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Gorakhpur News: ठठरी की गठरी से कथा वाचक धीरेंद्र शास्त्री का मामखोर कनेक्शन, जानिए कैसे..
Thu, 18 Jan 2024 12:28 PM IST
रोहित शर्मा
श्रीकांत शाही, चिल्लूपार
श्रीकांत शाही, चिल्लूपार
Published by: रोहित शर्मा
Updated Thu, 18 Jan 2024 12:28 PM IST
सार
देश के मशहूर कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री का चिल्लूपार से गहरा नाता है। इनके पूर्वज चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के मामखोर गांव के निवासी थे। कुछ पीढ़ी पहले वे यहां से मध्य प्रदेश बागेश्वरधाम जाकर बस गए और फिर वहीं के होकर रह गए।
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पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री अपने रामकथा के दिन दिव्य दरबार जब लगाते हैं, तो उनके मुख से अक्सर ये ठठरी शब्द सुनाई देता है। वैसे तो ये ठठरी बांधे...या ठठरी कहीं का, बुंदेलखंड के भावनात्मक लगाव को दर्शाता है। लेकिन, यही शब्द धीरेंद्र शास्त्री जब चिल्लूपार के बड़हलगंज में आयोजित राम कथा के दौरान कहा, तो बुंदेलखंड से मामखोर कनेक्शन को जोड़ते हुए यहां के लोगों का सीधा जुड़ाव भी खुद से जोड़ लिया।
देश के मशहूर कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री का चिल्लूपार से गहरा नाता है। इनके पूर्वज चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के मामखोर गांव के निवासी थे। कुछ पीढ़ी पहले वे यहां से मध्य प्रदेश बागेश्वरधाम जाकर बस गए और फिर वहीं के होकर रह गए। पिछले वर्ष रामकथा के दौरान बड़हलगंज के एक भक्त राहुल तिवारी बागेश्वरधाम में उनसे मिले और बड़हलगंज में सरयू तट पर रामकथा के लिए इच्छा जाहिर की।
पहले तो धीरेंद्र शास्त्री कुछ समझ नहीं पाए, कुछ देर बाद उनको अपने पूर्वजों की धरती याद आई और वह कथा सुनाने के लिए और इस धरती को प्रणाम करने के लिए सोचने लगे। काफी मंथन के बाद वह वह रामकथा के लिए तैयार हो गए और इसकी रणनीति बनाने लगे।
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इसे भी पढ़ें: बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री बोले, भारत में रामराज्य आया अब तो पाकिस्तान भी घबराया
वहीं, चिल्लूपार के मामखोर गांव से उनके पूर्वजों का जुड़ाव होने की जानकारी मिलते ही मामखोर वासी भी काफी उत्साहित हैं और प्रयास कर रहे हैं कि उनको अपने गांव की धरती पर घुमाएं और उनका स्वागत करें। इसकी तैयारी में भी लोग जुट गए हैं।
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देश के मशहूर कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री का चिल्लूपार से गहरा नाता है। इनके पूर्वज चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के मामखोर गांव के निवासी थे। कुछ पीढ़ी पहले वे यहां से मध्य प्रदेश बागेश्वरधाम जाकर बस गए और फिर वहीं के होकर रह गए। पिछले वर्ष रामकथा के दौरान बड़हलगंज के एक भक्त राहुल तिवारी बागेश्वरधाम में उनसे मिले और बड़हलगंज में सरयू तट पर रामकथा के लिए इच्छा जाहिर की।
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पहले तो धीरेंद्र शास्त्री कुछ समझ नहीं पाए, कुछ देर बाद उनको अपने पूर्वजों की धरती याद आई और वह कथा सुनाने के लिए और इस धरती को प्रणाम करने के लिए सोचने लगे। काफी मंथन के बाद वह वह रामकथा के लिए तैयार हो गए और इसकी रणनीति बनाने लगे।
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वहीं, चिल्लूपार के मामखोर गांव से उनके पूर्वजों का जुड़ाव होने की जानकारी मिलते ही मामखोर वासी भी काफी उत्साहित हैं और प्रयास कर रहे हैं कि उनको अपने गांव की धरती पर घुमाएं और उनका स्वागत करें। इसकी तैयारी में भी लोग जुट गए हैं।