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जाम का इंतजाम : राप्तीनगर में शिफ्ट होगा रोडवेज वर्कशॉप, प्राइवेट बसों का जमघट भी हटेगा
Thu, 10 Aug 2023 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 10 Aug 2023 12:46 AM IST
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रेलवे बस स्टेशन पर अक्सर लग जाता है जाम
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गोरखपुर। सड़क पर ही रोडवेज, प्राइवेट बसों और ऑटो का स्टैंड होने की वजह से राहगीरों को मुश्किलें होती हैं। रोडवेज के सामने बसें खड़ी होने की वजह से जाम में लोग फंस जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार होने के लिए जाने वाले लोगों को होती है। जाम की वजह से कई लोग तो पैदल चलकर ट्रेन में सवार हो पाते हैं। पुलिस ने एक लेन पर ही डबल ट्रैफिक कर दी, लेकिन तब भी जाम से निजात नहीं मिल सका। इन हालात को देखते हुए एडीजी अखिल कुमार और कमिश्नर अनिल ढींगरा समेत सभी संबंधित विभागों के अफसरों ने बैठक में तय किया है कि रोडवेज वर्कशॉप को बीच शहर से हटाकर राप्तीनगर में शिफ्ट किया जाएगा।
शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए एकबार फिर से नए सिरे से पहल की गई है। एडीजी और कमिश्नर ने कहा कि कोशिश करें कि सुगमता से ट्रैफिक चले, लोगों को सहूलियत भी मिले, लेकिन ई-रिक्शा, ऑटो रिक्शा और प्राइवेट बसों का संचालन करने वालों को भी परेशानी न होने पाए। इसके लिए रोडवेज वर्कशॉप को बीच शहर से हटाकर राप्तीनगर में शिफ्ट किया जाएगा।
बैठक में यह भी तय हुआ कि प्राइवेट बसों के ठहराव की जगह शहर से बाहर निर्धारित कर दिया जाए। अफसरों ने यह भी कहा कि इस बात पर भी ध्यान दिया जाए कि वहां तक यात्री कैसे जाएंगे। इसके लिए तय जगह पर ऑटो व ई-रिक्शा स्टैंड होना चाहिए।
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दरअसल, सड़कों पर जाम लगने की सबसे बड़ी वजह रोडवेज की बसें, प्राइवेट बसें, ऑटो व ई-रिक्शा हो चुके हैं। इनके ठहराव की जगह निर्धारित न होने की वजह से आए दिन लंबा जाम लगता है। दूसरी सबसे बड़ी वजह सड़कों पर अतिक्रमण भी है। कई जगहों पर बीच सड़क में ही टेलीफोन के खंभे भी खड़े हैं। इन सब को देखते हुए कमिश्नर ने बुधवार को सभी विभाग के अफसरों के साथ बैठक की। आपस में विचार-विमर्श किया गया कि आखिर कैसे शहर को जाम से मुक्ति दिलाई जाए। फिर सभी विभागों को उनकी जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक में विभागों को बताया गया कि किसको क्या करना है। पुलिस को भी उनका काम बताया गया। पुलिस सभी विभाग का सहयोग करें, ऐसी हिदायत भी दी गई है। बैठक में आईजी जे.रविंद्र, डीएम कृष्णा करूणेश, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवार, एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई सहित सभी विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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इस विभाग को करना होगा यह काम
- दूर संचार विभाग को सड़कों के किनारे अनुपयोगी टेलीफोन के खंभों को हटाना होगा
- नगर आयुक्त को रेहड़ी व पटरी व्यवसाय करने वालों को वेडिंग जोन में भेजना होगा
- नगर निगम, एडीएम, एसपी सिटी को प्राइवेट बसों के लिए जगह चिह्नित करना होगा
- आरटीओ को ई-रिक्शा, ऑटो का अभियान चलाकर नंबरिंग करना होगा
- लोक निर्माण विभाग को पूरे शहर की सड़कों की लाइटों को नगर निगम को हैंडओवर करना होगा
.........
