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Gorakhpur News: वित्तीय वर्ष 2023-24 जिले में मनरेगा में खर्च हुआ 290.62 करोड़
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-1.24 लाख परिवारों को मनरेगा से मिला रोजगार
-अप्रैल से मार्च तक 66.74 लाख मानव दिवस सृजित किया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिले में 290.62 करोड़ की धनराशि खर्च की गई है। इससे 1.24 लाख परिवारों को रोजगार दिया गया। इसमें सबसे अधिक मानव दिवस अनुसूचित जाति के लिए 22.46 लाख सृजित किया गया। इसमें 31.70 लाख दिवस का कार्य महिलाओं को दिया गया।
गांवों से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए मनरेगा की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य गांवों में रह रहे मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है, जिससे उनको काम की तलाश में दूर दराज न जाना पड़े। इसमें मजदूर को सौ दिन के रोजगार की गारंटी है। इसके तहत जिले में वित्तीय वर्ष 2023-24 यानी अप्रैल से मार्च तक 66.74 लाख मानव दिवस सृजित किया गया। इसमें अनुसूचित जाति के लिए 22.46 लाख मानव दिवस सृजित किया गया। मनरेगा से 1.24 परिवारों को रोजगार दिया गया। इस पर 290.62 करोड़ की धनराशि खर्च की गई। मनरेगा के तहत प्रतिदिन 230 रुपये मजदूरी दी जाती है।
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मनरेगा से कराए जाते हैं 263 कार्य
मनरेगा के तहत 263 कार्य अनुमन्य हैं। अलग-अलग जिलों में अलग कार्य कराए जाते हैं। जिन जिलों में जो कार्य अनुमन्य हैं वही कार्य होते हैं। गोरखपुर में जो कार्य कराए जाते हैं, उनमें मिट्टी का कार्य, भूमि का समतलीकरण का कार्य कराया जाता है। इसके अलावा तालाबों का जीर्णोद्धार, नाली, खड़ंजा, पुलिया, बंधा निर्माण के अलावा, गाय बकरी के लिए शेड का निर्माण कराया जाता है। यह कार्य ग्राम पंचायतें कराती हैं। इसके अलावा सिंचाई विभाग एवं लोक निर्माण विभाग की तरफ से भी मनरेगा के तहत कार्य कराए जाते हैं।
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मनरेगा के कार्यों का होता है सत्यापन
मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों का सत्यापन कराया जाता है। इसके लिए तकनीकी टीम कार्य करती है। यदि शिकायत हुई तो डीआरडीए के एई मौके पर जाकर जांच कर रिपोर्ट संबंधित अधिकारी को देते हैं। इसके अलावा अन्य जनपदीय अधिकारी सहित बीडीओ और अन्य ब्लाॅक स्तरीय अधिकारी जांच करते हैं।
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वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिले में जो कार्य कराए गए हैं उन पर 290.62 करोड़ की धनराशि खर्च की गई। जो कार्य अनुमन्य हैं वह कार्य कराए गए हैं। सरकार की मंशा है कि गांव में मजदूरों को कार्य मिले। इसके तहत उनको कार्य उपलब्ध कराया गया है।
-सौरभ श्रीवास्तव डीसी मनरेगा
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-अप्रैल से मार्च तक 66.74 लाख मानव दिवस सृजित किया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिले में 290.62 करोड़ की धनराशि खर्च की गई है। इससे 1.24 लाख परिवारों को रोजगार दिया गया। इसमें सबसे अधिक मानव दिवस अनुसूचित जाति के लिए 22.46 लाख सृजित किया गया। इसमें 31.70 लाख दिवस का कार्य महिलाओं को दिया गया।
गांवों से मजदूरों का पलायन रोकने के लिए मनरेगा की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य गांवों में रह रहे मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है, जिससे उनको काम की तलाश में दूर दराज न जाना पड़े। इसमें मजदूर को सौ दिन के रोजगार की गारंटी है। इसके तहत जिले में वित्तीय वर्ष 2023-24 यानी अप्रैल से मार्च तक 66.74 लाख मानव दिवस सृजित किया गया। इसमें अनुसूचित जाति के लिए 22.46 लाख मानव दिवस सृजित किया गया। मनरेगा से 1.24 परिवारों को रोजगार दिया गया। इस पर 290.62 करोड़ की धनराशि खर्च की गई। मनरेगा के तहत प्रतिदिन 230 रुपये मजदूरी दी जाती है।
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मनरेगा से कराए जाते हैं 263 कार्य
मनरेगा के तहत 263 कार्य अनुमन्य हैं। अलग-अलग जिलों में अलग कार्य कराए जाते हैं। जिन जिलों में जो कार्य अनुमन्य हैं वही कार्य होते हैं। गोरखपुर में जो कार्य कराए जाते हैं, उनमें मिट्टी का कार्य, भूमि का समतलीकरण का कार्य कराया जाता है। इसके अलावा तालाबों का जीर्णोद्धार, नाली, खड़ंजा, पुलिया, बंधा निर्माण के अलावा, गाय बकरी के लिए शेड का निर्माण कराया जाता है। यह कार्य ग्राम पंचायतें कराती हैं। इसके अलावा सिंचाई विभाग एवं लोक निर्माण विभाग की तरफ से भी मनरेगा के तहत कार्य कराए जाते हैं।
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मनरेगा के कार्यों का होता है सत्यापन
मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों का सत्यापन कराया जाता है। इसके लिए तकनीकी टीम कार्य करती है। यदि शिकायत हुई तो डीआरडीए के एई मौके पर जाकर जांच कर रिपोर्ट संबंधित अधिकारी को देते हैं। इसके अलावा अन्य जनपदीय अधिकारी सहित बीडीओ और अन्य ब्लाॅक स्तरीय अधिकारी जांच करते हैं।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिले में जो कार्य कराए गए हैं उन पर 290.62 करोड़ की धनराशि खर्च की गई। जो कार्य अनुमन्य हैं वह कार्य कराए गए हैं। सरकार की मंशा है कि गांव में मजदूरों को कार्य मिले। इसके तहत उनको कार्य उपलब्ध कराया गया है।
-सौरभ श्रीवास्तव डीसी मनरेगा