मिशन 2022: प्रत्याशी तय करने का समय, मगर बिना नेतृत्व भटक रही समाजवादी पार्टी
दावा प्रदेश में सरकार बनाने का, अभी तक जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष की तलाश पूरी नहीं हो पाई है। जिला-महानगर कार्यकारिणी में गुटबाजी चरम पर, दफ्तर से लेकर सड़कों तक पर मनमुटाव दिखाई दे रहा है।
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विधानसभा चुनाव सिर पर देख जहां राजनीतिक दलों में प्रत्याशियों के चयन पर मंथन तेज हो गया है, वहीं समाजवादी पार्टी अपने जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष की तलाश तक पूरी नहीं कर सकी है। जिलाध्यक्ष का पद पिछले करीब चार महीने से खाली है। महानगर अध्यक्ष की कुर्सी दो साल से अधिक समय से खाली पड़ी है।
आगामी विधानसभा चुनाव में जीत व सरकार बनाने का दावा करने वाली सपा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद में ही बिना नेतृत्व के चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। कहने के लिए धरना-प्रदर्शन, बैठकों और कार्यक्रमों का नेतृत्व निवर्तमान जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी और निवर्तमान महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम कर रहे हैं, मगर इस जिम्मेदारी का निर्वहन महज औपचारिकता तक ही सीमित रह गया है। पार्टी में जिला से लेकर महानगर कार्यकारिणी तक गुटबाजी चरम पर है। कई गुटों में बंटे नेता-कार्यकर्ता एक-दूसरे की टांग खींचने में जुटे हैं। राज्य सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन भी दो धड़ों में बंटकर किया जा रहा है। एक का नेतृत्व संगठन तो दूसरे का पूर्व विधायक करते हैं।
आपसी मनमुटाव सिर्फ पार्टी के भीतर ही नहीं, बल्कि पार्टी कार्यालय से लेकर बूथ स्तर तक की बैठकों और सड़क पर होने वाले धरना प्रदर्शन में भी अब साफ दिखाई पड़ रहा है। कौन सा नेता-कार्यकर्ता कब किस करवट बैठेगा, इसी को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। सपा से प्रत्याशी पद के लिए दावे की तैयारी में जुटे लोग भी पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं की निष्ठा को लेकर सशंकित हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में प्रत्याशी तक सहेज नहीं सकी पार्टी
हाल ही में संपन्न हुए ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी खुद के प्रत्याशी तक नहीं सहेज सकी और औंधे मुंह गिर गई। पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि ऐसा नहीं है कि गोरखपुर में चल रही इस गुटबाजी से शीर्ष नेतृत्व अनजान है। पार्टी के ही लोग एक-दूसरे की कारस्तानी वहां तक पहुंचा रहे हैं, मगर नेतृत्व अभी खामोश है। अब पार्टी के भीतर ही यह चर्चा होने लगी है कि गुटबाजी की वजह से ही जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के पद पर किसी की तैनाती नहीं हो पा रही है। शीर्ष नेतृत्व को आशंका है कि एक जाति-वर्ग के नेता को कमान सौंपी तो दूसरा भड़क सकता है। पुराने अनुभव, इस आशंका को बल भी देते हैं।
अगले महीने चार सीटों पर तय हो सकते हैं प्रत्याशियों के नाम
समाजवादी पार्टी दो चरणों में जिले की नौ विधानसभाओं में अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर सकती है। पहले चरण के तहत तीन से चार विधानसभा में नवंबर के अंतिम सप्ताह या दिसंबर के पहले सप्ताह तक नामों की घोषणा हो सकती है। इनमें गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवां, कैंपियरगंज, खजनी शामिल हैं। कुछ विधानसभाओं में प्रत्याशियों के नाम दोहराए जा सकते हैं तो एक या दो विधानसभा में दूसरे दलों से आकर शामिल हुए लोगों पर भी पार्टी दांव खेल सकती है।
समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी ने कहा कि पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच कोई मनमुटाव नहीं है। सभी अनुशासित हैं और चुनाव की तैयारियों में इस संकल्प के साथ जुटे हैं कि 2022 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में फिर सपा की सरकार बने। जिलाध्यक्ष पद पर तैनाती, राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला है। वह जो भी निर्णय करेंगे, उसका पूरा सम्मान किया जाएगा।
निवर्तमान महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम ने कहा कि महानगर अध्यक्ष पद पर कब तैनाती होगी इसकी मुझे जानकारी नहीं है। यह राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला होगा। पार्टी के सभी नेता, कार्यकर्ता पूरे मनोयोग से विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। जनता, भाजपा का असल चेहरा देख चुकी है और परिवर्तन का मन बना चुकी है। 2022 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ही आएगी।