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Gorakhpur News: मरीज माफिया की जांच में शहर के कई निजी अस्पताल रडार पर

Mon, 02 Mar 2026 02:12 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 02:12 AM IST
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Several private hospitals in the city are under scanner in the investigation of patient mafia.

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- सीडीआर की जांच कर रही पुलिस, कई अस्पतालों में मरीज पहुंचाने की सामने आई बात
- बिहार का माफिया शहर के अस्पतालों में सप्लाई कर मरीज
- डॉ. पंकज का बयान दर्ज होने के बाद अब दूसरे अस्पतालों की भी हो रही जांच

गोरखपुर। कैंट थाना क्षेत्र में डॉक्टर से रंगदारी मांगने के मामले की जांच में पुलिस अब मरीज माफिया की पड़ताल कर रही है। डॉक्टर पंकज दीक्षित के बयान के आधार पर नए तथ्य सामने आए हैं। साथ ही कॉल डिटेल और सीडीआर की पड़ताल से शहर के कई निजी अस्पतालों में मरीज लाने वाले ‘मरीज माफिया’ के नेटवर्क की भी पोल खुल रही है। पुलिस की जांच में कई निजी अस्पताल रडार पर हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बिहार और आसपास के जिलों से मरीज सुनियोजित तरीके से शहर के अस्पतालों में भेजे जा रहे थे।
जांच में सामने आया है कि बिहार के बेतिया निवासी बिट्टू खान जो 50 से अधिक एंबुलेंस संचालित करता है। वह मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराने के एवज में अस्पताल संचालकों से मोटी रकम लेता था। प्रारंभ में मरीज मानसी हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर पंकज दीक्षित को भेजे जाते थे लेकिन हाल के दिनों में बिट्टू ने मरीज सान्वी अस्पताल की ओर मोड़ दिए। इसके लिए कमीशन और एडवांस के तौर पर पांच से 20 लाख रुपये प्रति अस्पताल लिए जाते थे।
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16 फरवरी को दर्ज मामले में डॉक्टर पंकज ने बताया कि उनसे 15 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। इसके 24 घंटे के भीतर एक ऑडियो भी सामने आया, जिसमें बिहार के हिस्ट्रीशीटर मरीज माफिया और डॉक्टर की बातचीत रिकॉर्ड थी। इसमें मरीज भेजने और कमीशन लेने की डील की चर्चा की गई थी।
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बिट्टू खान की तलाश कर रही पुलिस
पुलिस बिट्टू खान और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है। सीडीआर और बैंक लेन-देन की जांच से नेटवर्क के और सबूत जुटाने की कोशिश की जा रही है। जांच में यह भी पता चला कि मरीज और उनके परिजन मानसिक दबाव में रखे जाते थे, उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनका इलाज सुरक्षित रहेगा। एजेंट और एंबुलेंस चालकों को अस्पताल के बिल का 30 प्रतिशत हिस्सा कमीशन के रूप में मिलता था। इसके अलावा नेटवर्क में शामिल डॉक्टरों को लाखों रुपये की फीस दी जाती थी। एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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