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Gorakhpur News: निजी अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से प्रसव के दौरान नवजात का पैर टूटा
Sun, 12 Oct 2025 11:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 12 Oct 2025 11:52 PM IST
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खेसरहा में प्रसव के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से नवजात का टूटा पैर। संवाद
खेसरहा। जनपद मुख्यालय के एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान एक नवजात का पैर टूट गया। खेसरहा थाना क्षेत्र के पर्रोई गांव निवासी गोरख का आरोप है कि डॉक्टर से इसकी शिकायत करने पर वह भड़क गया और देख लेने की धमकी दी। पीड़ित ने दूसरे निजी अस्पताल में जांच कराई तो पैर टूटा हुआ था, जिसका प्लास्टर करवाना पड़ा। उसने जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
गोरख के अनुसार 20 सितंबर 2025 को वह पत्नी सुमित्रा को डिलीवरी के लिए जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल में लेकर गया था। चेकअप के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन से प्रसव की सलाह दी, जिसके बाद सुमित्रा को भर्ती कर लिया गया। ऑपरेशन के माध्यम से उसी रात करीब एक बजकर दस मिनट पर बेटे का जन्म हुआ। आरोप है कि कुछ देर बाद जब अस्पताल स्टाफ ने नवजात शिशु को परिजनों को सौंपा। गोरख ने बच्चे के दाहिने पैर में अजीब तरह का टेढ़ापन देखकर टूट जाने का संदेह हुआ। जब उन्होंने इस संबंध में ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर से शिकायत की तो डॉक्टरों ने आरोपों को नजरअंदाज करते हुए परिजनों को डांट-फटकार कर अस्पताल से बाहर निकल जाने को कह दिया। पीड़ित परिवार 26 सितंबर को घर चले गए। गोरख का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें धमकी भी दिया कि यदि उन्होंने इसकी जानकारी किसी को दी तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। पीड़ित के अनुसार न तो अस्पताल ने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र दिया गया और न ही पैर की चोट का इलाज किया गया बल्कि अस्पताल स्टाफ ने उन्हें जबरन भगा दिया। परिजनों ने घर पहुंचने के दो दिन बाद नवजात शिशु के टूटे हुए पैर का इलाज कराने जिला मुख्यालय पर ही एक निजी हाॅस्पिटल पर ले गए, वहां डाॅक्टरों ने जांच के बाद बच्चे के पैर में प्लास्टर कर दिया। पीड़िता सुमित्रा और पति गोरख ने चार अक्तूबर 2025 को बांसी तहसील
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गोरख के अनुसार 20 सितंबर 2025 को वह पत्नी सुमित्रा को डिलीवरी के लिए जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल में लेकर गया था। चेकअप के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन से प्रसव की सलाह दी, जिसके बाद सुमित्रा को भर्ती कर लिया गया। ऑपरेशन के माध्यम से उसी रात करीब एक बजकर दस मिनट पर बेटे का जन्म हुआ। आरोप है कि कुछ देर बाद जब अस्पताल स्टाफ ने नवजात शिशु को परिजनों को सौंपा। गोरख ने बच्चे के दाहिने पैर में अजीब तरह का टेढ़ापन देखकर टूट जाने का संदेह हुआ। जब उन्होंने इस संबंध में ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर से शिकायत की तो डॉक्टरों ने आरोपों को नजरअंदाज करते हुए परिजनों को डांट-फटकार कर अस्पताल से बाहर निकल जाने को कह दिया। पीड़ित परिवार 26 सितंबर को घर चले गए। गोरख का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें धमकी भी दिया कि यदि उन्होंने इसकी जानकारी किसी को दी तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। पीड़ित के अनुसार न तो अस्पताल ने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र दिया गया और न ही पैर की चोट का इलाज किया गया बल्कि अस्पताल स्टाफ ने उन्हें जबरन भगा दिया। परिजनों ने घर पहुंचने के दो दिन बाद नवजात शिशु के टूटे हुए पैर का इलाज कराने जिला मुख्यालय पर ही एक निजी हाॅस्पिटल पर ले गए, वहां डाॅक्टरों ने जांच के बाद बच्चे के पैर में प्लास्टर कर दिया। पीड़िता सुमित्रा और पति गोरख ने चार अक्तूबर 2025 को बांसी तहसील
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