युवाओं ने फसलों की सुरक्षा के लिए किया ये खास काम, ऐसे तैयार कर दिया खेती का 'कवच'
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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थानीय विकास खंड के ततायर बुजुर्ग निवासी दो युवा किसान खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए खेतों का सुरक्षा कवच तैयार कर रहे हैं। जंगली जानवरों, छुट्टा पशुओं और बंदरों से फसलों को पहुंचने पर निराश हो गए। फसलों की सुरक्षा करने के प्रयास के बाद भी उपज बुरी तरह प्रभावित होती थी। जिससे दोनों भाइयों सत्यप्रकाश और संजय ने खेती छोड़ने का मन बना लिया और दिल्ली चले गए।
दस वर्ष पूर्व उनके मन में ख्याल आया कि क्यों न तार से बुनी जाली लगाकर खेतों की सुरक्षा की जाय। दिल्ली से गांव के लिए रवाना हुए दोनों भाइयों ने अपने दस बीघा खेत को जाली से घेरकर नए सिरे से फिर खेती शुरू की। परिणाम बेहद उत्साहजनक रहा। अब किसी भी सीजन में कोई भी फसल लगा दें जानवरों से कोई नुकसान नहीं।
आस-पड़ोस के गांवों से भी बड़ी संख्या में किसान खेतों के इस कवच को देखने आने लगे और इसके बारे में पूछते भी थे। दो वर्ष पूर्व दोनों किसान भाइयों ने सोचा कि क्यों न इसकी बुनाई की मशीन लगा दें ताकि अन्य किसानों को इसका लाभ मिल सके।
प्रशिक्षण लेकर लगाई मशीन
सत्यप्रकाश बताते हैं कि दिल्ली से मशीन खरीद लाए लेकिन चलाने नहीं आता था। कंपनी ने एक हफ्ते तक प्रशिक्षक भेजकर प्रशिक्षित किया। अब ऑर्डर मिलने पर एक हफ्ते के भीतर सप्लाई हो जाती है।
महंगा होने से गरीब किसानों के लिए मुश्किल
संजय बताते हैं कि जाली के एक बंडल की लंबाई 50 फीट है। ऊंचाई जरूरत के अनुसार पांच फुट, साढ़े पांच और छह फुट की जाली तैयार की जाती है। एक बीघे खेत को इस जाली से घेरने का खर्च एक लाख रुपये तक आ सकता है।
जाली लगाकर खेती करने वाले किसानों की राय
क्षेत्र के सब्जी उत्पादक योगेंद्र कुशवाहा बताते हैं कि पहले छुट्टा पशुओं से फसल समेत खुद की सुरक्षा मुश्किल थी। लेकिन जाली से खेत की घेरेबंदी कर देने से बहुत सुकून है। किसान ओम प्रकाश सिंह, रविशंकर सिंह ने बताया कि बगीचे समेत खेत को जाली लगाकर घेरने में शुरुआती खर्च तो है लेकिन इसके मुनाफे बहुत हैं।