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गोरखपुर: जिस सचिव ने शुरू करवाई थी पेंशन, उसी ने लगाई अपात्रता की रिपोर्ट

Tue, 21 Sep 2021 02:40 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 21 Sep 2021 02:40 PM IST
सार

हरपुर बुदहट गांव निवासी बुजुर्ग शरद चंद को प्रोफेसर बताने वाली आख्या निकली गलत। समाज कल्याण विभाग बुजुर्ग की पेंशन करेगा बहाल, गलत रिपोर्ट लगाने की भी होगी जांच।

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Social Welfare Department will restore pension of Sharad Shukla in Gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में बुजुर्ग शरद शुक्ला की पेंशन जिस ग्राम सचिव सुषमा चौबे की आख्या पर निरस्त की गई, तीन वर्ष पहले उन्हीं की संस्तुति पर उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिलनी शुरू हुई थी। समाज कल्याण विभाग की जांच में स्पष्ट हुआ है कि बुजुर्ग को प्रोफेसर बताने वाली रिपोर्ट गलत है। पूरी जांच के बाद विभाग जल्द ही बुजुर्ग की पेंशन बहाली करेगा।  
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सहजनवां के हरपुर बुदहट गांव निवासी 77 वर्षीय बुजुर्ग शरद शुक्ला कक्षा नौ पास हैं। चार वर्ष पहले उन्होंने वृद्धावस्था पेंशन के लिए ब्लॉक में आवेदन किया था। पत्नी आशा शुक्ला के अनुसार उस समय ग्राम पंचायत सचिव सुषमा चौबे ने आवेदन पर पात्र होने की संस्तुति की थी। करीब तीन वर्ष तक शरद चंद को पेंशन मिलती रही। अचानक पेंशन आनी बंद हुई तो समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया।
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उन्हें बताया गया कि हाल ही में सत्यापन में शरद शुक्ला को पंचायत सचिव सुषमा चौबे ने पूर्व प्रोफेसर बताते हुए पेंशन बंद करने की सिफारिश कर दी। इसी आधार पर पेंशन को निरस्त कर दिया गया गया है। हताश आशा देवी कहती हैं कि प्रधानी चुनाव की राजनीति का खामियाजा उनके पति सहित गांव के अन्य लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पात्र होने के बावजूद अपात्र होने की रिपोर्ट लगाकर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित किया जा रहा है। इस सिलसिले में ग्राम पंचायत सचिव सुषमा चौबे का पक्ष नहीं मिल सका है। पक्ष मिलने पर प्रकाशित किया जाएगा।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह ने बताया कि रिपोर्ट में बुजुर्ग शरद शुक्ला को पूर्व प्रोफेसर बताया गया था, जो प्रथम दृष्टया जांच में गलत मिला है। अन्य बिंदुओं पर जांच के बाद बुजुुर्ग की पेंशन बहाल कराई जाएगी।
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