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गंभीरपुर रामलीला: 13 दिन राम के नाम कर देते हैं ग्रामीण, 44 वर्ष से जारी है यह खास प्रथा

Mon, 16 Oct 2023 12:53 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 16 Oct 2023 12:53 PM IST
सार

गंभीरपुर में रामलीला 13 दिन तक चलती है। गांव अयोध्या की तरह सज जाती है। खासियत यह कि गांव के हर वर्ग और जाति के लोग मिलकर लीला में अभिनय करते हैं। समर्पण ऐसा मानव लीला नहीं ईश्वर की साधना कर रहे हो। रामलीला में अभिनय करने की रुचि के चलते कोई अपने दफ्तर, विद्यालय, व्यवसाय आदि से छुट्टी लेता है तो कोई काम जल्द खत्म कर मंच पर समय से पहुंच जाता है।

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Special Story of Gambhirpur Ramlila in Gorakhpur
गंभीर में रामलीला का मंचन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कौड़ीराम विकास खंड के गंभीरपुर गांव में सन् 1980 से ही शारदीय नवरात्र में रामलीला का मंचन हो रहा है। गांव के पूर्वज स्व. संत शंभू शरण सिंह, स्व. बाबूराम भारती और नवनाथ भट्ट ने इसकी शुरुआत की थी। उन्होंने अभिनय से रामकथा का प्रसार करने का प्रण लिया। मंशा थी कि निरक्षर भी श्रीराम की लीलाओं को समझे और मर्यादा पुरुषोत्तम के गुणों को अपनाए, जिससे पीढ़ी दर पीढ़ी नैतिकता व संस्कार का संरक्षण हो सके। इस वर्ष 17 अक्तूबर से रामलीला का मंचन शुरू होगा।

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गंभीरपुर में रामलीला 13 दिन तक चलती है। गांव अयोध्या की तरह सज जाती है। खासियत यह कि गांव के हर वर्ग और जाति के लोग मिलकर लीला में अभिनय करते हैं। समर्पण ऐसा मानव लीला नहीं ईश्वर की साधना कर रहे हो।
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रामलीला में अभिनय करने की रुचि के चलते कोई अपने दफ्तर, विद्यालय, व्यवसाय आदि से छुट्टी लेता है तो कोई काम जल्द खत्म कर मंच पर समय से पहुंच जाता है। एक डेढ़ महीने पहले ही पात्रों के चयन और लीला का अभ्यास भी शुरू हो जाता है। जयंत गिरी और काली शंकर पाठक दृश्यों के बीच में भजन से समां बांधते हैं।
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पहले लालटेन की रोशनी में अभिनय करते थे कलाकार

रामलीला समिति के सबसे पुराने सदस्य 75 वर्ष के डॉ.महंत सिंह बताते हैं कि संत जी ने अपने जीवन में हजारों बार राम चरित्र मानस पूरा पढ़ा था। उनके आह्वान पर सन् 1980 में नवरात्र के प्रथम दिन गांव के हर सदस्य अपने घर से मिट्टी, पुष्प, दूध, जल आदि लेकर पूजा की और रामलीला को अनवरत कराने का संकल्प लिया। तब बिजली के अभाव में लालटेन की रोशनी में कलाकार अभिनय करते थे।

संचालक विकास सिंह श्रीनेत ने कहा कि रामलीला से हमें प्रभु राम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा मिलती है। वहीं दूसरी ओर समाज में लोगों में एकता की भावना रहती है।

 


 
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