चुनावी फ्लैश बैक: गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति से निकले सूरमा और सियासत में छा गए
केंद्रीय मंत्री बने कल्पनाथ राय, शिवप्रताप चार बार विधायक व मंत्री रहे हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति राजमणि पांडेय, माता प्रसाद पांडेय, रवींद्र सिंह ने भी की है।
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गोरखपुर से छात्र राजनीति में कदम रखने वाले कई सूरमाओं ने प्रदेश ही नहीं, देश की सियासत में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। ये न सिर्फ सदन में पहुंचे, बल्कि कैबिनेट मंत्री का ओहदा भी हासिल किया।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति में सक्रिय कई नेता सदन पहुंचे। कल्पनाथ राय 1963 में गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए। इसके बाद कदम आगे बढ़े तो घोसी लोकसभा से चार बार सांसद और तीन बार राज्य सभा सदस्य बने। इंदिरा गांधी और नरसिंह राव सरकारों में मंत्री भी रहे।
गोरखपुर विश्वविद्यालय से छात्रसंघ की राजनीति करने वाले शिवप्रताप शुक्ल, गोरखपुर शहर से चार बार विधायक रह चुके हैं। प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे और अब वर्तमान में राज्यसभा के सदस्य हैं। बस्ती के राजमणि पांडेय भी 1972-73 में गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। वे 1989 में बस्ती सदर से विधायक चुने गए।
जनार्दन प्रसाद ओझा भी गोरखपुर विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से जुड़े रहे। समाजवादी आंदोलन में अगुवा रहे जनार्दन ओझा, छह बार महराजगंज के श्यामदेउरवा विधानसभा से विधायक चुने गए और प्रदेश में मंत्री बने। गोरखपुर विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में परास्नातक की उपाधि प्राप्त करने वाले सिद्धार्थनगर के माता प्रसाद पांडेय पढ़ाई के दौरान ही छात्र आंदोलनों में कूद पड़े। सिद्धार्थनगर के इटवा क्षेत्र का छह बार प्रतिनिधित्व कर चुके माता प्रसाद पांडेय ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, श्रम मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने दो बार विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभाई है।
पांच बार एमएलसी और विधान परिषद के सभापति गणेश शंकर पांडेय भी छात्र राजनीति से ही तपकर निकले हैं। वे छात्रसंघ चुनाव तो नहीं लड़े, लेकिन छात्र राजनीति में हमेशा सक्रिय रहे। गोरखपुर विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय से छात्रसंघ अध्यक्ष रहे रवींद्र सिंह भी 1977 में कौड़ीराम से विधायक चुने गए। रवींद्र सिंह का अपने क्षेत्र में प्रभाव इतना ज्यादा था कि उनके निधन के बाद पत्नी गौरी देवी तीन बार विधायक चुनी गईं। इसी प्रकार पिपराइच विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर विधायक और फिर मंत्री बने जितेंद्र जायसवाल उर्फ पप्पू भइया भी डीएवी डिग्री कॉलेज में छात्रसंघ की राजनीति करते थे।
इलाहाबाद विवि छात्रसंघ अध्यक्ष रहे पूर्व सांसद बृजभूषण
बस्ती से सांसद रहे बृजभूषण तिवारी भी छात्र राजनीति से ही निकले थे। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। वे समाजवादी आंदोलन में भी सक्रिय रहे।
इन्होंने भी प्रयास किया पर सफल नहीं हुए
कई ऐसे भी छात्रसंघ के पदाधिकारी और छात्रनेता रहे, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में जोर आजमाइश की पर सफल नहीं हुए। हालांकि, इन इन नेताओं ने स्थानीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे अशोक कुमार श्रीवास्तव ने शहर विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसी तरह पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दिनेश चंद्र श्रीवास्तव ने शहर विधानसभा और महामंत्री रहे विनय कुमार सिंह विन्नू ने भी चौरीचौरा विधानसभा से चुनाव लड़ा। लेकिन, सदन में पहुंचने में कामयाब नहीं हुए।