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हाथ में गुब्बारा लिए भीख मांगने वाले मासूमों की कैद है 'जिंदगी', जानिए किस मजबूरी में करते हैं ये काम

Sat, 30 Jan 2021 03:49 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 30 Jan 2021 03:49 PM IST
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Special story of beggar children in UP Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
सड़कों पर हाथों में गुब्बारे लिए बच्चे हों या फिर भीख मांगते, उनके बचपन की डोर संगठित गिरोहों के हाथों में है। गोपनीय सूचना आने के बाद राज्य बाल आयोग ने भी इसे माना और इस पर पुलिस की मदद से कार्रवाई का आदेश दिया गया। प्रशासन और पुलिस के सहयोग से अभियान चला तो हकीकत भी सामने आने लगी है। गोरखपुर जोन में 15 दिन के अभियान में 136 बच्चों को मुक्त कराया गया है। हालांकि पुलिस अभी उस गिरोह तक नहीं पहुंच सकी है, जो इसे नियंत्रित कर रहे हैं।
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बच्चों को उनके अभिभावक या फिर बाल कल्याण, नारी निकेतन को सुपुर्द कर दिया गया है। जांच पड़ताल जारी है और अफसरों का दावा है कि इसके पीछे जो भी होंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गोरखपुर के एडीजी की ओर से चलाए गए अभियान की जानकारी जनवरी में डीजीपी को भेजी गई है।
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जानकारी के मुताबिक भीख मांगना अवैधानिक है। वहीं अगर बच्चे के हाथ में कोई बेचने वाला सामान है, तो यह गैरकानूनी नहीं रह जाता है। इसी कानून का गिरोहबंद लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। इस कानून का गलत फायदा उठाकर बच्चों के हाथों में गुब्बारे पकड़ाए जाते हैं और वह बेचने की आड़ में भीख मंगवाने लगते हैं। उनकी बेबसी पर हर किसी को तरस भी आ जाता है और कोई गुब्बारा खरीद कर ज्यादा रुपये दे देता है या फिर कुछ लोग ऐसे ही रुपये थमा देते हैं, लेकिन इससे उनका बचपन खराब हो रहा है। इस पर शायद ही कोई ध्यान देता है।
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अभिभावक नहीं मिले तो आखिर कहां से आए बच्चे

ऐसा नहीं है कि सड़कों पर घूम रहे सभी बच्चे गिरोह के लिए ही काम करते हैं, लेकिन अधिकतर ऐसे ही हैं। क्योंकि इस कानून की जानकारी बहुत से लोगों को नहीं है और इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से गैर कानूनी काम करने में किया जा रहा है।
 
अभियान के दौरान कई बच्चे ऐसे मिले हैं जिनके अभिभावक के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। फिलहाल बालिकाओं को नारी निकेतन में तो बच्चों को बाल कल्याण को सुपुर्द कर रहने की व्यवस्था कराई गई है, लेकिन यहीं से पुलिस को शक है कि इन बच्चों का इस्तेमाल ही गिरोह बंद लोग भीख मंगवाने में कर रहे हैं। ये बच्चे कहां से आए और कहां के रहने वाले हैं इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
 
आयोग ने जताई थी आशंका फिर डीजीपी ने दिया था आदेश
राज्य बाल आयोग ने यह आशंका जताई थी कि बच्चों को गिरोहबंद लोग संचालित कर रहे हैं और उनसे भीख मंगाने का काम कर रहे हैं। पूरे प्रदेश में इसके होने की आशंका जताई गई है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी यह पकड़ा गया था जिसके बाद डीजीपी के आदेश पर अभियान चलाया गया था। अभियान का असर भी सामने आ रहा है।
 
एडीजी जोन दावा शेरपा ने बताया कि भीख मंगवाने वालों की जांच के लिए अभियान चलाया गया। 15 दिनों में 136 बच्चों को जोन में मुक्त कराया गया है। इसकी रिपोर्ट डीजीपी कार्यालय को भेजी गई है। कोई संगठित गिरोह अभी पकड़ में नहीं आया है। इसकी जांच जारी है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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