हिंदू धर्म की इस किताब को उर्दू भाषा में किया जा रहा है पसंद, बिक चुकी हैं हजारों किताबें
- उर्दू भाषा में लिखी श्रीमद्भागवत गीता के भी खूब हैं कद्रदान
- आठ हजार से भी ज्यादा उर्दू में लिखी श्रीमद्भागवत गीता की हो चुकी है बिक्री
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उर्दू भाषा में लिखी श्रीमद्भागवत गीता के भी काफी संख्या में कद्रदान हैं। गीताप्रेस अब तक आठ हजार से भी ज्यादा उर्दू भाषा में छपी श्रीमद्भागवत गीता की बिक्री कर चुका है। इसके साथ ही गीताप्रेस अब उर्दू जबान में हिंदी भाषियों को श्रीमद्भगवद्गीता मुहैया कराया है। इन पुस्तकों की प्रूफ रीडिंग का काम संस्था के हैदराबाद कार्यालय में किया गया है।
गीता प्रेस के ट्रस्टी ईश्वर प्रसाद पटवारी के निर्देशन में उर्दू बोली वाली हिंदी गीता के प्रकाशन की योजना बनी। गीता प्रेस गोरखपुर में उर्दू भाषा विशेषज्ञ न होने से इस पुस्तक की प्रूफ रीडिंग का काम हैदराबाद में किया गया।
गीता प्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि गीता प्रेस ने पिछले वर्षों में उर्दू लिपि में श्रीमद्भगवद्गीता का प्रकाशन किया था। इसकी आठ हजार प्रतियां छापी गई थीं। इसका उद्देश्य गीता का संदेश उर्दू भाषी लोगों के बीच प्रसारित करना था। इसी कड़ी में अब गीता प्रेस में हिंदी में लिखी उर्दू जुबान वाली श्रीमद्भगवद्गीता छापी गई है। वहीं देवनागरी में भी 6000 प्रतियां छप चुकी है