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Gorakhpur News: अपनी ऊर्जा, प्रतिभा को सही दिशा में लगाएं युवा
Mon, 13 Oct 2025 11:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 13 Oct 2025 11:16 PM IST
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित स्थापना दिवस कार्यक्रम में बने प्रदर्शनी काे देखती मुख
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ उत्सव विश्वविद्यालय की अकादमिक, सांस्कृतिक और सृजनात्मक चेतना का प्रतीक है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और टीम भावना को प्रोत्साहित करते हैं। यह बातें सोमवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में सिद्धार्थोत्सव के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने कही।
उन्होंने कहा कि आज का युवा देश का भविष्य है। विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभा को निखारने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के छात्र न केवल राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर रहे हैं बल्कि सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय सहभागिता से विश्वविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। कुलपति ने छात्रों से आवाह्न किया कि वे विनम्रता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन में आगे बढ़ें, क्योंकि विनम्र व्यक्तित्व के साथ ही व्यक्ति वास्तविक ऊंचाइयां प्राप्त कर सकता है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. एस चूड़ामणि गोपाल ने कहा कि युवा अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार क्षमता को सही दिशा में लगाएं, तो वे न केवल अपने जीवन में ऊंचाइयां प्राप्त कर सकते हैं बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना सकते हैं। कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर परिश्रम, आत्म-नियंत्रण और एकाग्रता ही सफलता की कुंजी है।
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उन्होंने छात्रों को जीवन में सकारात्मक सोच रखने, लक्ष्य निर्धारण करने और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है बल्कि चरित्र निर्माण और मानवीय मूल्यों का विकास करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने और विज्ञान, चिकित्सा, प्रौद्योगिकी तथा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। कहा कि भारत तभी विकसित राष्ट्र बन सकेगा जब उसके युवा न केवल बुद्धिमान होंगे, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक भी बनेंगे।
उद्घाटन सत्र में अतिथियों के लिए स्वागत प्रो. नीता यादव और धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव दीनानाथ यादव ने किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सुशील कुमार, प्रो. सौरभ, प्रो. प्रकृति, कुलानुशासक प्रो. दीपक, प्रो. हरीश शर्मा, प्रो. सत्येंद्र दुबे उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि आज का युवा देश का भविष्य है। विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभा को निखारने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के छात्र न केवल राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर रहे हैं बल्कि सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय सहभागिता से विश्वविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। कुलपति ने छात्रों से आवाह्न किया कि वे विनम्रता और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन में आगे बढ़ें, क्योंकि विनम्र व्यक्तित्व के साथ ही व्यक्ति वास्तविक ऊंचाइयां प्राप्त कर सकता है।
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कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. एस चूड़ामणि गोपाल ने कहा कि युवा अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार क्षमता को सही दिशा में लगाएं, तो वे न केवल अपने जीवन में ऊंचाइयां प्राप्त कर सकते हैं बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना सकते हैं। कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर परिश्रम, आत्म-नियंत्रण और एकाग्रता ही सफलता की कुंजी है।
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उन्होंने छात्रों को जीवन में सकारात्मक सोच रखने, लक्ष्य निर्धारण करने और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है बल्कि चरित्र निर्माण और मानवीय मूल्यों का विकास करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखने और विज्ञान, चिकित्सा, प्रौद्योगिकी तथा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। कहा कि भारत तभी विकसित राष्ट्र बन सकेगा जब उसके युवा न केवल बुद्धिमान होंगे, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक भी बनेंगे।
उद्घाटन सत्र में अतिथियों के लिए स्वागत प्रो. नीता यादव और धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव दीनानाथ यादव ने किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सुशील कुमार, प्रो. सौरभ, प्रो. प्रकृति, कुलानुशासक प्रो. दीपक, प्रो. हरीश शर्मा, प्रो. सत्येंद्र दुबे उपस्थित रहे।