Gorakhpur News: बरामद किए गए फर्जी मीटर अब भी लगे हैं उपभोक्ताओं के परिसर में
पूर्वांचल एमडी को पत्र भेजकर एसटीएफ की रिपोट का हवाला देते हुए कहा कि एसटीएफ ने विभिन्न जोन के वितरण खंडों के कनेक्शन पर इस्तेमाल मीटर शंट लगाने वाले गिरोह से बरामद हुए है। जांच कराकर बताएं कि ये मीटर गिरोह के पास कैसे पहुंचे?
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एसटीएफ लखनऊ ने पिछले दिनों मीटर गैंग के सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से गोरखपुर जोन के उपभोक्ताओं को आवंटित 19 मीटर बरामद हुए थे। इसकी जांच मुख्य अभियंता ने करवाई तो ये सभी मीटर उपभोक्ताओं के परिसर में ही लगे मिले।
इससे साफ है कि मीटर गैंग के साथ जोन के किसी कर्मचारी की मिलीभगत जरूर रही होगी। ये सभी मीटर देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर और ग्रामीण खंड द्वितीय क्षेत्र के थे।
दरअसल यूपी एसटीएफ के निशाने पर बिजली मीटर में शंट लगाने वाला गैंग है। एसटीएफ ने चेयरमैन को 19 कनेक्शन मीटर की डिटेल भेजी है। ये सभी शंट लगाने वाले गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से मिले थे। चेयरमैन ने इन कनेक्शनों की डिटेल रिपोर्ट मुख्य अभियंता से मांगी थी।
पूर्वांचल एमडी को पत्र भेजकर एसटीएफ की रिपोट का हवाला देते हुए कहा कि एसटीएफ ने विभिन्न जोन के वितरण खंडों के कनेक्शन पर इस्तेमाल मीटर शंट लगाने वाले गिरोह से बरामद हुए है। जांच कराकर बताएं कि ये मीटर गिरोह के पास कैसे पहुंचे? पूर्वांचल निगम के मुख्य अभियंता वाणिज्य संजय वर्मा ने चेयरमैन के निर्देश का हवाला देते हुए जोन के मुख्य अभियंता को पत्र लिखा था।
इसी का उल्लेख करते हुए मुख्य अभियंता ने मामले की जांच करवाई। इसमें सभी मीटरों को उपभोक्ताओं के परिसर में लगा पाया गया। अब सवाल है कि आखिर कैसे इन मीटरों का नकली मीटर संख्या तैयार किया गया।
मुख्य अभियंता आशु कालिया ने बताया कि जांच करवाई गई थी। सभी मीटर उपभोक्ताओं के परिसर में लगे थे, जो एसटीएफ ने गैंग के पास से बरामद किया।
कनेक्शन पर जारी नंबर गैंग के पास पहुंचा
मुख्य अभियंता के पास जांच में आई रिपोर्ट के अनुसार जो मीटर एसटीएफ को मिले थे, उस नंबर के असली मीटर उपभोक्ताओं के परिसर में ही थे। जैसे, महाराजगंज की इंद्रावती देवी के परिसर पर 741801659209 कनेक्शन संख्या पर बिजली कनेक्शन है। इनके परिसर में लगा मीटर 1642499 है और एसटीएफ ने गैंग के पास से जो मीटर पकड़े उनके पास भी इसी नंबर के मीटर मिले थे। जबकि जांच में आया कि 22 दिसंबर 2017 को इनका कनेक्शन जारी किया गया था। इस परिसर पर संबंधित सहायक अभियंता (मीटर) ने परीक्षण में पाया कि इस नंबर वाला मीटर उपभोक्ता के परिसर में लगा हुआ था। ऐसी ही स्थिति सभी 18 मीटरों की भी मिली।