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भगवान राम के जन्म से जुड़ा है यह नाला, जानिए क्या है इसकी कहानी

Fri, 18 Sep 2020 03:58 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 18 Sep 2020 03:58 PM IST
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special story of Makhauda Dham Yagna for Shree Ram janam organized by Raja Dasaratha of Ayodhya
मखौड़ा धाम। - फोटो : अमर उजाला।
त्रेता युग में अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ के द्वारा मख धाम मखौड़ा में श्रृंगी ऋषि की अगुवाई में पुत्रकामेष्टि यज्ञ संपन्न कराई गई थी। जिसमें आहूति के लिए घृत नाले से घी अयोध्या से सीधे मखौड़ा धाम यज्ञ स्थल पहुंचा था। मान्यता है कि वही नाला आंशिक रूप में आज भी जगह-जगह विद्यमान है। जिसके जीर्णोद्धार की कवायद अब प्रशासन शुरू कर चुका है। लोगों का कहना है कि आज भी क्षेत्र में व मंदिर परिसर में नाले का अवशेष विराजमान है जिसे प्राचीन समय में सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था।
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यहां है स्थित घृत नाला
अयोध्या से मखौड़ा धाम तक हवन के लिए घी लाने के लिए बनाए गए घृत नाले का अवशेष वर्तमान में जिले की सीमा घघौवा पुल से होकर रिधौरा ग्राम पंचायत होते हुए गोंडा बस्ती की सीमा से सटा हुआ हैदराबाद , सिकंदरपुर, चौरी, नंदनगर, करिगहना होते हुए जमौलिया के रास्ते मखौड़ा धाम तक मौजूद है।
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पुत्र प्राप्ति के लिए महाराज दशरथ ने कराया था यज्ञ

परशुरामपुर क्षेत्र में पवित्र सतत वाहिनी मनोरथ को सिद्ध करने वाली मनोरमा नदी के तट पर स्थित मखौड़ा धाम में अयोध्या के महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्त की कामना से सिद्ध योगी श्रृंगी ऋषि के सानिध्य में पुत्रकामेष्टि यज्ञ का आयोजन किया था। जिसके परिणाम स्वरूप यज्ञ देवता ने प्रकट होकर उन्हें पायस प्रदान कर तीनों रानियों को देने की बात कही थी। जिसके बाद महाराजा दशरथ के यहां भगवान श्री राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न जैसे प्रतापी पुत्रों का अवतरण हुआ था।

आज भी यह मान्यता है कि जो लोग इस पावन तट पर स्थित क्षेत्र में हवन यज्ञ आदि संस्कार कराते हैं तो उनके मनोरथ सफल हो जाते हैं। जिसके चलते आज भी लोग आए दिन पवित्र मास में मंदिर में भंडारे आदि का आयोजन कराते रहते हैं। इसी क्रम में लोक कल्याण हेतु साधू संतों द्वारा बीते वर्ष कार्तिक पूर्णिमा से सतत बारह वर्षों तक चलने वाला अखंड राम नाम का जप प्रारंभ हुआ। जो कि सतत चल रहा है।
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