Gorakhpur News: दो वर्ष का रिकॉर्ड सील, पांच संदिग्ध कर्मियों की छुट्टियां रद्द
विश्वविद्यालय के बीटेक के अलग-अलग पाठ्यक्रम में फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रवेश लेने का मामला पकड़ में आया है। अभी तक की जांच में पाया गया है कि 2020-21 बैच के 22 और 2021-22 बैच के 18 छात्रों को प्रवेश दिया गया, जबकि इन छात्रों का नाम मेरिट सूची में नहीं था।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में बीटेक की कक्षाओं में फर्जी दस्तावेजों की जांच की आंच कर्मचारियों के अलावा शिक्षकों और अधिकारियों पर भी आ सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सत्र 2017-18 और 2018-19 में प्रवेश के सारे रिकॉर्ड सील कर दिए हैं। वहीं, पांच संदिग्ध कर्मचारियों की छुट्टियों के लिए दिए गए आवेदन को निरस्त कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय के बीटेक के अलग-अलग पाठ्यक्रम में फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रवेश लेने का मामला पकड़ में आया है। अभी तक की जांच में पाया गया है कि 2020-21 बैच के 22 और 2021-22 बैच के 18 छात्रों को प्रवेश दिया गया, जबकि इन छात्रों का नाम मेरिट सूची में नहीं था।
विवि प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद सभी 40 छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया। सभी विद्यार्थी गोरखपुर के ही रहने वाले हैं। इसमें पांच विद्यार्थियों का पता दूसरे शहर का दिया गया है, लेकिन वह मूल निवासी शहर के ही हैं। ऐसे में शहर के ही रैकेट के सक्रिय होने का अंदेशा जताया गया है।
हालांकि, इस मामले में चूक कई स्तर पर हुई है। विश्वविद्यालय के प्रवेश प्रकोष्ठ, परीक्षा विभाग और वित्त विभाग ने भी प्रवेश के लिए बनी मेरिट लिस्ट और प्रवेश लेने वाले छात्रों की सूची का मिलान नहीं कराया। शुल्क का भी हिसाब-किताब नहीं मिलाया गया। इसकी चर्चा बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर में खूब रही और जिम्मेदारों पर सवाल उठाए गए।
विवि आज दर्ज कराएगा मुकदमा
कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि प्रवेश में फर्जीवाड़े को लेकर विश्वविद्यालय बृहस्पतिवार को मुकदमा दर्ज कराएगा। विवि प्रशासन ने इसकी तैयारी कर ली है। तहरीर के साथ ही साक्ष्य के तौर पर दस्तावेज भी उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, विवि ने शासन को पहले ही पत्र भेजकर सारे मामले से अवगत करा दिया है।
एक अधिकारी के खास लिपिक की भूमिका भी संदिग्ध
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक विभाग में तैनात एक अधिकारी के खास लिपिक की भूमिका भी संदिग्ध है। इस अधिकारी पर मेहरबानी की चर्चा भी खूब है। कहा जा रहा है कि अधिकारी ने अपनी तैनाती के बाद दबाव बनाकर उस कर्मचारी को अपने यहां तैनात कराया। मामले की सुगबुगाहट आते ही कर्मचारी को अवकाश पर भेज दिया गया है।