जाम में फंस जाएं तो: मरीज की सांस फूल जाती है, स्टेशन से गाड़ी छूट जाती है
मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार के सामने ही ऑटो स्टैंड बन गया है। यह हाल तब है, जबकि पास में ही पुलिस चौकी है। लेकिन, पुलिस वाले कभी जाम को हटाने पर ध्यान नहीं देते हैं। वहीं, राहगीर और मरीज इस समस्या से रोज परेशान होते हैं।
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गोरखपुर मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और रेलवे स्टेशन के रास्ते पर आप कभी भी जाम में फंस सकते हैं। ट्रेन छूट सकती है और मरीज को एंबुलेंस से ले जा रहे हैं, तो तबीयत और भी बिगड़ सकती है। इन रास्तों पर फर्राटे से निकल पाना आसान नहीं है।
सड़क पर कब्जा तो है ही, बेतरतीब खड़े ऑटो ज्यादा तकलीफ दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार के सामने ही ऑटो स्टैंड बन गया है। यह हाल तब है, जबकि पास में ही पुलिस चौकी है। लेकिन, पुलिस वाले कभी जाम को हटाने पर ध्यान नहीं देते हैं। वहीं, राहगीर और मरीज इस समस्या से रोज परेशान होते हैं।
मेडिकल कॉलेज गेट
अवैध ऑटो स्टैंड के मकड़जाल में फंसी एंबुलेंस, कराहने लगा मरीज
बुधवार को दोपहर के करीब 12 बजे मेडिकल कॉलेज गेट के सामने अवैध ऑटो स्टैंड के मकड़जाल में एक एंबुलेंस फंस गई। एंबुलेंस में एक गर्भवती थी। मरीज को दर्द से कराहता देख एंबुलेंस चालक जल्दी निकलने की जद्दोजहद करता नजर आया। मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर चालक ने बताया, यह आए दिन की समस्या है। पूरे शहर से शायद आप बिना जाम में फंसे यहां तक पहुंच जाएं लेकिन मेडिकल कॉलेज गेट पर आपको कम से कम दस मिनट परेशान होना पड़ेगा। गंभीर मरीज के लिए जब एक-एक मिनट कीमती हो तो यह इंतजार कई बार जानलेवा साबित होता है। गेट पर ही ऑटो वाले कब्जा किए रहते हैं। गेट के बगल में ही पुलिस चौकी है लेकिन यहां मौजूद पुलिसकर्मी समस्या के प्रति बेपरवाह रहते हैं
बीच सड़क पर एंबुलेंस के आगे ठेला खड़ा कर बेचने लगे अंगूर
बुधवार दोपहर 12.30 बजे। शास्त्री चौक के पास अंगूर का ठेला लिए शख्स किनारे से अचानक सड़क के बीचोबीच आ गया। वहीं पर उसे ग्राहक मिल गया, तो ठेला खड़ा कर अंगूर के लिए मोलभाव होने लगा। मरीज लेकर जा रही एंबुलेंस पीछे से हूटर बजाती रही लेकिन ठेले वाले को फर्क नहीं पड़ा। एंबुलेस में मौजूद मरीज का पैर टूटा हुआ था और वह दर्द से कराह रहा था। तीमारदार खजनी के रमेश को जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो नीचे आकर ठेले को किनारे करवाया, फिर एबंलेंस निकल पाई।
कुछ यही हाल जिला अस्पताल के दूसरी ओर चौराहे घोष कंपनी का भी था। यहां भी जाम में एंबुलेंस फंसी हुई थी। यह स्थिति लगभग रोजाना की है। जिला अस्पताल रोड पर शास्त्री चौक से ही सड़क के दोनों किनारों पर ठेले वालों का कब्जा रहता है। इसके बाद रही सही कसर वाहन रोककर उन ठेले वालों से सामान खरीदने वाले पूरी कर देते हैं। परिणाम यह है कि दिन में शायद ही कोई समय हो जब यहां से वाहन आसानी से निकल जाए यहां पर यातायात पुलिस का पिकेट भी है लेकिन जाम से निजात दिलाने की किसी को फिक्र नहीं रहती।
रेलवे स्टेशन रोड
ट्रेन पर सवार होना है तो समय से काफी पहले घर से निकलिए
रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पर सवार होना है तो आप को सचेत रहना होगा और समय से काफी पहले घर से निकल लेना होगा। क्योंकि रेलवे स्टेशन रोड पर लगने वाले जाम की वजह से स्टेशन आसानी से पहुंच पाना संभव नहीं है। स्टेशन के सामने ही कई जगह डिवाइडर पर कट हैं, जिससे रोड पार करने के फेर में गाड़ी वाले जाम लगा देते हैं।
इसके अलावा चौराहे पर एक लेन का आधा हिस्सा ऑटो वालों और नेपाल जाने वाले वाहनों के कब्जे में रहता है। ऐसे में आपको जाम में फंसना ही होगा। यहां ऑटो को व्यवस्थित तरीके से खड़ा करवाकर जाम से निजात दिलाया जा सकता है। पुलिस कई बार कोशिश भी करती है, लेकिन लगातार सख्ती और निगरानी न होने से स्थिति सुधर नहीं पाती।
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि जाम के वजहों की समीक्षा की जा रही है। प्रमुख चौराहे अतिक्रमण मुक्त होंगे, इसके लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। इसे और प्रभावी बनाया जाएगा। ताकि आम लोगों को दिक्कत न होने पाए।