गोरखपुर: दम्माम एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले कमलेश का शव गांव पहुंचा, बिलख पड़े परिजन
कमलेश अपने पीछे पत्नी सुनीता देवी, बेटियों तन्वी और तान्या तथा बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ गए हैं। उनके पिता हरिश्चंद्र पांडेय किसान हैं, जबकि मां शैला देवी का भी बेटे की मौत के बाद रो-रोकर बुरा हाल है। कमलेश परिवार की आजीविका का प्रमुख सहारा थे।
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सऊदी अरब के दम्माम एयरपोर्ट पर 21 अक्तूबर को हुए ड्रोन हमले में जान गंवाने वाले बांसगांव क्षेत्र के किशुनपुर उर्फ बगही निवासी कमलेश पांडेय का पार्थिव शरीर बुधवार दोपहर तीन बजे उनके पैतृक गांव पहुंचा। शव पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। पत्नी सुनीता देवी और दोनों बेटियों तन्वी व तान्या का रो-रोकर बुरा हाल था। जिस बेटे और पति के सुरक्षित लौटने की उम्मीद में परिवार इंतजार कर रहा था, उसे अंतिम विदाई के लिए पार्थिव शरीर के रूप में देखकर परिजन टूट गए।
शव के साथ उपजिलाधिकारी बांसगांव मलखान सिंह और बांसगांव थाने की पुलिस भी गांव पहुंची। कमलेश का पार्थिव शरीर देखते ही पत्नी सुनीता देवी बार-बार बेसुध हो जा रही थीं। होश आने पर फिर दहाड़ मारकर रोने लगती थीं। दोनों बेटियां भी पिता को याद कर बिलखती रहीं। घर से लेकर गांव तक शोक का माहौल रहा। परिवार को सांत्वना देने के लिए बांसगांव ब्लॉक प्रमुख शिवाजी सिंह, पूर्व सांसद कमल किशोर, कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव गया प्रसाद समेत सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और महिलाएं मौजूद रहीं।
तीन साल से दम्माम एयरपोर्ट पर कर रहे थे काम
कमलेश पांडेय पिछले करीब तीन वर्षों से सऊदी अरब के दम्माम एयरपोर्ट परिसर में बस चलाने का काम कर रहे थे। वह बीच-बीच में घर आते रहते थे। करीब पांच महीने पहले ही वह घर से दोबारा सऊदी अरब गए थे। 21 अक्तूबर को एयरपोर्ट पर हुए ड्रोन हमले में उनकी जान चली गई। घटना की खबर गांव पहुंचते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।
कमलेश अपने पीछे पत्नी सुनीता देवी, बेटियों तन्वी और तान्या तथा बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ गए हैं। उनके पिता हरिश्चंद्र पांडेय किसान हैं, जबकि मां शैला देवी का भी बेटे की मौत के बाद रो-रोकर बुरा हाल है। कमलेश परिवार की आजीविका का प्रमुख सहारा थे। उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए विदेश में नौकरी की थी। पिछले दिसंबर में उन्होंने अपनी बहन की शादी भी कराई थी।
हमले से कुछ देर पहले हुई थी पत्नी से आखिरी बातचीत
कमलेश की पत्नी सुनीता देवी को पति से हुई आखिरी बातचीत बार-बार याद आ रही है। परिजनों के मुताबिक, हमले से कुछ देर पहले ही दोनों की फोन पर बात हुई थी। उस समय कमलेश सामान्य थे। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर चिंता न करने की बात कही थी। इसके कुछ ही देर बाद दम्माम एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की खबर आई और परिवार की दुनिया उजड़ गई।
कमलेश की मौत के बाद पत्नी और बेटियों के सामने भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई है। बेटियां अपने पिता को याद कर भावुक हो जाती हैं। कमलेश चाहते थे कि उनकी बेटियां मन लगाकर पढ़ाई करें और आगे चलकर अपने पैरों पर खड़ी हों।
पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए परिवार ने लगाई थी गुहार
मलेश की मौत की सूचना मिलने के बाद से ही परिवार उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने और आर्थिक सहायता दिलाने की मांग कर रहा था। पिता हरिश्चंद्र पांडेय ने शव भारत लाने की प्रक्रिया तेज कराने के लिए संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई थी। परिजन बांसगांव के सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान से भी मिले थे। इसके बाद सांसद ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया था।