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Gorakhpur News: विश्वविद्यालय प्रशासन ने न्यायिक जांच समिति को सौंपी रिपोर्ट
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पीडीएफ
विश्वविद्यालय प्रशासन ने न्यायिक जांच समिति को सौंपी रिपोर्ट
विवि 21 जुलाई को लेकर हुए विवाद पर न्यायिक जांच समिति से करा रहा जांच
एबीवीपी के 26 कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर 14 अगस्त तक मांगा गया था जवाब
एबीवीपी कार्यकर्ताओं के जवाब नहीं देने पर विवि ने समिति को सौंपा रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में 21 जुलाई हुए विवाद की जांच के लिए गठित न्यायिक समिति को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। एबीवीपी कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर नियंता कार्यालय में मौखिक या लिखित पक्ष रखने का मौका दिया गया था। उनका पक्ष नहीं रखने पर विस्तृत रिपोर्ट समिति को सौंप दी गई।
शुल्क वृद्धि और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के निष्कासन के विरोध में 21 जुलाई को धरना-प्रदर्शन के दौरान आंदोलन उग्र हो गया था। कुलपति कार्यालय में तोड़फोड़ के साथ कुलपति एवं कुलसचिव से भी अभद्रता किया गया। विवाद का वीडियो भी वायरल हुआ था। इसके बाद विश्वविद्यालय के मुख्य नियंता डॉ. सत्यपाल सिंह की तहरीर पर कैंट पुलिस ने 22 नामजद एबीवीपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया था। 11 दिन बाद एक अगस्त को एबीवीपी कार्यकर्ता जेल से रिहा हुए।
उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए न्यायिक जांच समिति का गठन किया। समिति में एक सेवानिवृत्त जज शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 11 अगस्त को 26 एबीवीपी कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर 14 अगस्त तक नियंता कार्यालय में प्रस्तुत होकर लिखित या मौखिक पक्ष रखने को कहा गया था। एबीवीपी कार्यकर्ता निर्धारित समय सीमा के अंदर अपना जवाब देने नहीं पहुंचे। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार की शाम को विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर न्यायिक जांच समिति को सौंप दिया।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने न्यायिक जांच समिति को सौंपी रिपोर्ट
विवि 21 जुलाई को लेकर हुए विवाद पर न्यायिक जांच समिति से करा रहा जांच
एबीवीपी के 26 कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर 14 अगस्त तक मांगा गया था जवाब
एबीवीपी कार्यकर्ताओं के जवाब नहीं देने पर विवि ने समिति को सौंपा रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में 21 जुलाई हुए विवाद की जांच के लिए गठित न्यायिक समिति को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। एबीवीपी कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर नियंता कार्यालय में मौखिक या लिखित पक्ष रखने का मौका दिया गया था। उनका पक्ष नहीं रखने पर विस्तृत रिपोर्ट समिति को सौंप दी गई।
शुल्क वृद्धि और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के निष्कासन के विरोध में 21 जुलाई को धरना-प्रदर्शन के दौरान आंदोलन उग्र हो गया था। कुलपति कार्यालय में तोड़फोड़ के साथ कुलपति एवं कुलसचिव से भी अभद्रता किया गया। विवाद का वीडियो भी वायरल हुआ था। इसके बाद विश्वविद्यालय के मुख्य नियंता डॉ. सत्यपाल सिंह की तहरीर पर कैंट पुलिस ने 22 नामजद एबीवीपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया था। 11 दिन बाद एक अगस्त को एबीवीपी कार्यकर्ता जेल से रिहा हुए।
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उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए न्यायिक जांच समिति का गठन किया। समिति में एक सेवानिवृत्त जज शामिल हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 11 अगस्त को 26 एबीवीपी कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर 14 अगस्त तक नियंता कार्यालय में प्रस्तुत होकर लिखित या मौखिक पक्ष रखने को कहा गया था। एबीवीपी कार्यकर्ता निर्धारित समय सीमा के अंदर अपना जवाब देने नहीं पहुंचे। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार की शाम को विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर न्यायिक जांच समिति को सौंप दिया।
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