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Gorakhpur News: नवजातों में जन्मजात विकृतियों की पहचान कर इलाज में मदद दिलाती हैं रीता
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- एक साल में 25 बच्चों को दिला चुकी हैं इलाज में सहायता
- विश्व नर्सिंग दिवस (12 मई) पर विशेष
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जंगल कौड़िया में स्टॉफ नर्स रीता एक साल में 25 नवजातों में जन्मजात विकृति की पहचान कर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा चुकी हैं। शहर के धर्मपुर इलाके की रहने वाली रीता बताती हैं कि उन्होंने नर्सिंग का क्षेत्र अपनी सास की सलाह पर चुना। उनकी सास रेलवे अस्पताल में मैट्रन थीं।
उन्होंने भी नर्सिंग की पढ़ाई के बाद वर्ष 2013 में आरबीएसके योजना के तहत जंगल कौड़िया ब्लॉक में सेवा शुरू की। मझौना गांव की आशा कार्यकर्ता चंद्रमुखी मिश्रा बताती हैं कि तीन महिलाओं के बच्चों में कटे होंठ और तालू की पहचान स्टॉफ नर्स रीता की ही मदद से हो पाई। तीनों बच्चों में जन्म के बाद त्वरित पहचान से उनकी सर्जरी हो गई और वह तीनों पूरी तरह से ठीक हो गए हैं।
आरबीएसके योजना की डीईआईसी मैनेजर डॉ. अर्चना का कहना है कि रीता ने वर्ष 2023-24 में कटे होंठ और तालू वाले 15 बच्चों और टेढ़े मेढ़े पंजों वाले 10 बच्चों का इलाज करवाया है। वह बच्चों को खुद आरबीएसके की गाड़ी से लेकर जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचती हैं।
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स्टॉफ नर्स संध्या प्रसूता और नवजातों की देखभाल का सिखाती हैं तरीका
गोरखपुर। मातृ शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में सामान्यतया स्टॉफ नर्स की भूमिका अस्पताल परिसर तक ही सीमित होती है, लेकिन पिपराइच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर तैनात स्टॉफ नर्स संध्या रजिस्टर में लिखे प्रसूता के संपर्क नंबर के माध्यम से मां-बच्चे का हालचाल लेती रहती हैं। इस दौरान वह प्रसूता और शिशु की देखभाल का तरीका और स्तनपान के फायदे जरूर समझाती हैं। शहर के मोतीपोखरा बशारतपुर की रहने वाली संध्या 2007 से वर्ष 2017 तक भटहट सीएचसी पर स्टॉफ नर्स रहीं। इसके बाद डेढ़ वर्ष तक पिपराइच ब्लॉक के सिंहोरिया सीएचसी पर नर्स मेंटर रहीं। फिर वह पिपराइच सीएचसी पर नर्स मेंटर के तौर पर तैनात रहीं। इस समय वहीं पर स्टॉफ नर्स की भूमिका में हैं।
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सीएमओ ने दी बधाई
जिले की सभी स्टॉफ नर्सेज दिन रात समर्पित भाव से कार्य करती हैं। नर्सेज की भूमिका अस्पताल से लेकर समुदाय तक पहुंच चुकी है। उनके जरिये मां बच्चे को नया जीवन मिल रहा है। विश्व नर्सिंग दिवस पर सभी को ढेर सारी बधाई और साथ ही यह अपील भी है कि अनुकरणीय प्रयासों को अपनी प्रैक्टिस में शामिल करें।
-डॉ. आशुतोष कुमार दूबे, सीएमओ
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- विश्व नर्सिंग दिवस (12 मई) पर विशेष
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जंगल कौड़िया में स्टॉफ नर्स रीता एक साल में 25 नवजातों में जन्मजात विकृति की पहचान कर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा चुकी हैं। शहर के धर्मपुर इलाके की रहने वाली रीता बताती हैं कि उन्होंने नर्सिंग का क्षेत्र अपनी सास की सलाह पर चुना। उनकी सास रेलवे अस्पताल में मैट्रन थीं।
उन्होंने भी नर्सिंग की पढ़ाई के बाद वर्ष 2013 में आरबीएसके योजना के तहत जंगल कौड़िया ब्लॉक में सेवा शुरू की। मझौना गांव की आशा कार्यकर्ता चंद्रमुखी मिश्रा बताती हैं कि तीन महिलाओं के बच्चों में कटे होंठ और तालू की पहचान स्टॉफ नर्स रीता की ही मदद से हो पाई। तीनों बच्चों में जन्म के बाद त्वरित पहचान से उनकी सर्जरी हो गई और वह तीनों पूरी तरह से ठीक हो गए हैं।
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आरबीएसके योजना की डीईआईसी मैनेजर डॉ. अर्चना का कहना है कि रीता ने वर्ष 2023-24 में कटे होंठ और तालू वाले 15 बच्चों और टेढ़े मेढ़े पंजों वाले 10 बच्चों का इलाज करवाया है। वह बच्चों को खुद आरबीएसके की गाड़ी से लेकर जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचती हैं।
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स्टॉफ नर्स संध्या प्रसूता और नवजातों की देखभाल का सिखाती हैं तरीका
गोरखपुर। मातृ शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में सामान्यतया स्टॉफ नर्स की भूमिका अस्पताल परिसर तक ही सीमित होती है, लेकिन पिपराइच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर तैनात स्टॉफ नर्स संध्या रजिस्टर में लिखे प्रसूता के संपर्क नंबर के माध्यम से मां-बच्चे का हालचाल लेती रहती हैं। इस दौरान वह प्रसूता और शिशु की देखभाल का तरीका और स्तनपान के फायदे जरूर समझाती हैं। शहर के मोतीपोखरा बशारतपुर की रहने वाली संध्या 2007 से वर्ष 2017 तक भटहट सीएचसी पर स्टॉफ नर्स रहीं। इसके बाद डेढ़ वर्ष तक पिपराइच ब्लॉक के सिंहोरिया सीएचसी पर नर्स मेंटर रहीं। फिर वह पिपराइच सीएचसी पर नर्स मेंटर के तौर पर तैनात रहीं। इस समय वहीं पर स्टॉफ नर्स की भूमिका में हैं।
सीएमओ ने दी बधाई
जिले की सभी स्टॉफ नर्सेज दिन रात समर्पित भाव से कार्य करती हैं। नर्सेज की भूमिका अस्पताल से लेकर समुदाय तक पहुंच चुकी है। उनके जरिये मां बच्चे को नया जीवन मिल रहा है। विश्व नर्सिंग दिवस पर सभी को ढेर सारी बधाई और साथ ही यह अपील भी है कि अनुकरणीय प्रयासों को अपनी प्रैक्टिस में शामिल करें।
-डॉ. आशुतोष कुमार दूबे, सीएमओ