क्या सच में ऐसा होगा, यह बड़ा सवाल
शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए बैठक कर जो फैसले लिए गए हैं, वह पहली बार नहीं हुआ है। इसके पहले भी इस तरह की बैठक और निर्णय हो चुके हैं। प्राइवेट बसों के लिए शहर के बाहर खोराबार के रामनगर कड़जहां में स्टैंड के लिए जगह भी तय कर ली गई थी। लेकिन वह काम फिर आगे नहीं बढ़ पाया। दूसरे रोडवेज की बसों को ही शहर के बाहर नौसड़ में करने का फैसला लिया गया था। इसके लिए वहां पर रोडवेज का स्टैंड भी बना दिया गया, लेकिन अब वह प्राइवेट बसों के काम आता है। कुछ यही हाल सड़क से दुकानदारों को हटाने का भी है। इसके लिए रुस्तमपुर, ट्रांसपोर्टनगर सहित कई जगहों पर वेंडिंग जोन भी बना दिया गया, लेकिन आज तक उसमें शिफ्ट नहीं करा पाए हैं। शहर में ऑटो की संख्या कम करने के लिए शहर और देहात के ऑटो तक चिह्नित करना था, मगर यह काम भी फाइलों में बंद हो गया। अब एक बार फिर कवायद की गई है, इसका कितना असर होगा, यह आने वाले समय में ही पता चल पाएगा।
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सांसत में यात्री...सड़क पर बस, पैदल पहुंचते हैं रेलवे स्टेशन
लाइव रिपोर्टः इमरजेंसी में जाना हो तो छूट ही जाएगी ट्रेन, दिन में प्राइवेट बस
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सड़क पर ही रोडवेज, प्राइवेट बसों और ऑटो का स्टैंड होने की वजह से राहगीरों को मुश्किलें होती हैं। रोडवेज के सामने बसें खड़ी होने की वजह से जाम में लोग फंस जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार होने के लिए जाने वाले लोगों को होती है। जाम की वजह से कई लोग तो पैदल चलकर ट्रेन में सवार हो पाते हैं। यह हाल रोज का होने की वजह से पुलिस ने एक लेन पर ही डबल ट्रैफिक कर दी, लेकिन तब भी जाम से निजात नहीं मिल सका। मामला नया तो नहीं है, लेकिन अफसरों ने एक बार फिर से कोशिश की है। अब इसका असर आने वाले समय में ही पता चल पाएगा।
जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी चौराहे से रेलवे स्टेशन मार्ग के सड़क पर रोडवेज की बसें खड़ी रहती हैं, बस के चालक और परिचालक बसों को सड़क पर ही रोककर उसमें सवारी भरते हैं, ऐसे में इस मार्ग पर लगने वाले जाम की समस्या से लोगों को रेलवे स्टेशन जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन रोडवेज प्रशासन को राहगीरों की समस्याओं पर आंखें बंद किए रहता है। जाम के लिए सिर्फ परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने में लगे रहते हैं।
इस सब के बीच राहगीरों को सांसत झेलनी पड़ती है। अब हाल यह है कि दिन में यूनिवर्सिटी हॉस्टल गेट से लेकर चौराहे तक दोनों तरफ ई-रिक्शा, ऑटो और प्राइवेट बसों का कब्जा रहता है। जिस वजह से दिन में लोगों को जाम झेलना पड़ता है, लेकिन सबसे इमरजेंसी वाला रास्ता रेलवे स्टेशन को जाने वाला है। इस रोड पर सड़क पर ही सुबह से लेकर रात तक रोडवेज की बसें खड़ी होती है और लोग उस ओर जाने से भी बचते है, लेकिन जिसे रेलवे स्टेशन जाना होता है, उसकी मजबूरी होती है।
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शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए एकबार फिर से नए सिरे से पहल की गई है। एडीजी और कमिश्नर ने कहा कि कोशिश करें कि सुगमता से ट्रैफिक चले, लोगों को सहूलियत भी मिले, लेकिन ई-रिक्शा, ऑटो रिक्शा और प्राइवेट बसों का संचालन करने वालों को भी परेशानी न होने पाए। इसके लिए रोडवेज वर्कशॉप को बीच शहर से हटाकर राप्तीनगर में शिफ्ट किया जाएगा।
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बैठक में यह भी तय हुआ कि प्राइवेट बसों के ठहराव की जगह शहर से बाहर निर्धारित कर दिया जाए। अफसरों ने यह भी कहा कि इस बात पर भी ध्यान दिया जाए कि वहां तक यात्री कैसे जाएंगे। इसके लिए तय जगह पर ऑटो व ई-रिक्शा स्टैंड होना चाहिए।
