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यहां राजनैतिक उपेक्षा के कारण विलुप्त हो रही है हल्दी की खेती, बिहार और पश्चिम बंगाल तक बिखेरती थी सुगंध
Wed, 24 Jun 2020 03:20 PM IST
vivek shukla
सिद्धेश्वर कुमार तिवारी, देवरिया।
सिद्धेश्वर कुमार तिवारी, देवरिया।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 24 Jun 2020 03:20 PM IST
सार
- कुशवाहा बाहुल व राजनीति में भी कुशवाहा बाहुलता के चलते नहीं हो सका विकास
- चित्र परिचय- बंगरा बाजार में लगी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भागवत भगत की मूर्ति
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deoria news
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में करीब दो दशक पूर्व तक हल्दी व परवल की खेती के लिए प्रसिद्ध बंगरा बाजार का क्षेत्र राजनीति उपेक्षा का शिकार हो गया। परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में अब हल्दी व परवल की खेती विलुप्त होती जा रही है। राजनेताओं की वादाखिलाफी को लेकर लोगों में गुस्सा है।
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बता दें कि अस्सी-नब्बे की दशक में भाटपार रानी तहसील क्षेत्र का बंगरा बाजार क्षेत्र हल्दी की खेती के लिए जाना जाता था। इसके अलावा इस क्षेत्र में परवल की खेती भी होती थी। बंगरा, जासपार करौदा, करौदी, खामपार, भठवा तिवारी, ततायर खुर्द, नेटुआवीर बहोरवा, बखरी, जासपार, नोनार कपरदार, कड़सरवा बुजुर्ग, बहेरा टोला, पड़री, सुरवल, गुलहा, नवादा, ब्रह्मपाली आदि गांवो में भारी पैमाने पर हल्दी की खेती की जाती थी।
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यहां की हल्दी बिहार व पश्चिम बंगाल तक अपनी सुगंध बिखेरती थी। वहीं विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा बंगरा में हल्दी उद्योग लगाने का वादा भी समय-समय पर होता रहा। बंगरा बाजार में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. भागवत भगत की मूर्ति की स्थापना समारोह में आए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने हल्दी उद्योग लगाने की घोषणा किया था।
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वहीं कुछ वर्ष पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी यही वादा दुहराया था। इसके अलावा इस क्षेत्र से स्व. हरिकेवल प्रसाद, हरिवंश सहाय कई बार सांसद व विधायक रह चुके हैं। वहीं स्व. कैलाश कुशवाहा भी विधायक रह चुके हैं।
इस समय रविन्द्र कुशवाहा दुबारा सांसद हुए हैं। कुशवाहा बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद भी कुशवाहा बिरादरी की मुख्य खेती रही हल्दी के विकास के लिए कुछ खास नहीं हो पाया। इसे लेकर क्षेत्रीय लोगों में कसक है।