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श्रीवत्स योग खास बनाएगा आज की शरद पूर्णिमा को
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श्रीवत्स योग खास बनाएगा आज की शरद पूर्णिमा को
गोरखपुर। शरद पूर्णिमा का पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन शुक्ल चतुर्दशी का मान शाम पांच बजकर 25 मिनट तक, फिर पूरी रात पूर्णिमा तिथि है। इस काल में चंद्रमा मेष राशि पर रहेगा। साथ ही श्रीवत्स नामक अत्यंत शुभदायक महा औदायिक योग भी है।
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार शरद पूर्णिमा का पर्व रात में मनाया जाता है। वर्षकृत्य में कहा गया है कि जिस दिन पूरी रात पूर्णिमा हो, उसी दिन शरद पूर्णिमा का आयोजन होना चाहिए। इस ऋतु मे सर्वत्र आकाश निर्मेश हो जाता है, शीतल मंद हवा बहने लगती है। इस समय चंद्रमा सोलह कला से युक्त होता है और उसकी चांदनी में अमृत का निवास हो जाता है। इसलिए उसकी किरणों से अमृत्व और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
शरद पूर्णिमा के दिन पूजन विधि
ज्योतिषाचार्य पं.राकेश पांडेय बताया कि रात्रि काल के प्रथम प्रहर में खुले आकाश में भगवान कृष्ण का आवाहन कर उनका षोडशोपचार पूजन करके गोदुग्ध में मेवा आदि डालकर खीर बनाएं। उससे भगवान का भोग लगाएं। उस पात्र को किसी जालीदार कपड़े से ढककर खुले आकाश के नीचे रख दें। रात्रि के दूसरे प्रहर के अंत तक भगवान विष्णु का कीर्तन व भजन करें। पश्चात भगवान को विश्राम मुद्रा में रखकर स्वयं भी शयन करें। प्रात: काल सूर्योदय के पूर्व उस खीर रूपी प्रसाद को स्वयं ग्रहण करें व अपने इष्ट मित्रों को वितरण कर उन्हें भी अमृत रूपी प्रसाद से लाभांवित करें। धर्म शास्त्र के अनुसार उस अमृत रूपी प्रसाद को ग्रहण करने वाला व्यक्ति चिरंजीवी होता है।
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गोरखपुर। शरद पूर्णिमा का पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन शुक्ल चतुर्दशी का मान शाम पांच बजकर 25 मिनट तक, फिर पूरी रात पूर्णिमा तिथि है। इस काल में चंद्रमा मेष राशि पर रहेगा। साथ ही श्रीवत्स नामक अत्यंत शुभदायक महा औदायिक योग भी है।
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार शरद पूर्णिमा का पर्व रात में मनाया जाता है। वर्षकृत्य में कहा गया है कि जिस दिन पूरी रात पूर्णिमा हो, उसी दिन शरद पूर्णिमा का आयोजन होना चाहिए। इस ऋतु मे सर्वत्र आकाश निर्मेश हो जाता है, शीतल मंद हवा बहने लगती है। इस समय चंद्रमा सोलह कला से युक्त होता है और उसकी चांदनी में अमृत का निवास हो जाता है। इसलिए उसकी किरणों से अमृत्व और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
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शरद पूर्णिमा के दिन पूजन विधि
ज्योतिषाचार्य पं.राकेश पांडेय बताया कि रात्रि काल के प्रथम प्रहर में खुले आकाश में भगवान कृष्ण का आवाहन कर उनका षोडशोपचार पूजन करके गोदुग्ध में मेवा आदि डालकर खीर बनाएं। उससे भगवान का भोग लगाएं। उस पात्र को किसी जालीदार कपड़े से ढककर खुले आकाश के नीचे रख दें। रात्रि के दूसरे प्रहर के अंत तक भगवान विष्णु का कीर्तन व भजन करें। पश्चात भगवान को विश्राम मुद्रा में रखकर स्वयं भी शयन करें। प्रात: काल सूर्योदय के पूर्व उस खीर रूपी प्रसाद को स्वयं ग्रहण करें व अपने इष्ट मित्रों को वितरण कर उन्हें भी अमृत रूपी प्रसाद से लाभांवित करें। धर्म शास्त्र के अनुसार उस अमृत रूपी प्रसाद को ग्रहण करने वाला व्यक्ति चिरंजीवी होता है।
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