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Exclusive: हजारों वर्ष पुरानी 'गुरुकुल पद्धति' से पनपेगी बेसिक की नर्सरी, बदलेगी स्कूलों की सूरत

Thu, 10 Jun 2021 05:01 PM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 10 Jun 2021 05:01 PM IST
सार

नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों को पर्यावरण, जल सरंक्षण के साथ स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का है प्रावधान, कक्षा छठवीं से आठवीं के बच्चों को रोजाना 15 से 20 मिनट करनी होगी साफ सफाई।

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student aware of environment water conservation by new education policy
फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala

विस्तार

बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में अब वर्षों पुरानी गुरुकुल पद्धति को वापस फिर से अमल में लाए जाने की कवायद शुरू की गई है। नई शिक्षा नीति में भी इस पद्धति को अपनाने का प्रावधान किया गया है। नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों को मौलिक अधिकारों, नागरिकता कौशल, जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता, स्वच्छता, जलवायु परिवर्तन और अपशिष्ट प्रबंधन आदि के बारे में जानकारी देने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत अब साफ-सफाई की कमान छात्र-छात्राएं संभालेंगे।
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नए सत्र से कक्षा छह से आठ तक हर सरकारी स्कूल में ये व्यवस्था लागू होगी। जिसके तहत बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में हर विद्यार्थी को 15 से 20 मिनट तक रोजाना सफाई करनी होगी। कक्षा एक से पांच तक के बच्चे इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे। कक्षा छह से आठ तक के बच्चों के लिए ये अनिवार्य होगा। नई शिक्षा नीति में बच्चों को उनके मौलिक अधिकार, स्वच्छता आदि के बारे में परिपक्व करने का प्रावधान किया गया है।
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उसी के तहत शासनस्तर से ये फैसला किया गया है। स्कूलों में मेरा विद्यालय-स्वच्छ विद्यालय कार्यक्रम चलाया जाएगा। बच्चों के अलावा शिक्षक भी इस काम में जुटेंगे। वे न केवल विद्यार्थियों को साफ-सफाई का अभ्यास करने के लिए प्रेरित करेंगे बल्कि उनका मार्गदर्शन कर खुद भी सफाई करेंगे। इसके लिए शिक्षकों की ओर से छात्र-छात्राओं का समूह भी तैयार किया जाएगा। स्कूल की समय सारिणी में भी ये शामिल किया जाएगा।
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जिले के 2504 स्कूल
जिले में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट स्कूलों की कुल संख्या 2504 है। जिसमें करीब 3 लाख 68 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।


बीएसए बीएन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रावधान के अनुसार नई व्यवस्था का क्रियान्वयन अगले सत्र से कराने का प्रयास होगा। इसके क्रियान्वयन के संबंध में शासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश आने पर इसको लागू कराया जाएगा।

 
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