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ट्रकों से वसूली मामला: एसआईटी की जांच तेज, आरोपितों से खुलवा लिए 12 मोबाइल फोन के लॉक
Fri, 28 Feb 2020 11:27 AM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 28 Feb 2020 11:27 AM IST
सार
- लॉक तोड़ने पर डाटा डिलीट होने का खतरा बताते हुए एफएसएल ने कर दिया थ वापस
- कोर्ट से अनुमति लेकर जेल में पहुंची थी एसआईटी, एसएसपी ने भी प्रगति की जानकारी ली
- एआरटीओ प्रवर्तन ने एसएसपी से मुलाकात की, बातचीत कर लौटे
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ओवरलोड ट्रकों को पास कराने के नाम पर वसूली करने वालों की जांच एसआईटी ने तेज कर दी है। गोरखपुर के एक आरोपित की तलाश में पुलिस की दो अलग-अलग टीमों ने कई जगहों पर दबिश दी है। उधर, एफएसएल ने आरोपित व गैंग के सरगना धर्मपाल समेत छह के 12 मोबाइल फोन के लॉक भी आरोपितों से खुलवा लिए हैं। इन फोन में मौजूद ऑडियो और अन्य डाटा की जांच के लिए शुक्रवार को एफएसएल भेज दिया गया। पहले एफएसएल ने लॉक तोड़ने पर डाटा के डिलीट होने का खतरा बता कर लौटा दिया था।
जानकारी के मुताबिक, मुख्य आरोपित धर्मपाल व उसके साथियों ने पूछताछ में बताया था कि मोबाइल में कई अफसरों से बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद है। इसी आधार पर मोबाइल को एसआईटी ने एफएसएल भेजा था। मगर, लॉक तोड़ने पर डाटा उड़ने का संदेह जाहिर करते हुए पुलिस को मोबाइल लौटा दिया गया था। एसआईटी ने कोर्ट से अनुमति मांगी थी।
कोर्ट से अनुमति मिलते ही बृहस्पतिवार की शाम एसआईटी प्रभारी सीओ सुमित शुक्ला जेल गए और आरोपित धर्मपाल से मोबाइल का लॉक खुलवाया। खबर है कि पुलिस जिस आरोपित की तलाश में है, उसकी रिकॉर्डिंग मोबाइल में मिली है। पुलिस ने उस आधार पर जांच तेज कर दी है। एक बार रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ न होने की पुष्टि के बाद जांच और तेज कर दी जाएगी।
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जानकारी के मुताबिक, मुख्य आरोपित धर्मपाल व उसके साथियों ने पूछताछ में बताया था कि मोबाइल में कई अफसरों से बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद है। इसी आधार पर मोबाइल को एसआईटी ने एफएसएल भेजा था। मगर, लॉक तोड़ने पर डाटा उड़ने का संदेह जाहिर करते हुए पुलिस को मोबाइल लौटा दिया गया था। एसआईटी ने कोर्ट से अनुमति मांगी थी।
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कोर्ट से अनुमति मिलते ही बृहस्पतिवार की शाम एसआईटी प्रभारी सीओ सुमित शुक्ला जेल गए और आरोपित धर्मपाल से मोबाइल का लॉक खुलवाया। खबर है कि पुलिस जिस आरोपित की तलाश में है, उसकी रिकॉर्डिंग मोबाइल में मिली है। पुलिस ने उस आधार पर जांच तेज कर दी है। एक बार रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ न होने की पुष्टि के बाद जांच और तेज कर दी जाएगी।
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कोड के बारे में आरोपितों से जानकारी ली
पुलिस ने बरामद रजिस्टर में लिखे गए कोड के बारे में जानकारी जुटाई है। रजिस्टर में कई जगह गोपा लिखा गया था, आरोपित ने बताया कि इसका मतलब है कि गोरखपुर से पास। यानी रुपये जमा हो चुके हैं। इसी तरह चेक दिया गया लिखा था, आरोपित ने बताया कि इसका मतलब है कि ट्रांसपोर्टर को चेक दिया गया है। रजिस्टर के ऊपर दर्ज नाम के बारे में आरोपितों ने बताया है कि ये नाम ट्रांसपोर्टरों के हैं, जो इस धंधे में मददगार थे।
तीन लोग दुरुस्त करते थे लेखा जोखा
एसआईटी से पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि ज्यादातर रजिस्टर धर्मपाल के हैं। रजिस्टर पर लिखने का काम जयभारत, दीपू और रामवचन करते थे। रामवचन को पुलिस ने जेल भेजा है, अन्य दो की तलाश जारी है। पुलिस तीनों की हैंड राइटिंग का मिलान कराएगी।
तीन लोग दुरुस्त करते थे लेखा जोखा
एसआईटी से पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि ज्यादातर रजिस्टर धर्मपाल के हैं। रजिस्टर पर लिखने का काम जयभारत, दीपू और रामवचन करते थे। रामवचन को पुलिस ने जेल भेजा है, अन्य दो की तलाश जारी है। पुलिस तीनों की हैंड राइटिंग का मिलान कराएगी।
यह है मामला
एसटीएफ ने 25 जनवरी 2020 को बेलीपार के मधुबन होटल के मालिक और सरगना धर्मपाल सिंह समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर वसूली का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में बेलीपार थाने में दर्ज की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है, जिसके प्रभारी सीओ कैंट सुमित शुक्ला है।
कोर्ट से अनुमति लेकर टीम जेल गई थी। मोबाइल फोन के लॉक को खुलवा लिए गए हैं। फिर एक बार मोबाइल फोन को जांच के लिए एफएसएल भेजा गया है।
सुमित शुक्ला, प्रभारी एसआईटी
कोर्ट से अनुमति लेकर टीम जेल गई थी। मोबाइल फोन के लॉक को खुलवा लिए गए हैं। फिर एक बार मोबाइल फोन को जांच के लिए एफएसएल भेजा गया है।
सुमित शुक्ला, प्रभारी एसआईटी