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दरअसल, सड़कों पर जाम लगने की सबसे बड़ी वजह रोडवेज की बसें, प्राइवेट बसें, ऑटो व ई-रिक्शा हो चुके हैं। इनके ठहराव की जगह निर्धारित न होने की वजह से आए दिन लंबा जाम लगता है। दूसरी सबसे बड़ी वजह सड़कों पर अतिक्रमण भी है। कई जगहों पर बीच सड़क में ही टेलीफोन के खंभे भी खड़े हैं। इन सब को देखते हुए कमिश्नर ने बुधवार को सभी विभाग के अफसरों के साथ बैठक की। आपस में विचार-विमर्श किया गया कि आखिर कैसे शहर को जाम से मुक्ति दिलाई जाए। फिर सभी विभागों को उनकी जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक में विभागों को बताया गया कि किसको क्या करना है। पुलिस को भी उनका काम बताया गया। पुलिस सभी विभाग का सहयोग करें, ऐसी हिदायत भी दी गई है। बैठक में आईजी जे.रविंद्र, डीएम कृष्णा करूणेश, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवार, एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई सहित सभी विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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इस विभाग को करना होगा यह काम
- दूर संचार विभाग को सड़कों के किनारे अनुपयोगी टेलीफोन के खंभों को हटाना होगा
- नगर आयुक्त को रेहड़ी व पटरी व्यवसाय करने वालों को वेडिंग जोन में भेजना होगा
- नगर निगम, एडीएम, एसपी सिटी को प्राइवेट बसों के लिए जगह चिह्नित करना होगा
- आरटीओ को ई-रिक्शा, ऑटो का अभियान चलाकर नंबरिंग करना होगा
- लोक निर्माण विभाग को पूरे शहर की सड़कों की लाइटों को नगर निगम को हैंडओवर करना होगा
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क्या सच में ऐसा होगा, यह बड़ा सवाल
शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए बैठक कर जो फैसले लिए गए हैं, वह पहली बार नहीं हुआ है। इसके पहले भी इस तरह की बैठक और निर्णय हो चुके हैं। प्राइवेट बसों के लिए शहर के बाहर खोराबार के रामनगर कड़जहां में स्टैंड के लिए जगह भी तय कर ली गई थी। लेकिन वह काम फिर आगे नहीं बढ़ पाया। दूसरे रोडवेज की बसों को ही शहर के बाहर नौसड़ में करने का फैसला लिया गया था। इसके लिए वहां पर रोडवेज का स्टैंड भी बना दिया गया, लेकिन अब वह प्राइवेट बसों के काम आता है। कुछ यही हाल सड़क से दुकानदारों को हटाने का भी है। इसके लिए रुस्तमपुर, ट्रांसपोर्टनगर सहित कई जगहों पर वेंडिंग जोन भी बना दिया गया, लेकिन आज तक उसमें शिफ्ट नहीं करा पाए हैं। शहर में ऑटो की संख्या कम करने के लिए शहर और देहात के ऑटो तक चिह्नित करना था, मगर यह काम भी फाइलों में बंद हो गया। अब एक बार फिर कवायद की गई है, इसका कितना असर होगा, यह आने वाले समय में ही पता चल पाएगा।
सांसत में यात्री...सड़क पर बस, पैदल पहुंचते हैं रेलवे स्टेशन
लाइव रिपोर्टः इमरजेंसी में जाना हो तो छूट ही जाएगी ट्रेन, दिन में प्राइवेट बस
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सड़क पर ही रोडवेज, प्राइवेट बसों और ऑटो का स्टैंड होने की वजह से राहगीरों को मुश्किलें होती हैं। रोडवेज के सामने बसें खड़ी होने की वजह से जाम में लोग फंस जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार होने के लिए जाने वाले लोगों को होती है। जाम की वजह से कई लोग तो पैदल चलकर ट्रेन में सवार हो पाते हैं। यह हाल रोज का होने की वजह से पुलिस ने एक लेन पर ही डबल ट्रैफिक कर दी, लेकिन तब भी जाम से निजात नहीं मिल सका। मामला नया तो नहीं है, लेकिन अफसरों ने एक बार फिर से कोशिश की है। अब इसका असर आने वाले समय में ही पता चल पाएगा।
जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी चौराहे से रेलवे स्टेशन मार्ग के सड़क पर रोडवेज की बसें खड़ी रहती हैं, बस के चालक और परिचालक बसों को सड़क पर ही रोककर उसमें सवारी भरते हैं, ऐसे में इस मार्ग पर लगने वाले जाम की समस्या से लोगों को रेलवे स्टेशन जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन रोडवेज प्रशासन को राहगीरों की समस्याओं पर आंखें बंद किए रहता है। जाम के लिए सिर्फ परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने में लगे रहते हैं।
इस सब के बीच राहगीरों को सांसत झेलनी पड़ती है। अब हाल यह है कि दिन में यूनिवर्सिटी हॉस्टल गेट से लेकर चौराहे तक दोनों तरफ ई-रिक्शा, ऑटो और प्राइवेट बसों का कब्जा रहता है। जिस वजह से दिन में लोगों को जाम झेलना पड़ता है, लेकिन सबसे इमरजेंसी वाला रास्ता रेलवे स्टेशन को जाने वाला है। इस रोड पर सड़क पर ही सुबह से लेकर रात तक रोडवेज की बसें खड़ी होती है और लोग उस ओर जाने से भी बचते है, लेकिन जिसे रेलवे स्टेशन जाना होता है, उसकी मजबूरी होती है।
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