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आरटीई: कोविड काल में छह हजार बच्चों की शुल्क प्रतिपूर्ति अधर में
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आरटीई : कोविड काल में छह हजार बच्चों की शुल्क प्रतिपूर्ति अधर में
गोरखपुर। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का जिले के ख्यातिलब्ध स्कूलों में पढ़ने का सपना प्रदेश सरकार ने पूरा कर दिया, मगर शुल्क प्रतिपूर्ति और कॉपी किताब की धनराशि का भुगतान न होने से स्कूल प्रबंधनों के साथ करीब 6000 बच्चों की मुसीबत बढ़ गई हैं। स्कूल प्रबंधनों के मुताबिक कोविड काल के दौरान शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं हुई है।
निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार-2009 के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश पाने वाले छात्र-छात्राओं की अधिकतम 450 रुपये फीस शासन द्वारा विद्यालयों को भेजी जाती है। जबकि, बच्चों के अभिभावकों को यूनीफॉर्म व किताबों के लिए पांच हजार रुपये दिए जाते हैं। वर्ष 2021-22 में आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के बच्चों का प्राइवेट स्कूलों के लिए अप्रैल में पहले चरण की लॉटरी के अंतर्गत 2196 और दूसरे चरण में 689 और तीसरे चरण में 278 बच्चों को निशुल्क प्रवेश के लिए चुना गया है।
लखनऊ में स्कूल एसोसिएशन प्रवेश लेने से कर चुकी है हाथ खड़े
लखनऊ के स्कूल एसोसिएशन ने आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों की शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं होने से व्यथित होकर, इस वर्ष बच्चों का प्रवेश लेने से हाथ खड़े कर चुकी है। एसोसिएशन की ओर से शुल्क प्रतिपूर्ति की दर को भी बढ़ाने का अनुरोध किया जा चुका है।
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1000 अभ्यर्थियों के खाते में पहुंची कॉपी किताब की धनराशि
बेसिक शिक्षा विभाग की मानें तो वर्ष 2020-21 में प्रवेश लेने वाले 2100 बच्चों में 1076 बच्चों के कॉपी-किताब की धनराशि के रूप में पांच हजार रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। शेष धनराशि के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। बजट मिलते ही धनराशि खातों में भेजी जाएगी, जबकि वर्ष 2021-22 में तीन हजार से अधिक बच्चों को प्रवेश आरटीई के तहत हुआ है। उन्हें भी कॉपी-किताब के लिए धनराशि नहीं मिली है।
आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले स्कूलों से प्रवेशित बच्चों की सूचना को एकत्र कर शासन को बजट के लिए प्रेषित किया जाएगा। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि शुल्क प्रतिपूर्ति के अभाव में किसी बच्चे को शिक्षा के अधिकार से दूर न करें। अगर ऐसी कोई शिकायत आती है तो अभिभावक बीएसए दफ्तर में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
-आरके सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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गोरखपुर। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का जिले के ख्यातिलब्ध स्कूलों में पढ़ने का सपना प्रदेश सरकार ने पूरा कर दिया, मगर शुल्क प्रतिपूर्ति और कॉपी किताब की धनराशि का भुगतान न होने से स्कूल प्रबंधनों के साथ करीब 6000 बच्चों की मुसीबत बढ़ गई हैं। स्कूल प्रबंधनों के मुताबिक कोविड काल के दौरान शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं हुई है।
निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार-2009 के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश पाने वाले छात्र-छात्राओं की अधिकतम 450 रुपये फीस शासन द्वारा विद्यालयों को भेजी जाती है। जबकि, बच्चों के अभिभावकों को यूनीफॉर्म व किताबों के लिए पांच हजार रुपये दिए जाते हैं। वर्ष 2021-22 में आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के बच्चों का प्राइवेट स्कूलों के लिए अप्रैल में पहले चरण की लॉटरी के अंतर्गत 2196 और दूसरे चरण में 689 और तीसरे चरण में 278 बच्चों को निशुल्क प्रवेश के लिए चुना गया है।
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लखनऊ में स्कूल एसोसिएशन प्रवेश लेने से कर चुकी है हाथ खड़े
लखनऊ के स्कूल एसोसिएशन ने आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों की शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं होने से व्यथित होकर, इस वर्ष बच्चों का प्रवेश लेने से हाथ खड़े कर चुकी है। एसोसिएशन की ओर से शुल्क प्रतिपूर्ति की दर को भी बढ़ाने का अनुरोध किया जा चुका है।
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1000 अभ्यर्थियों के खाते में पहुंची कॉपी किताब की धनराशि
बेसिक शिक्षा विभाग की मानें तो वर्ष 2020-21 में प्रवेश लेने वाले 2100 बच्चों में 1076 बच्चों के कॉपी-किताब की धनराशि के रूप में पांच हजार रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। शेष धनराशि के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। बजट मिलते ही धनराशि खातों में भेजी जाएगी, जबकि वर्ष 2021-22 में तीन हजार से अधिक बच्चों को प्रवेश आरटीई के तहत हुआ है। उन्हें भी कॉपी-किताब के लिए धनराशि नहीं मिली है।
आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले स्कूलों से प्रवेशित बच्चों की सूचना को एकत्र कर शासन को बजट के लिए प्रेषित किया जाएगा। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि शुल्क प्रतिपूर्ति के अभाव में किसी बच्चे को शिक्षा के अधिकार से दूर न करें। अगर ऐसी कोई शिकायत आती है तो अभिभावक बीएसए दफ्तर में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
-आरके सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी