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सुई-धागा से संवारी उधड़ी किस्मत, 150 महिलाओं की तकदीर भी बदली

Sat, 26 Sep 2020 08:58 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 26 Sep 2020 08:58 AM IST
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Special story of Sushila indrawati and Manju who gave women employment in Gorakhpur Uttar Pradesh
150 से अधिक महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है पाली ब्लॉक का प्रगति प्रेरणा स्वयं सहायता समूह - फोटो : अमर उजाला

गोरखपुर जिले के पाली ब्लॉक के कुसम्हा खुर्द गांव की सुशीला, इंद्रावती और मंजू अपने हौसले और दृढ़ इच्छा शक्ति से न केवल खुद आत्मनिर्भर हुईं बल्कि पांच साल के भीतर 150 से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ कर उन्हें भी सशक्त बनाया है।

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घर का खर्च और बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारियों से जब पति के अकेले कंधे दबने लगे तो सुशीला ने इंद्रावती और मंजू के साथ मिलकर वर्ष 2015 में प्रगति प्रेरणा स्वयं सहायता समूह का गठन कर लिया। पहला काम उन्हें स्कूली बच्चों की ड्रेस सिलने को मिला। सूई-धागे से तकदीर बुनने निकलीं समूह की महिलाएं फिर पीछे नहीं पलटीं। अब ये महिलाएं दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
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समूह की अध्यक्ष सुशीला, सचिव इंद्रावती और कोषाध्यक्ष मंजू तो अब दूसरे जिलों में जाकर राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत कैसे समूह का गठन कर आत्मनिर्भर बना जा सकता है, इसका प्रशिक्षण भी दे रही हैं। सुशीला पिछले दो महीने से बलिया जिले की महिलाओं को प्रशिक्षित कर रही हैं।
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कोषाध्यक्ष मंजू का कहना है कि उनके समूह ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों की ड्रेस सिलने से काम की शुरुआत की थी। 25 स्कूलों के बच्चों की ड्रेस सिलकर उनके समूह ने 32 से 35 हजार रुपये कमाए थे। इससे कुछ और सिलाई और कटिंग मशीनें खरीदी गईं ताकि उत्पादन और बढ़ाया जा सके।
 

अगरबत्ती की सुगंध ने जिंदगी में भर दीं खुशियां

समूह की महिलाओं ने अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने समूह व अन्य समूह की महिलाओं के साथ अगरबत्ती बनाने का भी काम किया। ग्राम संगठन से आजीविका फंड का उपयोग कर अगरबत्ती बनाने की मशीन लगाई और कारोबार बढ़ाया। प्रगति प्रेरणा के नाम से अगरबत्ती की मार्केटिंग की।

इससे समूह की सदस्यों को महीने की सात से आठ हजार रुपये तक की आमदनी हुई। समूह की महिलाओं ने गोभी और मिर्च की भी खेती की। इससे अच्छा मुनाफा हुआ। अगरबत्ती और सब्जी उत्पादन के काम में 10 समूहों की करीब 120 महिलाओं की टीम बनाकर उन्हें भी रोजगार से जोड़ा गया। कुछ महिलाओं ने परचून की दुकान तो कुछ ने कपड़े व सब्जी की दुकान खोल ली है। सब आत्मनिर्भर बनी हैं।

फिर स्कूली ड्रेस सिल रहीं महिलाएं
संगठन की कोषाध्यक्ष मंजू देवी ने बताया कि वर्तमान में 23 विद्यालयों के बच्चों की ड्रेस सिलने का काम मिला है। एक ड्रेस सिलने के 110 रुपये मिल रहे हैं। आधा काम पूरा हो चुका है, समय से आपूर्ति हो जाएगी। दो दिनों से बारिश की वजह से काम बंद है। सदस्य सिलाई सेंटर तक नहीं आ पा रहीं हैं। सेंटर में भी पानी भर गया है। बृहस्पतिवार को भी समूह की सदस्य, सेंटर से पानी निकालती हुई नजर आईं।

पांच साल में पांच से 85 सदस्य हो गए
प्रगति प्रेरणा स्वयं सहायता समूह का पांच साल पहले जब गठन हुआ तो उसमें सिर्फ पांच सदस्य थे। वर्तमान में इस महिला समूह की संख्या 85 हो गई है जिनमें 35 महिलाएं सिलाई का काम कर रही हैं। सचिव मंजू का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से ड्रेस की सिलाई का और भी काम मिलने की उम्मीद है।

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