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पढ़िए इन युवाओं के संघर्ष की कहानी, अपनी जिद व जोश से हासिल किया मुकाम, अब रोशन कर रहे शहर का नाम

Mon, 04 Jan 2021 12:41 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 04 Jan 2021 12:41 PM IST
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special success Story of youth struggle by hard work in film industry
रुपहले पर्दे पर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रहे हैं युवा - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखरपुर शहर के युवा रुपहले पर्दे पर भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रहे हैं। ऐसे कई युवा हैं जो अभावों और संघर्षों के बीच अपनी जिद व जोश से मंजिल हासिल कर चुके हैं। फिल्म हो या टीवी सीरियल, हर जगह अपनी अलग छाप छोड़ी है। पढ़िए राजन राय की खास रिपोर्ट...
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भोजपुरी फिल्म 'यार बदल न जाना' में निर्देशक बने दीपक
रुस्तमपुर निवासी दीपक चौहान ने हाल ही में भोजपुरी फिल्म, 'यार बदल न जाना' की शूटिंग पूरी कराई है। वे इस फिल्म के निर्देशक हैं। हालांकि दीपक एक दशक से मुंबई में जमे हुए हैं और कई फिल्मों और सीरियल में निर्देशन की बारीकियां सीख चुके हैं। दीपक ने बताया कि 'कहानी किस्मत की', 'वायरल बैटरी', 'काजल' फिल्म में सहायक निर्देशक, 'सावधान इंडिया', 'गुम है किसी के प्यार में', क्राइम वेब सीरिज 'स्टॉप क्राइम' के साथ ही एक हिंदी, एक पंजाबी व 12 भोजपुरी फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में काम कर चुके हैं। दीपक ने राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज से इंटर और गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। वे लंबे समय तक रंगमंडल से जुड़े रहे। इसके बाद शिमला में एक साल तक थिएटर की बारीकियां सीखीं।
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प्रकाश झा के साथ विशाल श्रीवास्तव व फिल्म शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन से टेकअप लेते धर्मेंद्र भारती। - फोटो : अमर उजाला।
निर्देशक राम गोपाल वर्मा के सहयोगी हैं खजनी के धर्मेंद्र
खजनी के रामपुरवा गांव में एक साधारण से परिवार के धर्मेंद्र भारती वर्तमान में मशहूर फिल्म निर्देशक रामगोपाल वर्मा (रामू) के असिस्टेंट हैं। धर्मेंद्र ने 'सरकार-3', 'आफिसर', 'रंगीला-2', तेलगू फिल्म 'लक्ष्मी एंटियार', वेब सीरिज 'डी कंपनी' में बतौर सहायक निर्देशक काम कर रहे हैं। वेब सीरिज 'अफसोस' में अभिनय भी किया है। धर्मेंद्र ने 12वीं की पढ़ाई गणेश इंटर कॉलेज, कठघर में और स्नातक गोरखपुर विश्वविद्यालय से किया है। इसके बाद 2012 में भारतेंदु नाट्य अकादमी से नाटक और अभिनय की बारीकियां सीखीं।
 
विशाल ने तय किया शिक्षक से कला निर्देशक का सफर
शाहपुर आवास विकास कालोनी में रहने वाले विशाल श्रीवास्तव पेशे से शिक्षक थे। लेकिन उनका मन रूपहले पर्दे पर ज्यादा रमा करता था। उन्होंने पहला सीरियल 'ऑफिस-ऑफिस' में बतौर कला निर्देशक काम किया। लेकिन 'स्लमडॉग मिलिनियर' से ज्यादा प्रशंसा मिली। इसमें उन्होंने सेट तैयार किया था। 'शिकवा', 'सीआईडी' में काम करने के बाद 'फना', 'फैमिली', 'नक्शा', 'हल्लाबोल', 'अजब प्रेम की गजब कहानी' में सहायक कला निर्देशक और 'स्लमडॉग मिलिनियर' में कंट्रक्शन इंचार्ज के रूप में काम किया। अभी वे बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मुजीबरर्रहमान पर बन रही बायोपिक में निर्देशक श्याम बेनेगल के साथ काम कर रहे हैं। विशाल बताते हैं कि वे वर्ष 2020 में मुंबई घूमने गए थे। वहां अभिनेता, निर्देशक पंकज कपूर से मुलाकात हुई उन्होंने काम देखा तो ऑफर दिया। यही करियर की शुरुआत थी। विशाल ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से फाइन आर्ट में परास्नातक की पढ़ाई की है।
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