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Gorakhpur News: बेटी के इलाज के लिए शुरू की सिलाई, अब 50 महिलाओं को दे रहीं रोजगार
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महिलाओं को प्रशिक्षण देती हुई मीनाक्षी: संवाद
- 50 महिलाओं को सिलाई से जोड़कर रोजगार मुहैया करा रहीं राजेंद्र नगर की मीनाक्षी
- 2017 में की थी शुरुआत, आज दूसरी महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। समस्या आने पर घबराने की बजाय उसका डटकर सामना करना चाहिए। इससे व्यक्ति मानसिक तौर पर मजबूत होकर आगे का रास्ता बनाता है। इसी सोच ने राजेंद्र नगर की मीनाक्षी राय को गृहिणी से उद्यमी बना दिया। बेटी के इलाज के लिए सिलाई का काम शुरू किया। आज इसी की बदौलत 50 महिलाओं को रोजगार मुहैया कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं।
मीनाक्षी की बेटी चार साल की थी, तब उसे सुनने में दिक्कत हो रही थी। उसके इलाज में काफी पैसे खर्च होते थे। मीनाक्षी को शुरू से सिलाई करने का शौक था। बेटी के इलाज का खर्च निकालने के लिए उन्होंने 2017 में सिलाई शुरू की। धीरे-धीरे बेटी के इलाज के बाद पैसे बचने लगे। इससे हौसला मिला तो सिलाई के काम को थोड़ा बढ़ाया और कुछ और महिलाओं को शामिल जोड़ा।
कोरोना के समय मास्क की मांग बढ़ी तो 20 महिलाओं की टीम ने मास्क बनाना शुरू कर दिया। इसमें अधिकतर वे महिलाएं शामिल रहीं जिनके पास कोई रोजगार नहीं था। उस समय 80 हजार मास्क की बिक्री हुई थी। कुछ समय बाद जब मास्क की मांग कम हुई तो जूट के थैले और बैग बनाने शुरू कर दिए। आज टीम में 50 महिलाएं काम कर रही हैं।
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मीनाक्षी ने बताया कि कुंभ में कपड़े के बैग और झोले के काफी ऑर्डर आए। उनका कहना है कि महिलाओं को हौसला मिलना चाहिए। उसके बाद वो हर समस्या का डटकर सामना कर सकती हैं।
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- 2017 में की थी शुरुआत, आज दूसरी महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। समस्या आने पर घबराने की बजाय उसका डटकर सामना करना चाहिए। इससे व्यक्ति मानसिक तौर पर मजबूत होकर आगे का रास्ता बनाता है। इसी सोच ने राजेंद्र नगर की मीनाक्षी राय को गृहिणी से उद्यमी बना दिया। बेटी के इलाज के लिए सिलाई का काम शुरू किया। आज इसी की बदौलत 50 महिलाओं को रोजगार मुहैया कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं।
मीनाक्षी की बेटी चार साल की थी, तब उसे सुनने में दिक्कत हो रही थी। उसके इलाज में काफी पैसे खर्च होते थे। मीनाक्षी को शुरू से सिलाई करने का शौक था। बेटी के इलाज का खर्च निकालने के लिए उन्होंने 2017 में सिलाई शुरू की। धीरे-धीरे बेटी के इलाज के बाद पैसे बचने लगे। इससे हौसला मिला तो सिलाई के काम को थोड़ा बढ़ाया और कुछ और महिलाओं को शामिल जोड़ा।
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कोरोना के समय मास्क की मांग बढ़ी तो 20 महिलाओं की टीम ने मास्क बनाना शुरू कर दिया। इसमें अधिकतर वे महिलाएं शामिल रहीं जिनके पास कोई रोजगार नहीं था। उस समय 80 हजार मास्क की बिक्री हुई थी। कुछ समय बाद जब मास्क की मांग कम हुई तो जूट के थैले और बैग बनाने शुरू कर दिए। आज टीम में 50 महिलाएं काम कर रही हैं।
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मीनाक्षी ने बताया कि कुंभ में कपड़े के बैग और झोले के काफी ऑर्डर आए। उनका कहना है कि महिलाओं को हौसला मिलना चाहिए। उसके बाद वो हर समस्या का डटकर सामना कर सकती हैं।