पिपराइच पथराव मामला: उत्पातियों को गांव में घूमता देख खौफजदा थे ग्रामीण, जेल जाने के बाद ली राहत की सांस
गांव के अर्जुन कहते हैं, 22 अप्रैल की शाम गांव में तीन आरोपी जो पकड़े गए थे, वह घूमते हुए नजर आए तो विश्वास ही नहीं हुआ कि पुलिस कार्रवाई करेगी। लगा कि यह सब बच गए और फिर से ऐसी घटना कर सकते हैं, लेकिन बाद में पुलिस सख्त हुई और आरोपी जेल गए।
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गोरखपुर जिले में पिपराइच के जंगल छत्रधारी गांव के मीरगंज में छेड़खानी और पथराव करने वालों के जेल जाने के बाद गांव वालों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीण बता रहे हैं, कि पहली बार गिरफ्तारी के बाद छूटे आरोपी आकर गांव में घूमने लगे तो डर लगने लगा कि कहीं फिर से विवाद न करें। लेकिन, अमर उजाला में खबर छपने के बाद पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजा है। पुलिस के अफसर भी गांव में आए। पुलिस इतनी सक्रिय हो गई है कि अब डर नहीं लग रहा है। पुलिस अफसरों को आरोपी पुलिस वालों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए। जो काम पुलिस ने बाद में किया है, वह पहले से दिन से किया होता तो ऐसी स्थिति नहीं आती।
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बुधवार दोपहर गांव में अमर उजाला की टीम फिर से पहुंची तो शांति का माहौल दिखा। सबको पुलिस पर भरोसा नजर आया तो मन में एक सवाल भी कि आखिर पुलिस पहले दिन से ही इतनी सक्रिय क्यों नहीं होती है। गांव के बृजेश कहते हैं, अगर पुलिस ने पहले दिन ही मामले को गंभीरता से लिया होता तो शायद 21 अप्रैल को कलश विसर्जन के दौरान छेड़खानी, मारपीट और पथराव जैसी घटना नहीं होती।
गांव के अर्जुन कहते हैं, 22 अप्रैल की शाम गांव में तीन आरोपी जो पकड़े गए थे, वह घूमते हुए नजर आए तो विश्वास ही नहीं हुआ कि पुलिस कार्रवाई करेगी। लगा कि यह सब बच गए और फिर से ऐसी घटना कर सकते हैं, लेकिन बाद में पुलिस सख्त हुई और आरोपी जेल गए। पुलिस के बेहतर काम किया है, लेकिन पहले दिन से ही करना चाहिए था।
डर लगने लगा था
निर्मला देवी ने कहा कि पुलिस तीन आरोपियों को पकड़कर ले गई थी। लेकिन, वह शाम को ही छूट गए। लग रहा था कि वह फिर मारपीट कर लेंगे। लोग डर गए थे।
ऐसा लग रहा था कि मार ही डालेंगे
मुन्नी देवी ने कहा कि हम लोग कलश लेकर जा रहे थे तो इस तरह से मारपीट की, जैसे मार ही डालेंगे। लेकिन, बाद में पुलिस ने कार्रवाई की तो अब कोई आरोपी नजर नहीं आ रहा है।
पुलिस को पहले ही करनी चाहिए थी कार्रवाई
संगीता ने कहा कि पुलिस ने अच्छा काम किया है, लेकिन पहले दिन ही कार्रवाई करनी चाहिए थी। कलश विसर्जन में पुलिस रहती तो घटना नहीं होती। आरोपी पुलिस वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
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गांव में अब तो शांति है
मुकेश चौहान ने कहा कि कलश विसर्जन के दौरान जिस तरह से घटना हुई, उससे तो यही लग रहा था कि अब एक-दूसरे को ही गांव में लोग मारेंगे, लेकिन अब शांति है।
ऐसी कार्रवाई हो कि फिर घटना न हो
अजय निषाद ने कहा कि अभी पुलिस कार्रवाई कर रही है तो शांति है, लेकिन पुलिस को ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे इस तरह की घटना दोबारा गांव में न होने पाए।
आए दिन करते थे मारपीट
सन्नी चौहान ने कहा कि जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा है, वह माफिया नाम से ग्रुप चलाकर आए दिन मारपीट किया करते थे। पुलिस को सभी को पकड़कर कर सख्ती कार्रवाई करनी चाहिए।
यह हुआ था
21 अप्रैल को यज्ञ के कलश विसर्जन के दौरान छेड़खानी का विरोध करने पर मारपीट हुई थी। हाथ में लाठी-डंडा लिए युवकों ने मारपीट करने के साथ ही ईंट से पथराव कर अफरा तफरी मचा दी थी। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया, लेकिन आरोपियों का शांतिभंग में चालान कर दिया, जिस वजह से वह जमानत पर रिहा हो गए। उधर, रविवार को गांव में अमर उजाला की टीम गई तो पता चला कि 17 अप्रैल को परिक्रमा के दौरान भी मुख्य आरोपी राकेश ने छींटाकशी की थी। इस दौरान ही टोकने पर विवाद हुआ था, जिसके बाद मारपीट की स्थिति हुई थी।
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मौजूद लोगों ने समझौता करा दिया था और मामला शांत हो गया था। पुलिस को सूचना दी गई थी, लेकिन पुलिस तहरीर के इंतजार में बैठी थी और कार्रवाई नहीं की। इसी का नतीजा रहा कि 21 अप्रैल को कलश विसर्जन के दौरान उत्पातियों ने पथराव और मारपीट की घटना कर दी। मामला सामने आने के बाद एएसपी मौके पर पहुंच गए और एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने मानीटरिंग शुरू कर दी। इसका असर रहा कि पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
माफिया गिरोह की तह तक जांच में जुटी पुलिस
माफिया गिरोह नाम से स्टेटस लगाकर कर सोशल मीडिया पर वायरल करने वालों की खबर का संज्ञान लेकर पुलिस ने गिरोह के तह तक जांच शुरू कर दी है। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी का कहना है कि तीन आरोपी जेल भेजे गए हैं। इलाके के सभी मनबढ़ों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।