सरकारें बदली जीवन नहीं, इंदिरा गांधी की 'बेटी' खपरैल के मकान में बिता रही जीवन
- दुखियारी छह साल की बेटी सोनकेशिया को इंदिरा गांधी ने आकर लिया था गोद
- आज भी यह परिवार खपरैल के मकान में कर रहा है जीवन यापन
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उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में चार दशक पहले कप्तानगंज थाना क्षेत्र के गांव नरायनपुर में सड़क हादसे में मरी एक महिला की मौत के बाद इतना बड़ा बवाल हुआ कि प्रदेश में तत्कालीन जनता पार्टी की सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था। पीड़ित परिवार का हाल जानने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इस गांव में पहुंचीं।
अगले चुनाव में कांग्रेस की यूपी में सरकार बनी लेकिन सत्ता मिलने के बाद किसी ने न तो दोबारा नरायनपुर का रुख किया और न ही इस पीड़ित परिवार की खोज-खबर ली। यहां तक कि अनाथ हुई जिस बच्ची सोनकेशिया को इंदिरा जी ने गोद में उठाकर अपनी बेटी कहा, वह भी इसी खपरैल के मकान में जीवन बिता रही है।
हाटा-कप्तानगंज मार्ग पर स्थित नरायनपुर गांव के रहने वाले वंशी प्रजापति व उनकी पत्नी कलूता की मौत हो गई थी। उनकी बेटी सोनकेशिया व बेटा जयप्रकाश का पालन-पोषण बुजुर्ग दादी बसरकलिया कर रहीं थीं। 11 जनवरी 1980 को बसरकलिया गांव के सामने हाटा-कप्तानगंज मार्ग को पार करते वक्त एक बस की चपेट में आ गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। गांव के लोगों ने घटना के दूसरे दिन मुआवजे की मांग को लेकर सड़क जाम कर दिया था।
कप्तानगंज के तत्कालीन एसओ लक्ष्मी नारायण चतुर्वेदी मौके पर पहुंचे और लाठी चार्ज कर भीड़ को हटाना शुरू कर दिए। गांव के लोग भी उग्र हो गए। बवाल की सूचना पर बड़ी संख्या में पुलिस व पीएसी मौके पर भेजी गई।
बदहाली में जीवन बिता रही हैं सोनकेशिया
ग्रामीण बताते हैं कि घटना के तीसरे दिन 14 जनवरी की रात में पुलिस व पीएसी ने गांव में घुसकर बर्बरता की थी। अगले दिन मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में छा गया। प्रदेश सरकार के मंत्री रहे मोहन सिंह ने भी इस घटना को लेकर विधानसभा में अपनी सरकार को खरी-खोटी सुनाई। केंद्र सरकार ने प्रदेश की बनारसी दास की सरकार को बर्खास्त कर दिया।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी स्वयं नरायनपुर गांव में पीड़ितों का हाल और स्थिति का जायजा लेने पहुंची। पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति पर उन्होंने गहरा दुख तो जताया ही, सड़क हादसे में मृत बुजुर्ग की छह साल की पोती सोनकेशिया को गोद में उठाकर पुचकारा और उसके जीवन निर्वाह का इंतजाम खुद करने की घोषणा की।
घटना के कुछ दिन तक तो सोनकेशिया पर सभी का प्यार उमड़ता रहा लेकिन बाद में वह लोगों के सहारे छोड़ दी गई। कुछ दिन बाद उसकी देखभाल फूफा करने लगे। इसी बीच सोनकेशिया के भाई जयप्रकाश की पोखरे में डूबने से मौत हो गई। फूफा ने भी पालन-पोषण से हाथ खींच लिया तो सोनकेशिया को बकरी पालकर और लोगों की दया पर जीवन यापन करना पड़ा।
सोनकेशिया की शादी गांव के लोगों ने रामाशीष से करा दी। सोनकेशिया की आर्थिक स्थिति अब भी पहले जैसी ही है। आज यह महिला अपने परिवार के साथ खपरैल के मकान रहती है।
ग्राम प्रधान भोला प्रसाद ने बताया कि उसे इंदिरा आवास, शौचालय व राशन कार्ड की सुविधा दी गई है। इसके अलावा ग्राम पंचायत ने उसके दरवाजे तक इंटरलॉकिंग करा दी है। एक बच्ची की शादी हो गई है। तीन बच्चों के साथ महिला खेती करके जीवन यापन करती है।
गांव के लोग बताते हैं कि इस घटना के बाद गांव में एक माह के अंदर संजय गांधी ने भी तीन बार दौरा किया था। लेकिन राजनैतिक हित पूरा होने के बाद आज तक किसी ने इस परिवार की सुध नहीं ली।