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Gorakhpur News: अस्पतालों के बैक्टीरिया से त्वचा संक्रमण... एंटीबायोटिक भी बेअसर
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त्वचा संक्रमण के 62 प्रतिशत मरीजों में मिले अस्पतालों में पाए जाने वाले एस्केप समूह के छह बैक्टीरिया
गोरखपुर एम्स में 1311 मरीजों पर किया गया अध्ययन
गोरखपुर। अस्पतालों में मिलने वाले बैक्टीरिया त्वचा को खराब कर रहे हैं। एक अध्ययन में सामने आया है कि अस्पतालों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया त्वचा संक्रमण के मामलों को गंभीर बना रहे हैं। गोरखपुर एम्स में किए गए अध्ययन से पता चला कि त्वचा संक्रमण से पीड़ित करीब 61 प्रतिशत मरीजों में एस्केप समूह के बैक्टीरिया पाए गए, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही थीं। ऐसे मरीजों का इलाज एडवांस एंटीबायोटिक की मदद से किया गया।
यह अध्ययन संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के तरफ से किया गया है। इसे इसी माह इंडियन जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में त्वचा और सॉफ्ट टिश्यू संक्रमण से पीड़ित मरीजों में अस्पतालों में पाए जाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया की उपस्थिति का विश्लेषण किया गया।
अध्ययन में शामिल माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अरुप मोहंती ने बताया कि ओपीडी में आए 20 से 80 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2300 मरीजों के नमूने लिए गए थे। इनमें से 1311 मरीजों के नमूनों की कल्चर जांच पॉजिटिव आई, जिन्हें अध्ययन में शामिल किया गया। जांच के दौरान इन 1311 मरीजों में से 808 मरीजों में एस्केप समूह के बैक्टीरिया पाए गए।
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अध्ययन में पाया गया कि सबसे अधिक स्टैफिलोकोकस ऑरियस बैक्टीरिया के मामले सामने आए, जो करीब 59.5 प्रतिशत मरीजों में मिला। इसके अलावा स्यूडोमोनस एरुगिनोसा 17.8 प्रतिशत, क्लेबसिएला निमोनिया 11.3 प्रतिशत, एसिनेटोबैक्टर बाउमानी आठ प्रतिशत, एंटरोबैक्टर 2.4 प्रतिशत और एंटरोबैक्टर के अन्य प्रकार लगभग 0.80 प्रतिशत मरीजों में पाए गए। एस्केप समूह के बैक्टीरिया अस्पतालों में संक्रमण फैलाने वाले प्रमुख जीवाणुओं में शामिल हैं। इनसे संक्रमित मरीजों में त्वचा और सॉफ्ट टिश्यू को गंभीर नुकसान हो सकता है। कई मामलों में सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी नहीं होतीं, जिससे इलाज और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
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गोरखपुर एम्स में 1311 मरीजों पर किया गया अध्ययन
गोरखपुर। अस्पतालों में मिलने वाले बैक्टीरिया त्वचा को खराब कर रहे हैं। एक अध्ययन में सामने आया है कि अस्पतालों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया त्वचा संक्रमण के मामलों को गंभीर बना रहे हैं। गोरखपुर एम्स में किए गए अध्ययन से पता चला कि त्वचा संक्रमण से पीड़ित करीब 61 प्रतिशत मरीजों में एस्केप समूह के बैक्टीरिया पाए गए, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही थीं। ऐसे मरीजों का इलाज एडवांस एंटीबायोटिक की मदद से किया गया।
यह अध्ययन संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के तरफ से किया गया है। इसे इसी माह इंडियन जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में त्वचा और सॉफ्ट टिश्यू संक्रमण से पीड़ित मरीजों में अस्पतालों में पाए जाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया की उपस्थिति का विश्लेषण किया गया।
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अध्ययन में शामिल माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अरुप मोहंती ने बताया कि ओपीडी में आए 20 से 80 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2300 मरीजों के नमूने लिए गए थे। इनमें से 1311 मरीजों के नमूनों की कल्चर जांच पॉजिटिव आई, जिन्हें अध्ययन में शामिल किया गया। जांच के दौरान इन 1311 मरीजों में से 808 मरीजों में एस्केप समूह के बैक्टीरिया पाए गए।
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अध्ययन में पाया गया कि सबसे अधिक स्टैफिलोकोकस ऑरियस बैक्टीरिया के मामले सामने आए, जो करीब 59.5 प्रतिशत मरीजों में मिला। इसके अलावा स्यूडोमोनस एरुगिनोसा 17.8 प्रतिशत, क्लेबसिएला निमोनिया 11.3 प्रतिशत, एसिनेटोबैक्टर बाउमानी आठ प्रतिशत, एंटरोबैक्टर 2.4 प्रतिशत और एंटरोबैक्टर के अन्य प्रकार लगभग 0.80 प्रतिशत मरीजों में पाए गए। एस्केप समूह के बैक्टीरिया अस्पतालों में संक्रमण फैलाने वाले प्रमुख जीवाणुओं में शामिल हैं। इनसे संक्रमित मरीजों में त्वचा और सॉफ्ट टिश्यू को गंभीर नुकसान हो सकता है। कई मामलों में सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी नहीं होतीं, जिससे इलाज और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।