{"_id":"6ac171fa9762c78b7e090ec9","slug":"son-wins-bronze-at-the-asiad-mother-says-the-fruits-of-the-jiutiya-fast-have-been-reaped-gorakhpur-news-c-7-1-gkp1052-1473766-2026-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: बेटे ने जीता एशियाड में कांसा, मां बोलीं- जिउतिया व्रत के फल मिल गईल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: बेटे ने जीता एशियाड में कांसा, मां बोलीं- जिउतिया व्रत के फल मिल गईल
विज्ञापन
गोरखपुर। जिउतिया व्रत के फल मिल गईल....। बेटे की उपलब्धि पर मां परमशीला की यही पहली प्रतिक्रिया थी। आगे वे कहती हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का नाम और ऊंचा हो और देश के बच्चे यूं ही आगे बढ़ें। गर्व और उत्साह से भरे थे उनके एक-एक शब्द।
फोन पर बातचीत में परमशीला ने बताया कि वे लोग मूल रूप से गोपालगंज के कटया बाजार के रहने वाले हैं। वर्ष 1992-93 में नीरज के पिता अक्षय लाल चौहान मेरठ आए और यहां कला प्रकाश स्टेडियम में रसोइये का काम किए। उनके तीनों बेटों का जन्म मेरठ में हुआ। बड़ा बेटा सुनील चौहान बॉक्सर भी है और यूपी पुलिस में वर्ष 2022 में उसकी भर्ती हुई है।
मां ने बताया कि नीरज चौहान सबसे छोटा है और आईटीबीपी में उसका चयन हो चुका है। नीरज के पिता को 1105 रुपये तनख्वाह मिलती थी। लॉकडाउन में घर चलाने के लिए तीनों बेटों और पिता ने मिलकर सब्जी का ठेला भी लगाया। हमारी मेहनत का फल मिल गया आज बेटे ने देश का नाम रोशन कर दिया। नीरज की भाभी मंजू कहती हैं कि नीरज बचपन से ही तीरंदाजी के प्रति समर्पित रहे हैं। अभ्यास के दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया लेकिन लक्ष्य से कभी भटके नहीं। प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्होंने घंटों अभ्यास किया। अब एशियाड में कांस्य पदक जीतने के बाद उनकी मेहनत को बड़ी पहचान मिली है।
विज्ञापन
विज्ञापन
फोन पर बातचीत में परमशीला ने बताया कि वे लोग मूल रूप से गोपालगंज के कटया बाजार के रहने वाले हैं। वर्ष 1992-93 में नीरज के पिता अक्षय लाल चौहान मेरठ आए और यहां कला प्रकाश स्टेडियम में रसोइये का काम किए। उनके तीनों बेटों का जन्म मेरठ में हुआ। बड़ा बेटा सुनील चौहान बॉक्सर भी है और यूपी पुलिस में वर्ष 2022 में उसकी भर्ती हुई है।
विज्ञापन
मां ने बताया कि नीरज चौहान सबसे छोटा है और आईटीबीपी में उसका चयन हो चुका है। नीरज के पिता को 1105 रुपये तनख्वाह मिलती थी। लॉकडाउन में घर चलाने के लिए तीनों बेटों और पिता ने मिलकर सब्जी का ठेला भी लगाया। हमारी मेहनत का फल मिल गया आज बेटे ने देश का नाम रोशन कर दिया। नीरज की भाभी मंजू कहती हैं कि नीरज बचपन से ही तीरंदाजी के प्रति समर्पित रहे हैं। अभ्यास के दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया लेकिन लक्ष्य से कभी भटके नहीं। प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्होंने घंटों अभ्यास किया। अब एशियाड में कांस्य पदक जीतने के बाद उनकी मेहनत को बड़ी पहचान मिली है।
विज्ञापन