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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Special Story of Corona Warrier Sunita Patel Nodal Officer of Health Department in Gorakhpur

कोरोना वारियर: डॉक्टरों ने दी आराम की सलाह, लेकिन मरीजों की मदद में जुटीं सुनीता

Tue, 04 May 2021 04:44 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 04 May 2021 04:44 PM IST
सार

सुनीता अपनी तकलीफ भूल कर प्रतिदिन दस से बारह घंटे कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन, बेड, वेंटिलेटर, दवा, टेलीमेडिसिन कराने की व्यवस्था में जुटी रहती हैं।

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Special Story of Corona Warrier Sunita Patel Nodal Officer of Health Department in Gorakhpur
स्वास्थ्य विभाग की नोडल अधिकारी सुनीता पटेल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले में इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (आईसीसीसी) की स्वास्थ्य विभाग की नोडल अधिकारी सुनीता पटेल को गंभीर बीमारी के कारण डॉक्टरों ने बेड रेस्ट की सलाह दी है। बावजूद इसके, अपनी तकलीफ भूल कर वह प्रतिदिन दस से बारह घंटे कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन, बेड, वेंटिलेटर, दवा, टेलीमेडिसिन कराने की व्यवस्था में जुटी रहती हैं।

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उप जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी सुनीता पटेल को आईसीसीसी का नोडल अधिकारी बनाया गया है। बताती हैं कि मोबाइल नंबर सार्वजनिक होने से दिन-रात किसी भी समय फोन कर लोग मदद मांगते हैं। अधिकतर फोन ऐसे गंभीर मरीजों के परिजनों के आते हैं, जिन्हें तत्काल बेड, ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है।
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इन सबकी मदद के लिए वह 15-16 घंटे तक लगातार काम करती हैं। वह दिन-रात सभी कोविड अस्पतालों के प्रबंधन से संपर्क कर उनके यहां खाली बेड, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की स्थिति की जानकारी अपडेट रखती हैं। जिससे जरूरतमंद मरीज और उनके तीमारदार को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा तलाशने के लिए भटकना न पड़े।
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बीते दो दिनों में उनके पास डेढ़ सौ से अधिक कॉल आईं। इनमें से लगभग 70 कॉल मरीज को भर्ती कराने, रेमडिसिविर इंजेक्शन की व्यवस्था कराने, ऑक्सीजन आपूर्ति या वेंटिलेटर की मांग करने वालों के आए। वह फोन पर लोगों को वैक्सीनेशन की जानकारी, चिकित्सकों का परामर्श देने के साथ होम आइसोलेट मरीजों से संपर्क कर उनके स्वास्थ्य का फॉलोअप भी लेती हैं। बताती हैं कि कोविड अस्पतालों से लगातार संपर्क में रहने का फायदा यह हुआ कि उन्होंने कई गंभीर मरीजों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजनयुक्त बेड उपलब्ध कराया।

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