गोरखपुर: पशु अंत्येष्टि स्थल के लिए सात एकड़ जमीन चिन्हित, 3.5 करोड़ की लागत से होगा निर्माण
अपर नगर आयुक्त आरबी सिंह ने कहा कि पशु अंत्येष्टि स्थल के लिए सात एकड़ जमीन चिन्हित कर ली गई है। जल्द ही बाउंड्री बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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अगले साल से मृत पशु खुले में नहीं फेंके जाएंगे। इन मृत पशुओं के वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण के लिए नगर निगम मृत पशु अंत्येष्टि स्थल बनाने जा रहा है। इसके लिए करीब सात एकड़ जमीन चिन्हित कर ली गई है। वहीं प्लांट के निर्माण के लिए बंगाल की एक कंपनी फाइनल भी हो चुकी है। नगर निगम के प्रस्ताव पर पश्चिम बंगाल की कंपनी एटीके इंजीनियरिंग सर्विस ने प्रोजेक्ट तैयार किया है।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 की एजेंसी क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) के सर्वे में पाया गया था कि देश के विभिन्न इलाकों में जानवरों के शवों का निस्तारण सही ढंग से नहीं किया जा रहा है। गोरखपुर भी इनमें से एक है। इसके मद्देनजर नगर निगम बोर्ड ने पशुओं के शवों के निस्तारण के लिए अंत्येष्टि स्थल बनाने का निर्णय लिया है।
अपर नगर आयुक्त आरबी सिंह ने कहा कि पशु अंत्येष्टि स्थल के लिए सात एकड़ जमीन चिन्हित कर ली गई है। जल्द ही बाउंड्री बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि पशु अंत्येष्टि स्थल के लिए बंगाल की कंपनी फाइनल हो चुकी है। करीब 3.5 करोड़ रुपये की लागत से इस प्लांट का निर्माण किया जाएगा।
मृत पशुओं से भी होगी नगर निगम को कमाई
गोरखपुर शहर में मरने वाले पशु आने वाले समय में नगर निगम के लिए बोझ नहीं बल्कि आमदनी का जरिया बन जाएंगे। नगर निगम इन मृत पशुओं के चमड़े, हड्डियों और नाखूनों से कमाई करेगा। यह नगर निगम की ओर से मृत पशुओं के निस्तारण के लिए एक कंपनी के माध्यम से लगाए जाने वाली अत्याधुनिक मशीन से संभव हो सकेगा।
कोलकाता की एटीके इंजीनियरिंग सर्विसेज नगर निगम क्षेत्र में एक अत्याधुनिक मशीन लगाने जा रही है। कंपनी के निदेशक आलोक करन ने बताया कि मृत पशुओं के चमड़े के अलावा हड्डियां और फैट का भी व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा सकेगा।