सूदखोरों पर शिकंजा: गोरखपुर में दरोगा, बीपीओ निलंबित, तैयार होगी सूची
पांच फरवरी को देवकली गांव में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हुई थी। सामने आया कि इंद्र बहादुर मौर्या ने अपने दो बच्चों और पत्नी की गला रेतकर हत्या की थी और फिर खुद आग लगाकर खुदकुशी कर ली थी। पहले तो पुलिस ने इस मामले में साले की तहरीर पर इंद्र बहादुर मौर्या पर हत्या का केस दर्ज कर रफा-दफा कर दिया था, लेकिन बाद में अगले दिन भतीजे ने सूदखोरों पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए दूसरी तहरीर दे दी थी।
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सूदखोरों पर शिकंजा न कसने के आरोप में हल्का दरोगा अजय कुमार और बीट पुलिस अधिकारी (बीपीओ) धीरेंद्र यादव को एसएसपी ने निलंबित कर दिया। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच का भी आदेश दिया गया है। उधर, आईजी जे. रविंद्र ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए रेंज के सभी जिले (गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर व महराजगंज) के एसपी को पत्र जारी कर निर्देशित किया है कि थाना पुलिस गोपनीय जांच कर एक हफ्ते में अपने-अपने इलाके के सूदखोरों की सूची तैयार कर लें। ताकि, उन पर कार्रवाई की जा सके। किसी भी दशा में कोई बिना लाइसेंस का सूदखोर नहीं बचना चाहिए।
जानकारी के मुताबिक, पांच फरवरी को देवकली गांव में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हुई थी। सामने आया कि इंद्र बहादुर मौर्या ने अपने दो बच्चों और पत्नी की गला रेतकर हत्या की थी और फिर खुद आग लगाकर खुदकुशी कर ली थी। पहले तो पुलिस ने इस मामले में साले की तहरीर पर इंद्र बहादुर मौर्या पर हत्या का केस दर्ज कर रफा-दफा कर दिया था, लेकिन बाद में अगले दिन भतीजे ने सूदखोरों पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए दूसरी तहरीर दे दी थी।
जांच में पता चला कि जुआ की लत की वजह से इंद्र बहादुर सूदखोरों के चंगुल में आ गया था और फिर उसने आत्मघाती कदम उठाया है। इसके बाद ही पुलिस ने भतीजे की तहरीर को भी दर्ज मुकदमे में शामिल कर लिया, लेकिन अभी तक सूदखोरों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस पर एसएसपी ने हल्का दरोगा और बीपीओ को निलंति कर दिया है।
उधर, आईजी रेंज ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सूदखोरों पर कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया है। एक हफ्ते में पुलिस को सूदखोरों की थानेवार सूची तैयार कर उस पर कार्रवाई करनी है। पुलिस यह भी जानने की कोशिश करेगी कि आखिर सूदखोर किस तरह से वसूली करते हैं और सूद पर रुपये देने के लिए गिरवी के तौर पर कैसे और क्या रखते है। पूरी विस्तृत रिपोर्ट आईजी ने एक हफ्ते में मांगी है।
आईजी जे. रविंद्र ने कहा कि सूदखोरों पर कार्रवाई के लिए रेंज के सभी एसपी को निर्देशित किया गया है। एक हफ्ते में थानेदार अवैध सूदखोरों की सूची मांगी गई है। विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भतीजा बोला- सूदखोर चाचा को प्रताड़ित कर रहे थे
पुलिस को दी तहरीर में अभिषेक ने लिखा है, इस सामूहिक हत्याकांड से पहले गांव के सूदखोरों से परेशान होकर मेरे पिता जय बहादुर मौर्य गांव छोड़कर 3 साल पहले लापता हो गए। मेरे गांव के संदीप मौर्य ने मेरे पिता को सूद पर रुपए दिया था। जिसके ब्याज के एवज में उसने मेरे पिता के हिस्से का खेत और जमीन रजिस्ट्री करा ली। जबकि, उस जमीन का बकाया 15 लाख रुपए भी संदीप ने अब तक नहीं दिया।
विजय और संदीप हड़पना चाहते थे चाचा की जमीन
उसने तहरीर में यह भी कहा है, मेरे चाचा इंद्र बहादुर सिंह को इसी गांव के विजय प्रताप सिंह, संदीप मदृदेशिया ने सूद पर रुपए दिए थे। जिसका ब्याज नहीं चुका पाने पर वह सभी चाचा को प्रताड़ित कर रहे थे। सूदखोर चाहते थे कि पिता की तरह मेरे चाचा भी अपने हिस्से की जमीन और खेत उनके नाम रजिस्ट्री कर दें। देवकली गांव में इंद्रबहादुर ने पत्नी और बच्चों की हत्या के बाद घर में ही खुद को आग लगा ली।
मकान और 4 हजार वर्ग फीट जमीन हड़पना चाहते थे सूदखोर
जुआ खेलने के लिए उसने ब्याज पर काफी कर्ज ले रखा था। सूदखोर कर्ज के एवज में उसकी जमीन और मकान लिखवाना चाहते थे। इसलिए, इंद्र बहादुर जब भी सूदखोरों से कर्ज मांगता था तो वह उसे रुपए मुहैया करा देते थे। लेकिन, पत्नी सुशीला किसी भी हाल में घर और खेत बिकने नहीं देना चाहती थी। इस बात को लेकर परिवार में अक्सर विवाद और मारपीट होती थी।