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Gorakhpur News: कंधों पर जिम्मेदारी... आंखों में दिखी सम्मान की खुशी
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गोरखपुर। योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह का माहौल शनिवार सुबह कुछ अलग ही नजर आया। परिसर में कदम रखते ही चारों ओर शिक्षक और उनके परिजन की आवाजाही दिखाई दे रही थी। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए शिक्षक अपने लिए खास बनाए गए इस सम्मान समारोह को लेकर उत्साहित नजर आए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सम्मानित होने वाले 81 शिक्षकों के लिए यह दिन खास था। बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों को समारोह में सम्मानित किया जाना था। अपने नाम की घोषणा और सम्मान मिलने की प्रतीक्षा में शिक्षकों के चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। कई शिक्षक अपने साथ परिवार के सदस्यों को भी लेकर पहुंचे थे। परिजन भी इस उपलब्धि के गवाह बनने को लेकर उत्साहित थे। प्रेक्षागृह के अंदर जैसे-जैसे शिक्षक पहुंचते गए, सभागार भरता चला गया। कुछ शिक्षक आपस में बातचीत करते नजर आए तो कुछ अपने साथ आए परिजन के साथ बैठकर कार्यक्रम शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। मंच की ओर सभी की निगाहें टिकी थीं। सम्मान पाने वाले शिक्षकों के बीच अपने अनुभव साझा करने और दूसरे शिक्षकों से मिलने की उत्सुकता भी दिखाई दी।
कार्यक्रम स्थल के बाहर दोनों विभागों की ओर से प्रदर्शनी के लिए स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों पर शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, नवाचारों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। समारोह में पहुंचे शिक्षक और उनके परिजन इन स्टॉलों को भी देखते रहे। प्रदर्शनी स्थल पर भी लोगों की आवाजाही बनी रही। पूरे परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सम्मान समारोह शुरू होने से पहले प्रेक्षागृह में उत्साह का माहौल बना रहा। शिक्षकों के लिए यह सिर्फ पुरस्कार पाने का अवसर नहीं बल्कि उनके कार्य और योगदान को सार्वजनिक रूप से पहचान मिलने का क्षण था। सभागार में मौजूद शिक्षकों के बीच इसी उपलब्धि की चर्चा रही।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सम्मानित होने वाले 81 शिक्षकों के लिए यह दिन खास था। बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों को समारोह में सम्मानित किया जाना था। अपने नाम की घोषणा और सम्मान मिलने की प्रतीक्षा में शिक्षकों के चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। कई शिक्षक अपने साथ परिवार के सदस्यों को भी लेकर पहुंचे थे। परिजन भी इस उपलब्धि के गवाह बनने को लेकर उत्साहित थे। प्रेक्षागृह के अंदर जैसे-जैसे शिक्षक पहुंचते गए, सभागार भरता चला गया। कुछ शिक्षक आपस में बातचीत करते नजर आए तो कुछ अपने साथ आए परिजन के साथ बैठकर कार्यक्रम शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। मंच की ओर सभी की निगाहें टिकी थीं। सम्मान पाने वाले शिक्षकों के बीच अपने अनुभव साझा करने और दूसरे शिक्षकों से मिलने की उत्सुकता भी दिखाई दी।
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कार्यक्रम स्थल के बाहर दोनों विभागों की ओर से प्रदर्शनी के लिए स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों पर शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, नवाचारों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। समारोह में पहुंचे शिक्षक और उनके परिजन इन स्टॉलों को भी देखते रहे। प्रदर्शनी स्थल पर भी लोगों की आवाजाही बनी रही। पूरे परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सम्मान समारोह शुरू होने से पहले प्रेक्षागृह में उत्साह का माहौल बना रहा। शिक्षकों के लिए यह सिर्फ पुरस्कार पाने का अवसर नहीं बल्कि उनके कार्य और योगदान को सार्वजनिक रूप से पहचान मिलने का क्षण था। सभागार में मौजूद शिक्षकों के बीच इसी उपलब्धि की चर्चा रही।
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