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झिझक छोड़कर संगीता ने जैविक खेती को बनाया रोजगार का जरिया, दूसरी महिलाओं का भी बनीं सहारा

Sun, 27 Sep 2020 02:27 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 27 Sep 2020 02:27 PM IST
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Sangeeta made organic farming and given many women jobs in Gorakhpur
समूह की महिलाओं के साथ बैठक करती संगीता। - फोटो : अमर उजाला।

पति की प्राइवेट नौकरी से तीन बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना कठिन लगने लगा तो गोरखपुर पाली ब्लॉक के तीवरान गांव की संगीता रावत ने झिझक छोड़ खुद भी रोजगार करने की ठानी। बाजार की मांग और लोगों से मशविरे के बाद उन्होंने जैविक खेती को रोजगार का माध्यम बनाया। साल भर पहले संगीता ने गांव एवं उसके आसपास की 12 सदस्यों को एकत्रित कर बुद्ध आजीविका स्वयं सहायता समूह का गठन किया। वर्तमान में इस समूह से छह अन्य समूह की 80 से ज्यादा महिलाएं जुड़कर रोजगार कर रही हैं।

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प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद संगीता के नेतृत्व में समूह ने सबसे पहले जैविक तरीके से सब्जी उगाना शुरू किया। अच्छी आमदनी होने लगी तो श्री विधि से हल्दी तथा धान की खेती भी शुरू कर दी। यह समूह अब तक 16 पोषण वाटिका का निर्माण कर चुका है। सिर्फ सब्जी और हल्दी से ही समूह की महिलाओं को पांच से आठ हजार रुपये महीने की आमदनी हो रही है। संगीता ने अपने तीन बीघा खेत में श्री विधि से धान बोया है। उनसे प्रेरित होकर समूह की अन्य महिलाओं ने भी करीब 25 बीघे में श्री विधि से धान की खेती की है।
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समूह की सचिव कंचन और रुमाली देवी ने सब्जी बोने के साथ पशुपालन भी शुरू कर दिया है । कुछ सदस्य परचून की दुकानें भी चला रही हैं। प्रभावती समूह के रुपये से किराए पर खेत लेकर खेती कर रही हैं। समूह की अध्यक्ष संगीता का कहना है कि घर की जिम्मेदारी के साथ ही रोजगार की दिशा में चल रहे प्रयासों में एनआरएलएम के स्थानीय अफसरों के साथ ही पति पंचम रावत का भी विशेष योगदान हैं, जिन्होंने हमेशा हौसला आफजाई की।
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क्या है श्री विधि

Sangeeta made organic farming and given many women jobs in Gorakhpur
धान की फसल दिखाती संगीता। - फोटो : अमर उजाला।
श्री विधि (एस.आर.आई) धान की खेती की एक पद्धति है। इस विधि का इजाद 1983 में अफ्रीका के मेडागास्कर में एक चर्च के पादरी हेनरी ने किया था। । यह विधि हमारे परंपरागत विधि बोवाई और रोपाई से भिन्न है। इसमें पौधो की रोपाई 10 इंच की समान दूरी पर लाइन में की जाती है।  इस विधि के तहत 10 से 12 दिन के या दो पत्तों के पौधों को लगाया जाता है। एक बार में एक ही पौधे को लगाया जाता है।

दो से तीन गुना ज्यादा होती है उपज
श्री विधि में एक एकड़ खेत में धान रोपने के लिए सिर्फ 2 किलो बीज की आवश्यकता होती है क्योंकि एक किलोग्राम धान में लगभग चालीस हजार दाने होते हैं। इस तरह दो किलो बीज में अस्सी हजार दाने होते हैं जबकि एक एकड़ खेत में दस इंच की दूरी पर एक-एक पौधा लगाने में लगभग चौंसठ हजार पौधों की आवश्यकता पड़ती है।

इसके लिए दो किलो बीज पर्याप्त है। श्री विधि में प्रति पौधे में औसतन 40 से 50 कल्ले निकलते हैं, जो अधिकतम 80 तक जा सकते हैं, इस विधि से खेती करने से परंपरागत विधि की तुलना में 2 से 3 गुणा ज्यादा उपज होती है।

श्री विधि के अन्य फायदें
  • इस विधि से खेती में पानी का इस्तेमाल कम करना पड़ता है।
  • हर किस्म के धान को इस विधि से लगाया जा सकता है।
  • बीमारियों और कीटों का प्रकोप कम होता है।
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