मजार नहीं सदियों का रिश्ता संवार रहे हैं गोरखपुर के ये हिंदू, यहीं से करते हैं शुभ काम की शुरुआत
मंदिर मस्जिद के नाम पर लड़ने वालों के लिए गोरखपुर जिले के बेतियाहाता, लोनिया टोला में सैयद बाबा का मजार एक नजीर है। बाबा के करीब 200 साल पुराने मजार का जीर्णोद्धार करा कर यहां रहने वाले हिंदू युवकों ने सदियों पुराने भाईचारे के रिश्ते को संवार है।
हिंदू-मुस्लिम एकता की इससे बेहतर मिसाल क्या होगी कि इस इलाके के हिंदू घरों से दिवाली का पहला दीया इसी मजार पर जलाने की परंपरा है। यही नहीं शादी में परछावन की रस्म भी मजार पर ही की जाती है।
यहां आस-पास के रहने वालों का कहना है कि मजार की देखरेख वर्षों से होती आ रही है। यहां मुस्लिम ही नहीं हिंदू भी अपने शुभ काम की शुरुआत मजार पर कपूर और बत्ती जलाकर करते हैं। इस मोहल्ले के रहने वाले शेरू और बलराम कहते हैं कि सैयद बाबा तो सबके हैं। जो भी मन्नत मांगता है पूरी होती है।
वर्ष 1992 में अयोध्या की घटना के बाद जब पूरे देश में दोनों समुदायों के कुछ सिरफिरे लोगों ने अपनी हरकतों से नफरत फैलाने की कोशिश की तब भी यहां के लोगों का आपसी भाईचारा नहीं बिगड़ा। दोनों समुदाय के लोग उस दौरान भी मजार पर अगरबत्ती जलाते और फूल चढ़ाते रहे।