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UP Election 2022: पूर्व सीएम व दो मंत्रियों की विरासत बचाने में बेटों की अग्निपरीक्षा, रोचक हुआ मुकाबला

Mon, 14 Feb 2022 04:22 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 14 Feb 2022 04:22 PM IST
सार

चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र पूर्व कैबिनेट मंत्री पंडित बाहुबली हरिशंकर तिवारी की कर्मस्थली है। पिछले चुनाव में उनके छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी ने विरासत संभाली और बसपा से विधायक चुने गए। इस बार विनय सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा से पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी चुनाव मैदान में हैं।

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Sons litmus test to save legacy of former CM and two ministers in UP Election 2022
बाएं से विनय शंकर तिवारी, यशपाल रावत, फतेहबहादुर सिंह। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले की चार विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पिता की राजनीतिक विरासत को बचाने के लिए बेटों की अग्निपरीक्षा है। ये सभी सीटें अपने समय के दिग्गज नेताओं की है। यहां चुनाव बेहद रोमांचक है।

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पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के बेटे, पूर्व मंत्री एवं विधायक फतेह बहादुर सिंह भाजपा के टिकट पर कैंपियरगंज विधानसभा सीट से मैदान में हैं। वीर बहादुर सिंह, महराजगंज के पनियरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते थे। परिसीमन के बाद पनियरा विधानसभा और मानीराम विधानसभा क्षेत्र का कुछ-कुछ हिस्सा काटकर कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया।
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विधायक फतेह बहादुर सिंह ने इस सीट पर पिता की विरासत संभाली। फतेह बहादुर सिंह छह बार विधायक रह चुके हैं। कैंपियरगंज से इस बार उनके सामने सपा से अभिनेत्री काजल निषाद, बसपा से चंद्र प्रकाश निषाद व कांग्रेस से सुरेंद्र निषाद चुनाव मैदान में हैं।
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चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र पूर्व कैबिनेट मंत्री पंडित बाहुबली हरिशंकर तिवारी की कर्मस्थली है। पिछले चुनाव में उनके छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी ने विरासत संभाली और बसपा से विधायक चुने गए। इस बार विनय सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा से पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी चुनाव मैदान में हैं। राजेश त्रिपाठी भी दो बार विधायक रह चुके हैं। बसपा ने पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह पहलवान को टिकट दिया है। कांग्रेस की सोनिया शुक्ला चुनाव लड़ रही हैं।

 

सहजनवां विधानसभा क्षेत्र से शारदा प्रसाद रावत तीन बार विधायक रहे। उनके निधन के बाद पत्नी प्रभा रावत विधायक चुनी गईं। फिर बेटे यशपाल रावत ने पिता की विरासत संभाली और विधायक बने। इस बार यशपाल रावत सपा से चुनावी मैदान में हैं। जबकि, उनके सामने भाजपा ने विधायक शीतल पांडेय का टिकट काटकर क्षेत्रीय महामंत्री प्रदीप शुक्ला को प्रत्याशी बनाया है। बसपा से सुधीर सिंह और कांग्रेस से मनोज यादव इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

अपने समय में निषादों के बड़े नेता बनकर उभरे जमुना निषाद पिपराइच विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और बसपा सरकार में मंत्री भी बने। सड़क हादसे में जमुना निषाद का निधन हो गया और उपचुनाव में उनकी पत्नी राजमती देवी विधायक चुनी गईं। वर्ष 2017 में जमुना की विरासत को संभालने के लिए उनके बेटे अमरेंद्र निषाद चुनाव लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बार फिर अमरेंद्र चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने विधायक महेंद्र पाल सिंह को फिर भाजपा ने टिकट दिया है। वहीं, बसपा से दीपक अग्रवाल और कांग्रेस से पूनम चौहान चुनाव लड़ रही हैं।

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