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गोरखपुर: 10 में छह महिलाएं थायराइड का शिकार, बढ़ती जा रही मरीजों की संख्या
Mon, 31 Oct 2022 11:54 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 31 Oct 2022 11:54 AM IST
सार
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि महिलाओं में थाइराइड की समस्या आम होती जा रही है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यह समस्या ज्यादा हो रही है। इस बीमारी की चपेट में युवतियां भी आ रही हैं।
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महिलाओं में थाइराइड की समस्या।
- फोटो : Amar ujala graphics
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विस्तार
महिलाओं में थायराइड की समस्या बढ़ती जा रही है। हर 10 में छह महिलाएं और युवतियां थायराइड से ग्रसित मिल रही हैं। गर्भवती होने पर महिला और बच्चे दोनों की जान का खतरा उत्पन्न हो रहा है। डॉक्टरों की भाषा में इस बीमारी को इम्यून डिजीज भी कहते हैं, जो अनुवांशिक होती है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि महिलाओं में थाइराइड की समस्या आम होती जा रही है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यह समस्या ज्यादा हो रही है। इस बीमारी की चपेट में युवतियां भी आ रही हैं। ओपीडी में हर 10 में से छह से सात मरीज थायराइड की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।
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बताया कि प्रेग्नेंसी के पहले तीन माह तक इसका खतरा ज्यादा रहता है। गंभीर थायराइड यानी हाइपोथायराइड होने से गर्भपात की संभावना 90 फीसदी बढ़ जाती है। यहां तक कि भ्रूण की गर्भ में ही मौत हो सकती है। बताया कि पिछले दो से तीन सालों के अंदर गर्भवती और युवतियों में थाइराइड के मामले तेजी से बढ़े हैं। मौजूदा समय में 60 से 70 फीसदी महिलाएं और युवतियां इसकी शिकार हैं।
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बच्चों के शारीरिक विकास पर पड़ता है असर
डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि थायराइड से पीड़ित गर्भवती के बच्चे के विकास पर भी यह बीमारी असर डालती है। इससे बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास मंद पड़ जाता है। कभी-कभार बच्चा असामान्य रूप में भी पैदा हो होता है। थायराइड पीड़ित गर्भवती के बच्चों का विकास सामान्य बच्चों की तरह नहीं होता, बल्कि धीमी गति से होता है। इसलिए गर्भवतियों को हर दो से तीन माह के अंदर थायराइड की जांच कराते रहनी चाहिए।
गर्भवतियों के लिए थायराइड ज्यादा खतरनाक
डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि थायराइड को लोग सामान्य बीमारी की तरह लेते हैं। लेकिन, यह बीमारी गर्भवतियों के लिए ज्यादा खतरनाक है। प्रसव के बाद महिलाओं में यह बीमारी होने की आशंका 50 से 60 फीसदी होती है। यह गले का रोग है, जो हार्मोन असंतुलन के कारण होता है। गले के बगल में एक ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रित करती है। इसकी वजह से शरीर की सभी कोशिकाएं सही ढंग से काम करती हैं। लेकिन, इस बीमारी में यह ग्रंथि अनियंत्रित हो जाती है, जो शरीर में असंतुलन पैदा करती है। इसकी वजह से शरीर में तमाम तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
थायराइड के लक्षण
व्यवहार में चिड़चिड़ापन और उदासी, सर्दी में भी पसीना निकलना, जरूरत से ज्यादा थकान और अनिद्रा, तेजी से वजन बढ़ना या कम होना और महिलाओं में माहवारी में अनियमितता इसके लक्षण हैं।
गर्भवतियों के लिए थायराइड ज्यादा खतरनाक
डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि थायराइड को लोग सामान्य बीमारी की तरह लेते हैं। लेकिन, यह बीमारी गर्भवतियों के लिए ज्यादा खतरनाक है। प्रसव के बाद महिलाओं में यह बीमारी होने की आशंका 50 से 60 फीसदी होती है। यह गले का रोग है, जो हार्मोन असंतुलन के कारण होता है। गले के बगल में एक ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रित करती है। इसकी वजह से शरीर की सभी कोशिकाएं सही ढंग से काम करती हैं। लेकिन, इस बीमारी में यह ग्रंथि अनियंत्रित हो जाती है, जो शरीर में असंतुलन पैदा करती है। इसकी वजह से शरीर में तमाम तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
थायराइड के लक्षण
व्यवहार में चिड़चिड़ापन और उदासी, सर्दी में भी पसीना निकलना, जरूरत से ज्यादा थकान और अनिद्रा, तेजी से वजन बढ़ना या कम होना और महिलाओं में माहवारी में अनियमितता इसके लक्षण हैं।