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Gorakhpur News: सपा ने एक बार काजल पर लगाया दांव, खेला महिला और पिछड़ा कार्ड

Wed, 31 Jan 2024 10:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 31 Jan 2024 10:10 AM IST
सार

गोरखपुर ग्रामीण, कैंपियरगंज, पिपराइच और चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र में निषाद वोट बैंक ज्यादा है और इनकी भूमिका निर्णायक होती है। हालांकि, अभी तक के चुनावी नतीजों पर गौर करें तो सदर लोकसभा चुनाव क्षेत्र लगातार भाजपा के कब्जे में ही रही है। इस बार सपा ने काजल पर दांव लगाकर यादव-मुस्लिम और निषाद वोट बैंक पर निशाना साधा है।

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SP once bet on Kajal, played woman and backward card
सपा नेत्री काजल निषाद - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

समाजवादी पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी ने सदर लोकसभा सीट से एक बार फिर काजल निषाद पर दांव लगाया है। इसके पहले सपा ने काजल को विधायक और मेयर का चुनाव लड़ाया था। पार्टी ने इस बार भी महिला और पिछड़ा कार्ड खेला है।

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भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री काजल निषाद ने पहली बार विधानसभा चुनाव 2012 में कांग्रेस के टिकट पर गोरखपुर ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र से किस्मत आजमाया था। लेकिन, वह हार गईं। इसके बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने काजल निषाद को कैपियरगंज विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा।
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पार्टी को निषाद वोट बैंक पर भरोसा था लेकिन, भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह ने हरा दिया। इसके बाद वर्ष 2023 में हुए निकाय चुनावों में भी सपा ने उन्हें गोरखपुर महापौर के पद के लिए टिकट देकर भरोसा जताया। हालांकि इस चुनाव में काजल निषाद बिरादरी में सेंधमारी करने में कुछ हद तक सफल हुईं। लेकिन, भाजपा प्रत्याशी डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने उन्हें पराजित होना पड़ा।
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दरअसल, वर्ष 2018 के लोकसभा चुनाव में सपा ने भाजपा के गढ़ में प्रवीण निषाद को प्रत्याशी बनाया था। भाजपा से चुनाव में उपेंद्र दत्त शुक्ला को उतारा था। लेकिन, प्रवीण निषाद ने भाजपा प्रत्याशी को शिकस्त देकर सभी को चौंका दिया था। लेकिन, इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। इसी के बाद से पार्टी की निगाह निषाद बिरादरी पर है।

गोरखपुर ग्रामीण, कैंपियरगंज, पिपराइच और चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र में निषाद वोट बैंक ज्यादा है और इनकी भूमिका निर्णायक होती है। हालांकि, अभी तक के चुनावी नतीजों पर गौर करें तो सदर लोकसभा चुनाव क्षेत्र लगातार भाजपा के कब्जे में ही रही है। इस बार सपा ने काजल पर दांव लगाकर यादव-मुस्लिम और निषाद वोट बैंक पर निशाना साधा है। अब यह समीकरण कितना कारगर होता है, यह तस्वीर चुनाव परिणाम आने के बाद ही साफ होगी, लेकिन महिला और पिछड़ा कार्ड खेलकर सपा ने हलचल बढ़ा दी है।
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