कोरोना का असर: निजी अस्पतालों की ओपीडी में सन्नाटा, डॉक्टरों ने बताई ये खास वजह
- कोरोना कर्फ्यू के बीच नॉन कोविड अस्पतालों की ओपीडी में नहीं आ रहे सामान्य मरीज
- जिले में 750 के आसपास निजी अस्पताल और नर्सिंग होम
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कोरोना कर्फ्यू के बीच नॉन कोविड अस्पतालों की ओपीडी में सामान्य मरीज नहीं आ रहे हैं। करीब 85 फीसदी निजी अस्पतालों में पिछले डेढ़ माह से सन्नाटा है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि डॉक्टर और स्टाफ को वेतन देने में दिक्कतें आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले में करीब 750 से अधिक निजी अस्पताल और नर्सिंग होम हैं। कोविड से पहले इन अस्पतालों और नर्सिंग होमों में करीब 10 हजार से अधिक की ओपीडी होती थी। छोटे-बड़े मिलाकर 300 से अधिक ऑपरेशन होते थे।
नेपाल से पांच प्रतिशत और बिहार सहित आसपास के जिलों से करीब 30 प्रतिशत मरीज आते थे। अब यह मरीज नहीं आ रहे हैं। केवल गंभीर मरीज निजी अस्पताल से लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं।
शाही ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. शिव शंकर शाही ने बताया कि मरीजों की संख्या कम हो गई है। अब इमरजेंसी में ही मरीज आ रहे हैं। वह भी काफी नाजुक स्थिति में। सामान्य ओपीडी और रुटीन में आने वाले मरीज कम हो गए हैं।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि कोविड ने नई सीख दी है। अब शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो बिना हाथ धोए खाना खाता होगा। जबकि पहले ऐसा नहीं था। यही वजह है कि उल्टी, दस्त सहित अन्य संक्रामक बीमारियों के मरीज नाम मात्र के आ रहे हैं।
नाम मात्र के मरीज हो रहे भर्ती
गोरखपुर जिला अस्पताल की बात करें तो इक्का-दुक्का मरीज ही पेट संबंधी बीमारी के आ रहे हैं। जबकि पहले हर दिन पांच से सात मरीज पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचते थे। अब ऐसे मरीजों की संख्या न के बराबर है।
कम हो गई मरीजों की संख्या
आईएमए के सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि कोविड के डर से मरीजों की संख्या कम हो गई है। इस वक्त इमरजेंसी में ही मरीज आ रहे हैं। लोग अब पहले की अपेक्षा जागरूक हो गए हैं। मर्ज होते ही अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। जबकि पहले ऐसा नहीं था। खुद ही दवा खा लेते थे। ठीक न होने पर डॉक्टर के पास आते थे।
15 प्रतिशत मरीज पहुंच रहे नर्सिंग होम
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. खालिद अब्बासी ने बताया कि इस वक्त नर्सिंग होम में करीब 15 प्रतिशत मरीज आ रहे हैं। पहले नेपाल से लेकर बिहार सहित देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर सहित अन्य जिलों से मरीज आते थे। अब यह मरीज अपने ही जिलों में ही डॉक्टरों से परामर्श ले रहे हैं।
ऑनलाइन विकल्प भी मिला
कोविड महामारी और कोरोना कर्फ्यू के बीच मरीजों को ऑनलाइन विकल्प मिला। कई निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने ऑनलाइन ओपीडी शुरू की। हालांकि इसके लिए उन्होंने कुछ फीस भी तय कर रखी थी। ऐसे में ऑनलाइन वीडियो कॉलिंग के जरिए भी मरीजों का इलाज किया है।