Gorakhpur: चार बैच की दवाओं के नमूने जांच के लिए कंपनी को भेजा, पकड़ी गई थी दो करोड़ की फेंसिडिल सिरप
ड्रग विभाग को लेबोरेट फॉर्मास्युटिकल ने कंपनी के जरिये तीन साल की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड भेजा है। इसके बाद से व्यापारी ने राहत की सांस ली। संचालक मनीष केडिया ने बताया कि रिकॉर्ड देने में देरी की वजह कंपनी की ओर से डाटा का मिलना था। कंपनी पूरा डाटा तत्काल नहीं देती है।
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गोरखपुर जिले के गीडा में पकड़ी गई दो करोड़ रुपये की फेंसिडिल सिरप के चार बैच की दवाओं के नमूने ड्रग विभाग की टीम ने एबाट कंपनी को भेजा है। यही कंपनी फेंसिडिल सिरप बनाती है।
विभाग ने नमूनों के साथ कंपनी को पत्र भेजकर पूछा है कि इस बैच की दवाएं बनी हैं या नहीं, यदि बनी हैं, तो उन्हें किसे बेचा गया है। कंपनी से जवाब मिलने के बाद तय होगा कि फेंसिडिल सिरप एबाट कंपनी ने बनाया है या फिर कहीं और से बनवाकर संबंधित कंपनी का लेवल चस्पा किया गया है।
ड्रग विभाग ने अब नशीली दवाओं के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए नए निर्णय लिए हैं। अब कंपनी दवाओं के बैच नंबर की जांच के लिए संबंधित कंपनी से सत्यापन कराएगी। पता किया जाएगा कि बैच सही या नहीं।
यह फैसला फेंसिडिल सिरप की बड़ी खेप मिलने के बाद लिया गया है। मामले में अभी भी दवा व्यापारी भाई अमित गुप्ता और आशीष गुप्ता फरार चल रहे हैं। ड्रग विभाग के इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि इस पहल से सही जानकारियां सामने आएंगी। बताया कि फेंसिडिल सिरप मामले में भी संदेह है। क्योंकि, दवा ब्लीचिंग पाउडर के बिल पर आगरा से मंगाई गई थी। कंपनी से जांच रिपोर्ट आने के बाद सही जानकारियां मिल सकेंगी।
जांच के लिए 16 नमूने भेजे गए लखनऊ
ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि चार दिनों में जिन दुकानों के नशीली दवाओं के सैंपल लिए गए हैं, उन्हें जांच के लिए लखनऊ भेजे गए हैं। इनमें 16 दवाओं के नमूने शामिल हैं। जांच के बाद अन्य कार्रवाई की जाएगी।
लेबोरेट फॉर्मास्युटिकल ने तीन साल का रिकॉर्ड विभाग को सौंपा
ड्रग विभाग को लेबोरेट फॉर्मास्युटिकल ने कंपनी के जरिये तीन साल की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड भेजा है। इसके बाद से व्यापारी ने राहत की सांस ली। संचालक मनीष केडिया ने बताया कि रिकॉर्ड देने में देरी की वजह कंपनी की ओर से डाटा का मिलना था। कंपनी पूरा डाटा तत्काल नहीं देती है। इसके लिए कंपनी ने शुक्रवार का समय मांगा था। कंपनी ने एक दिन पहले ही बृहस्पतिवार को पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिया है, जिसे विभाग को सौंप दिया गया है। इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं मिली है।