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कुछ डॉक्टर दलालों को दे रहे शह: माफिया के दम पर चल रहा गोरखपुर के कई निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर का धंधा

Tue, 20 Jun 2023 12:31 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 20 Jun 2023 12:31 PM IST
सार

जिला अस्पताल एसआईसी डॉ. राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि जिला अस्पताल में दलालों और अवांछनीय तत्वों का जमावड़ा लगा रहता था। इसके लिए डीएम और एसएसपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई है। कुछ हद तक इस पर रोक भी लग गई है।

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running private hospitals and medical stores in Gorakhpur on strength of mafia
गोरखपुर जिला अस्पताल में मरीजों की लंबी लाइन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर शहर के कई बड़े और नामी अस्पतालों का काम सरकारी अस्पतालों से मरीज उठा रहे माफिया चला रहे हैं। जिला अस्पताल और बीआरडी में दिन रात इन माफिया का डेरा जमा रहता है। यही नहीं निजी मेडिकल स्टोर का दवाई का धंधा भी इसी माफिया और दलालों के जरिए चल रहा है।

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कुछ डॉक्टरों की शह पर दलाल बेरोक टोक अस्पताल में आ रहे हैं और मरीजों को बरगला कर निजी अस्पतालों में इलाज के लिए ले जा रहे हैं। कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं, जो कमीशन के लिए दलालों के निजी मेडिकल स्टोर की दवाएं लिख रहे हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन भी सवालों के घेरे में आ गया है। मामले में एलआईयू ने भी अंदरूनी तौर पर जांच शुरू कर दी है।
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जिला अस्पताल में डॉक्टरों का रैकेट सक्रिय है। इस बात का खुलासा एसआईसी डीएम को पत्र लिखकर कर चुके हैं। डीएम को लिखे पत्र में उन्होंने बताया है कि अस्पताल में सक्रिय दलाल परिसर में घूमत रहते हैं। मरीज को गुमराह करते हैं और डॉक्टरों पर अनावश्यक रूप से दबाव बनाते हैं। निजी एंबुलेंस के जरिए मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने का प्रयास करते हैं।
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डीएम को पत्र लिखने के बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से अस्पताल की छवि धूमिल हो रही है। बताया जा रहा है कि इस खेल में कुछ ही डॉक्टर शामिल हैं। ये दलालों को अपनी केबिन में बैठाते हैं, उनके मेडिकल स्टोर में उपलब्ध दवाएं लिखते हैं। इसके एवज में दलाल रोजाना इनका हिसाब भी करते हैं। इसके अलावा मरीज भर्ती कराने के नाम पर भी अच्छी खासी रकम देते हैं। इस तरह के सबसे अधिक मामले आर्थाें और सर्जरी विभाग के हैं। इसके अलावा मेडिसिन विभाग के एक डॉक्टर भी भूमिका भी संदिग्ध है।

इन इलाकों में भेजते हैं मरीज

जिला अस्पताल में सक्रिय दलाल मरीजों को बरगलाकर दाउदपुर, पादरी बाजार, बेतियाहाता, तारामंडल इलाके के कुछ अस्पतालों में भेजते हैं। बताया जाता है कि जिला अस्पताल में ड्यूटी करने वाले कुछ डॉक्टर इन अस्पतालों में जाकर सर्जरी भी करते हैं। खोवा मंंडी में स्थित एक अस्पताल की भी भूमिका संदिग्ध है। बताया जा रहा है कि वह अस्पताल पहले दूसरे नाम से खुला था। लेकिन, शिकायत के बाद जब सील हुआ तो नाम बदल कर फिर से अस्पताल खोल लिया।

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न्यूरो के मरीजों का रेट सबसे अधिक
बताया जा रहा है कि न्यूरो के मरीजों का रेट सबसे अधिक है। क्योंकि, जिला अस्पताल में न्यूरो फिजिशियन और न्यूरो सर्जन नहीं हैं। इन मरीजों को जिला अस्पताल के डॉक्टर बीआरडी रेफर कर देते हैं। इस बीच दलाल मरीजों को फंसा लेते हैं और दाउदपुर और पैडलेगंज के निजी अस्पताल में न्यूरो सर्जन के यहां ले जाते हैं। यहां पर एक मरीज भेजने पर दलाल को 20 से 25 हजार रुपये मिलता है। इसके लिए दोनों अस्पतालों के बड़े डाॅक्टरों ने अपने-अपने आदमी भी लगा रखे हैं।

जिला अस्पताल एसआईसी डॉ. राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि जिला अस्पताल में दलालों और अवांछनीय तत्वों का जमावड़ा लगा रहता था। इसके लिए डीएम और एसएसपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई है। कुछ हद तक इस पर रोक भी लग गई है। जिला अस्पताल के सभी प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।


 

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